बेगूसराय में चारा लेने गए पिता-पुत्र की करंट से मौत:पिता को बचाने पहुंचा बेटा भी झुलसा, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप; 3 घंटे सड़क जाम

बेगूसराय में चारा लेने गए पिता-पुत्र की करंट से मौत:पिता को बचाने पहुंचा बेटा भी झुलसा, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप; 3 घंटे सड़क जाम

बेगूसराय में सोमवार को मवेशियों के लिए चारा लाने गए पिता-पुत्र की करंट लगने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान सिसवा गांव निवासी कैलाश दास (49) और उनके 28 वर्षीय पुत्र संतोष कुमार के रूप में की गई है। घटना रिफाइनरी थाना क्षेत्र की केशावे पंचायत स्थित सिसवा गांव (दास टोला) की है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम और भारी आक्रोश का माहौल बन गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजली विभाग की घोर लापरवाही और प्रशासन की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए केशावे गांव के पास रिफाइनरी रोड को करीब 3 घंटे तक पूरी तरह जाम रखा। बताया सिसवा गांव पिछले 5 दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। गांव के रास्तों और खेतों में कमर तक पानी भरा हुआ है। घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए चार लेकर लौटने के दौरान लटक रही बिजली की तार के चपेट में आए सोमवार को कैलाश दास अपने पुत्र संतोष कुमार के साथ घर से करीब 50 मीटर की दूरी पर बाढ़ के पानी के बीच मवेशियों के लिए हरा चारा (घास) काटने गए थे। लौटने के दौरान पानी में पहले से ही लटक रहे बिजली के नंगे तार की चपेट में कैलाश दास आ गए। करंट की चपेट में आते ही कैलाश दास पानी में ही तड़पने लगे। पिता को छटपटाते और तड़पते देख बेटा संतोष कुमार उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ा। लेकिन पानी में करंट फैला होने के कारण संतोष भी उसकी चपेट में आ गया। दोनों पिता-पुत्र बुरी तरह झुलसकर पानी में ही अचेत हो गए। घटना के कुछ देर बाद जब आसपास के ग्रामीणों की नजर पानी में पड़े दोनों पिता-पुत्र पर पड़ी, तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने किसी तरह बिजली कटवाकर दोनों को पानी से बाहर निकाला और आनन-फानन में इलाज के लिए निजी अस्पताल ले गए। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए और केशावे गांव के पास रिफाइनरी रोड को बांस-बल्ला लगाकर जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि घटना की सूचना तुरंत बिजली विभाग को दी गई थी। रिफाइनरी थाना पुलिस तो मौके पर पहुंच गई, लेकिन सूचना देने के 3 घंटे बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। अधिकारियों और बिजली विभाग के खिलाफ की नारेबाजी अधिकारियों की इस बेरुखी से लोग और अधिक आक्रोशित हो गए तथा बिजली विभाग के खिलाफ उग्र नारेबाजी करने लगे। पुलिस अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बावजूद ग्रामीण बिजली विभाग के वरीय अधिकारियों को बुलाने और तुरंत मुआवजे के लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। घटना की सूचना मिलते ही मटिहानी विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह तथा बिजली विभाग की एसडीओ लक्ष्मी कुमारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक बोगो सिंह और एसडीओ लक्ष्मी कुमारी ने आक्रोशित लोगों से करीब दो घंटे से अधिक समय तक वार्ता की। इसके बाद सड़क जाम समाप्त कराया गया। बिजली विभाग के एसडीओ लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार पीड़ित व्यक्ति पानी वाले पंप को बाढ़ के पानी से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे। तभी बिना लाइन काटे काम करने के दौरान वे करंट की चपेट में आ गए। दोनों मृतकों को 4-4 लाख मुआवजा दिया जाएगा। मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वंशावली और बैंक खाता विवरण जमा होने के एक सप्ताह के अंदर मुआवजे की राशि खाते में भेज दी जाएगी। बाढ़ के दौरान सांप-बिच्छू के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर बिजली चालू रखी गई थी, लेकिन हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा के लिहाज से जम्पर खोलकर बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। विधायक बोले- एक सप्ताह में मृतक के परिजन को मुआवाज मिले विधायक बोगो सिंह ने कहा कि बिजली विभाग बेगूसराय की एसडीओ मैडम आई हैं। हमको लगता है कि ये घटनास्थल पर नहीं जा पाए हैं। चूंकि रोड पर पानी है और नाव की व्यवस्था प्रशासन के द्वारा अभी तक नहीं की गई है, जो बड़ा दुखद है। यह स्थल नहीं देख पाए, इसलिए घटना की सही जानकारी इनको नहीं हो पाई है। ये कन्फ्यूज्ड हैं कि सर्विस तार से हुआ है कि मेन तार से हुआ है। अधिक पानी होने के कारण तार पानी में चला गया, जिस कारण दोनों बाप-बेटा देख नहीं पाए। एक सप्ताह में मुआवजा चाहिए। मृतक के दादा प्रयाग दास) का कहना हम लोग पिछले चार-पांच दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। अभी तक न तो प्रशासन की ओर से और न ही बीडीओ की तरफ से कोई सुध लेने आया है। खाने-पीने के लिए लोग तरस रहे हैं। आवागमन के लिए न नाव की व्यवस्था है और न ही स्टीमर दिया गया है। कैलाश दास और संतोष दास चारा लाने गए थे। पानी में तार गिरा हुआ था। एक को करंट मारा तो दूसरा बचाने गया, दोनों खत्म हो गए। परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है। सरकार से मांग है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और गांव में तुरंत नाव तथा राहत की व्यवस्था की जाए। मृतक संतोष के भाई विपिन कुमार दास का कहना है कि पानी में तार गिरा हुआ था। बिजली विभाग की लापरवाही से दोनों की जान गई है। संतोष कुमार के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, परिवार काफी गरीब है। मजदूरी और मवेशी पालकर ही घर का गुजारा चलता था। हमारी मांग है कि पीड़ित परिवार को सरकार तुरंत उचित मुआवजा दे ताकि छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण हो सके। बेगूसराय में सोमवार को मवेशियों के लिए चारा लाने गए पिता-पुत्र की करंट लगने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान सिसवा गांव निवासी कैलाश दास (49) और उनके 28 वर्षीय पुत्र संतोष कुमार के रूप में की गई है। घटना रिफाइनरी थाना क्षेत्र की केशावे पंचायत स्थित सिसवा गांव (दास टोला) की है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम और भारी आक्रोश का माहौल बन गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजली विभाग की घोर लापरवाही और प्रशासन की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए केशावे गांव के पास रिफाइनरी रोड को करीब 3 घंटे तक पूरी तरह जाम रखा। बताया सिसवा गांव पिछले 5 दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। गांव के रास्तों और खेतों में कमर तक पानी भरा हुआ है। घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए चार लेकर लौटने के दौरान लटक रही बिजली की तार के चपेट में आए सोमवार को कैलाश दास अपने पुत्र संतोष कुमार के साथ घर से करीब 50 मीटर की दूरी पर बाढ़ के पानी के बीच मवेशियों के लिए हरा चारा (घास) काटने गए थे। लौटने के दौरान पानी में पहले से ही लटक रहे बिजली के नंगे तार की चपेट में कैलाश दास आ गए। करंट की चपेट में आते ही कैलाश दास पानी में ही तड़पने लगे। पिता को छटपटाते और तड़पते देख बेटा संतोष कुमार उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ा। लेकिन पानी में करंट फैला होने के कारण संतोष भी उसकी चपेट में आ गया। दोनों पिता-पुत्र बुरी तरह झुलसकर पानी में ही अचेत हो गए। घटना के कुछ देर बाद जब आसपास के ग्रामीणों की नजर पानी में पड़े दोनों पिता-पुत्र पर पड़ी, तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने किसी तरह बिजली कटवाकर दोनों को पानी से बाहर निकाला और आनन-फानन में इलाज के लिए निजी अस्पताल ले गए। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए और केशावे गांव के पास रिफाइनरी रोड को बांस-बल्ला लगाकर जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि घटना की सूचना तुरंत बिजली विभाग को दी गई थी। रिफाइनरी थाना पुलिस तो मौके पर पहुंच गई, लेकिन सूचना देने के 3 घंटे बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। अधिकारियों और बिजली विभाग के खिलाफ की नारेबाजी अधिकारियों की इस बेरुखी से लोग और अधिक आक्रोशित हो गए तथा बिजली विभाग के खिलाफ उग्र नारेबाजी करने लगे। पुलिस अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बावजूद ग्रामीण बिजली विभाग के वरीय अधिकारियों को बुलाने और तुरंत मुआवजे के लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। घटना की सूचना मिलते ही मटिहानी विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह तथा बिजली विभाग की एसडीओ लक्ष्मी कुमारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक बोगो सिंह और एसडीओ लक्ष्मी कुमारी ने आक्रोशित लोगों से करीब दो घंटे से अधिक समय तक वार्ता की। इसके बाद सड़क जाम समाप्त कराया गया। बिजली विभाग के एसडीओ लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार पीड़ित व्यक्ति पानी वाले पंप को बाढ़ के पानी से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे। तभी बिना लाइन काटे काम करने के दौरान वे करंट की चपेट में आ गए। दोनों मृतकों को 4-4 लाख मुआवजा दिया जाएगा। मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वंशावली और बैंक खाता विवरण जमा होने के एक सप्ताह के अंदर मुआवजे की राशि खाते में भेज दी जाएगी। बाढ़ के दौरान सांप-बिच्छू के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर बिजली चालू रखी गई थी, लेकिन हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा के लिहाज से जम्पर खोलकर बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। विधायक बोले- एक सप्ताह में मृतक के परिजन को मुआवाज मिले विधायक बोगो सिंह ने कहा कि बिजली विभाग बेगूसराय की एसडीओ मैडम आई हैं। हमको लगता है कि ये घटनास्थल पर नहीं जा पाए हैं। चूंकि रोड पर पानी है और नाव की व्यवस्था प्रशासन के द्वारा अभी तक नहीं की गई है, जो बड़ा दुखद है। यह स्थल नहीं देख पाए, इसलिए घटना की सही जानकारी इनको नहीं हो पाई है। ये कन्फ्यूज्ड हैं कि सर्विस तार से हुआ है कि मेन तार से हुआ है। अधिक पानी होने के कारण तार पानी में चला गया, जिस कारण दोनों बाप-बेटा देख नहीं पाए। एक सप्ताह में मुआवजा चाहिए। मृतक के दादा प्रयाग दास) का कहना हम लोग पिछले चार-पांच दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। अभी तक न तो प्रशासन की ओर से और न ही बीडीओ की तरफ से कोई सुध लेने आया है। खाने-पीने के लिए लोग तरस रहे हैं। आवागमन के लिए न नाव की व्यवस्था है और न ही स्टीमर दिया गया है। कैलाश दास और संतोष दास चारा लाने गए थे। पानी में तार गिरा हुआ था। एक को करंट मारा तो दूसरा बचाने गया, दोनों खत्म हो गए। परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है। सरकार से मांग है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और गांव में तुरंत नाव तथा राहत की व्यवस्था की जाए। मृतक संतोष के भाई विपिन कुमार दास का कहना है कि पानी में तार गिरा हुआ था। बिजली विभाग की लापरवाही से दोनों की जान गई है। संतोष कुमार के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, परिवार काफी गरीब है। मजदूरी और मवेशी पालकर ही घर का गुजारा चलता था। हमारी मांग है कि पीड़ित परिवार को सरकार तुरंत उचित मुआवजा दे ताकि छोटे-छोटे बच्चों का पालन-पोषण हो सके।  

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