बुजुर्ग माता-पिता के प्रति घटती संवेदनशीलता और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर नाटक ‘क्रियाकर्म ट्वेंटी फोर सेवन एट द रेट जीमेल डॉट कॉम’ ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। मंगलवार शाम राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग में बिम्ब सांस्कृतिक मंच के कलाकारों ने इसका मंचन किया। राम किशोर नाग लिखित नाटक का निर्देशन महर्षि कपूर ने किया। इसे संस्कृति मंत्रालय, दिल्ली और संस्कृति निदेशालय, उत्तर प्रदेश का सहयोग मिला। कहानी एक बुजुर्ग दंपती और उनके तीन बेटों के इर्द-गिर्द घूमती है। तीनों बेटे नौकरी, परिवार और अपनी सुविधाओं में इतने व्यस्त हैं कि माता-पिता के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी उन्हें बोझ लगती है। ऐसे में वे अंतिम संस्कार के पैकेज उपलब्ध कराने वाली कंपनी की मदद लेते हैं। तीनों भावनाओं के बजाय खर्च को प्राथमिकता देते हुए सबसे सस्ता पैकेज चुनते हैं। श्रद्धा, संस्कार और पुत्रधर्म की भावना जुड़ी रही नाटक यहीं से अपने व्यंग्य को धार देता है। जिस क्रियाकर्म में श्रद्धा, संस्कार और पुत्रधर्म की भावना जुड़ी रही है, वह बाजार में एक पैकेज बन जाता है। प्रस्तुति में बिना किसी उपदेश के परिस्थितियों के जरिए रिश्तों में बढ़ती संवेदनहीनता को सामने रखा गया। नाटक के अंतिम दृश्य में शेखर का बेटा डब्बू पूरी बातचीत सुन लेता है। इसके बाद वह कंपनी के मैनेजर को अपने माता-पिता के क्रियाकर्म के लिए सौ रुपए एडवांस दे देता है। पिता की डांट पर डब्बू का मासूम जवाब पूरे नाटक का सार बन जाता है। दर्शकों के सामने सवाल खड़ा होता है कि जब माता-पिता अपने माता-पिता के लिए समय और संवेदना नहीं निकालेंगे, तो बच्चे उनसे अलग व्यवहार क्यों सीखेंगे? अंतिम दृश्य ने उठाए सवाल नाटक का अंत इसी सवाल के साथ होता है कि अगली पीढ़ी को दिए जा रहे मूल्य क्या कल लौटकर हमारे सामने नहीं आएंगे। व्यंग्य और करुणा के जरिए प्रस्तुति ने यह संकेत दिया कि रिश्तों का क्रियाकर्म अंतिम संस्कार से बहुत पहले शुरू हो जाता है। मंच पर गुरुदत्त पाण्डेय, अम्बुज अग्रवाल, कुलदीप श्रीवास्तव, केके पाण्डेय, विशाल सिंह, दक्ष कपूर और शिखा श्रीवास्तव ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं।

