Why Share Market Fall Today: भारतीय शेयर बाजार आज मंगलवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 0.73 फीसदी या 555.23 अंक की गिरावट के साथ 75,577.58 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 0.61 फीसदी या 144 अंक की गिरावट के साथ 23,635 पर बंद हुआ। बाजार बंद होते समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 9 शेयर हरे निशान पर और 21 शेयर लाल निशान पर थे।
सेंसेक्स पैक के शेयरों का हाल

निफ्टी-50 के इन शेयरों में आई सबसे अधिक गिरावट
| कंपनी का नाम | शेयर प्राइस (₹) | प्रतिशत चेंज |
|---|---|---|
| एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस | 1,696.60 | -2.04% |
| आईसीआईसीआई बैंक | 1,399.40 | -1.97% |
| एक्सिस बैंक | 1,244.90 | -1.67% |
| अल्ट्राटेक सीमेंट | 11,009.00 | -1.49% |
| एलएंडटी | 3,946.10 | -1.32% |
| रिलायंस इंडस्ट्रीज | 1,294.90 | -1.11% |
| एचडीएफसी बैंक | 703.00 | -1.06% |
| मारुति सुजुकी | 12,641.00 | -0.93% |
| टाटा स्टील | 184.15 | -0.79% |
| सिप्ला | 1,384.00 | -0.79% |
| एशियन पेंट्स | 2,481.60 | -0.77% |
| श्रीराम फाइनेंस | 1,029.00 | -0.77% |
| विप्रो | 171.50 | -0.75% |
| ट्रेंट | 2,793.60 | -0.74% |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 419.25 | -0.68% |
| टीसीएस | 2,255.50 | -0.64% |
निफ्टी-50 के इन शेयरों में आई सबसे अधिक तेजी
| कंपनी का नाम | शेयर प्राइस (₹) | प्रतिशत चेंज |
|---|---|---|
| भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) | 410.55 | 1.62% |
| हिंदुस्तान यूनिलीवर | 1,980.00 | 1.02% |
| आयशर मोटर्स | 7,747.50 | 0.98% |
| ओएनजीसी | 236.00 | 0.98% |
| अडानी पोर्ट्स | 1,710.00 | 0.93% |
| अपोलो हॉस्पिटल्स | 8,837.50 | 0.88% |
| बजाज ऑटो | 11,880.00 | 0.68% |
| डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज | 1,151.00 | 0.59% |
| कोल इंडिया | 420.25 | 0.33% |
| हिंडाल्को इंडस्ट्रीज | 1,009.00 | 0.30% |
| इटरनल | 321.60 | 0.25% |
| एसबीआई | 1,008.00 | 0.21% |
| नेस्ले इंडिया | 1,400.50 | 0.18% |
| ग्रेसिम इंडस्ट्रीज | 3,306.80 | 0.13% |
| अडानी एंटरप्राइजेज | 2,953.10 | 0.11% |
| एचडीएफसी लाइफ | 533.80 | 0.11% |
क्यों आई बाजार मे आज गिरावट?
- 100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
बाजार की चिंता की सबसे बड़ी वजह इस समय कच्चे तेल की कीमत है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। बाजार की नजर ईरान और ओमान के बीच उस संभावित समझौते पर भी है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की आवाजाही को संभालने में मदद मिल सकती है। दूसरी तरफ चीन की रिफाइनरियों की ओर से खरीद बढ़ने से भी कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। ब्रेंट क्रूड मंगलवार शाम 1.52 फीसदी या 1.47 डॉलर की बढ़त के साथ 98.47 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। महंगा कच्चा तेल सरकार के वित्तीय गणित को बिगाड़ सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा करता है। अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी कमजोर पड़ सकती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं है।
- US-Iran तनाव ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। मंगलवार को ईरान की ओर से अमेरिका को आर्थिक युद्ध की धमकी देने और अमेरिकी युद्धपोतों पर एडवांस्ड मिसाइल दागे जाने की खबरों ने चिंता बढ़ाई। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले का असर भी देखने को मिला। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के मुताबिक, अबहा, खमीस मुशैत, जजान और नजरान शहरों पर हुए हमलों में 73 लोग घायल हुए। इन घटनाओं का असर सिर्फ भू-राजनीतिक स्तर पर नहीं पड़ता। तेल की सप्लाई, शिपिंग और महंगाई जैसे मुद्दों के कारण दुनिया भर के शेयर बाजार प्रभावित होते हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।
- फेड के फैसले से पहले सतर्क हैं निवेशक
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिक गई है। फेड की अगली बैठक 15 और 16 सितंबर को होने वाली है। इस बैठक से पहले निवेशक कुछ मुनाफा निकालकर नकदी बढ़ा रहे हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक बाजार में इस समय करीब 60 फीसदी संभावना इस बात की देखी जा रही है कि फेड अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ा सकता है। अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो दुनियाभर के बाजारों पर असर पड़ सकता है। विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी एसेट्स की ओर जा सकते हैं। भारत जैसे बाजार के लिए यह दबाव की स्थिति बन सकती है।
- लगातार पांचवें हफ्ते दबाव में रहा मार्केट
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, घरेलू बाजार में करीब पांच हफ्तों से धीरे-धीरे गिरावट का दौर चल रहा है। उनके मुताबिक महंगा कच्चा तेल, IT शेयरों में बिकवाली, इस महीने अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की आशंका और IPO बाजार में लगातार आ रहा पैसा इस कमजोरी की प्रमुख वजहें हैं। आईपीओ में पैसा लगाने के लिए निवेशक कई बार मौजूदा शेयरों से पैसा निकालते हैं। इससे सेकेंडरी मार्केट पर भी दबाव बनता है।
विजयकुमार का मानना है कि जिन वजहों से बाजार में गिरावट आई है, उनमें फिलहाल बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए छोटी अवधि में कमजोरी बनी रह सकती है। हालांकि, बाजार की यह गिरावट बड़े और मजबूत कंपनियों के शेयरों में मौके भी पैदा कर रही है, खासकर उन शेयरों में जिनके फंडामेंटल बेहतर हो रहे हैं, लेकिन कीमतों में अभी ज्यादा तेजी नहीं आई है।
Nifty का अगला रुख किन स्तरों पर तय होगा?
कोटक सिक्योरिटीज के हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान के मुताबिक 23,800 का स्तर निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस रहेगा। जब तक इंडेक्स इस स्तर के नीचे है, बाजार में बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। उनके मुताबिक नीचे की तरफ 23,670 से 23,600 का स्तर महत्वपूर्ण है। वहीं, अगर निफ्टी 23,800 के ऊपर मजबूती से निकलता है तो यह 23,950 से 24,050 तक वापसी कर सकता है। यानी फिलहाल बाजार में दोनों तरफ के लेवल साफ दिखाई दे रहे हैं। 23,800 के ऊपर मजबूती तेजी का संकेत दे सकती है, जबकि 23,600 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है।
टेक्निकल चार्ट भी दे रहा कमजोरी के संकेत
एक्सिस सिक्योरिटी के मुताबिक निफ्टी के चार्ट पर एक बड़ी बियरिश कैंडल बनी है। यह ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और बिकवाली के दबाव की ओर इशारा करती है। चार्ट में lower highs और lower lows का पैटर्न भी नजर आ रहा है। इसके अलावा कई सपोर्ट लेवल टूट चुके हैं। तकनीकी संकेतक RSI भी नीचे की ओर जा रहा है और अपनी reference line से नीचे ट्रेड कर रहा है। इससे बाजार में मंदी की ताकत बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)


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