Tamil Nadu के मुख्यमंत्री Joseph Vijay बोले- विधानसभा में जबड़े पर हाथ रखना अनजाने में हुआ

Tamil Nadu के मुख्यमंत्री Joseph Vijay बोले- विधानसभा में जबड़े पर हाथ रखना अनजाने में हुआ

चेन्नई, आठ सितंबर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा में अपने जबड़े को छूने का उनका हाव-भाव जानबूझकर नहीं किया गया था और पूरी तरह अनजाने में हुआ। विजय ने सात सितंबर की विधानसभा की अपनी भाव-भंगिमा का जिक्र करते हुए कहा, “मेरी शारीरिक हाव-भाव की वह प्रतिक्रिया अनायास हुई थी। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वह किसी भी तरह जानबूझकर नहीं की गई थी।”
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा, इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि इसे किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य के रूप में न देखा जाए।

विजय का एक हाथ से जबड़े को पकड़ने का हावभाव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया था। कुछ लोगों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का मजाक उड़ा रहे थे, क्योंकि आपातकाल (1975-77) के दौरान हिरासत में रहने के दौरान स्टालिन के जबड़े में फ्रैक्चर हो गया था। इस मुद्दे पर माकपा के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि आपातकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन को पुलिस ने बुरी तरह पीटा था और उनका जबड़ा टूट गया था।

षणमुगम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, ‘‘बॉडी शेमिंग कोई भी करे, वह निंदनीय है। खुद मुख्यमंत्री का ऐसा करना गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है।’’
माकपा नेता ने कहा कि विधानसभा को व्यक्तिगत हमलों के मंच में बदलना, जिसका जनकल्याण से कोई लेना-देना नहीं है या इसे केवल अपने नेता की प्रशंसा करने का मंच बना देना पूरी तरह अनैतिक कृत्य है। माकपा उन दलों में शामिल है जो टीवीके सरकार का समर्थन करते हैं और यह सरकार कांग्रेस, वाम दलों, आईयूएमएल और वीसीके के समर्थन पर टिकी है।

विजय ने यह हाव-भाव उस समय किया था, जब वह 1970 के दशक की सरकरिया आयोग की रिपोर्ट और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर मुख्य विपक्षी दल द्रमुक पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साध रहे थे। इस दौरान उन्होंने हाथ से अपना जबड़ा ऊपर उठाने और सिर को थोड़ा एक ओर झुकाने जैसा हाव-भाव किया था। इस पृष्ठभूमि में विजय ने स्पष्ट किया कि उनका यह हाव-भाव पूरी तरह अनजाने में हुआ था।

पिछले कुछ वर्षों में अन्नाद्रमुक के कुछ नेताओं और समर्थकों ने दावा किया था कि आपातकाल के दौरान स्टालिन को मीसा (आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) के तहत जेल नहीं भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने स्टालिन के जेल जाने से इनकार नहीं किया था। स्टालिन ने 2019 में यह भी कहा था कि उनसे यह साबित करने के लिए कहा जाना कि उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया था, अपमानजनक था।

उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर चर्चा करना अनुचित है। अपनी आत्मकथा ‘उंगलिल ओरुवन’ (आप में से एक) में स्टालिन ने 1976 में अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए समय का उल्लेख किया है। उन्होंने संक्षेप में यह भी बताया है कि जेल को एक यातना कक्ष में बदल दिया गया था, जहां मौत की आवाजें गूंजती थीं।

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