आरा शहर में बाढ़ और जलजमाव ने हजारों लोगों की जिंदगी को घरों में कैद कर दिया है। गंगा की सहायक नदियों में लगातार बढ़ रहे जलस्तर का असर अब गांगी नदी पर भी दिखने लगा है। गांगी नदी के उफान पर आने के बाद आरा नगर निगम के वार्ड संख्या-1, 2, 3, 4, 5 और 11 के कई मोहल्लों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। गांगी सुरक्षा तटबंध के उत्तर दिशा के कई इलाके जलमग्न हैं, जबकि दक्षिण दिशा के मोहल्लों में जलजमाव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि करीब 10 से 12 हजार लोगों के लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है। गलियों और मुख्य रास्तों पर कमर तक पानी है। कई घरों और दुकानों के निचले हिस्से में पानी घुस चुका है। लोग जरूरी सामान लेने के लिए भी पानी में उतरने को मजबूर हैं। पवन सिंह के घर वाले इलाके की स्थिति सबसे ज्यादा खराब शहर के मारुति नगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां भोजपुरी अभिनेता सह भाजपा एमएलसी पवन सिंह के घर में भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। उनके ससुर सुनील सिंह और सास कलावती देवी पिछले चार दिनों से घर से निकल नहीं पा रहे हैं। घर के अंदर घुटने तक पानी जमा है। पवन सिंह के घर के आसपास के करीब 40 से अधिक घरों के निचले फ्लोर पर तीन फीट तक पानी भर चुका है। घरों में रखे सामान को ऊंचे स्थानों पर रखना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि लगातार पानी बढ़ने से अब घर में रहना भी मुश्किल होता जा रहा है। लोग बोले- न टहल पा रहे, न सामान खरीदने बाजार जा पा रहे शहर के पॉश इलाकों में लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए ऊंचे और बहुमंजिले मकान भी जलजमाव के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। 50 लाख, 60 लाख और एक करोड़ रुपए तक खर्च कर बनाए गए मकानों के सामने भी पानी जमा है। लोगों के लिए घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। न वे सुबह-शाम टहल पा रहे हैं और न ही बाजार जाकर रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीद पा रहे हैं। बच्चों का स्कूल जाना बंद है। कई परिवार कई दिनों से घरों में बंद हैं। मोहल्लों में जगह-जगह कचरा पानी में उतराता दिखाई दे रहा है। इससे सड़ांध और तेज बदबू के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। लोगों को सता रहा सांप, बिच्छू का डर घरों में बाढ़ के पानी के घुसने के बाद प्रभावित लोगों को सबसे ज्यादा डर डूबने के साथ-साथ सांप, बिच्छू और दूसरे जहरीले जीवों का है। पानी के कारण नालियां और गलियां एक हो गई हैं। ऐसे में रात के समय घर से निकलना और भी खतरनाक हो गया है। कई परिवारों ने बताया कि हरी सब्जियां और जरूरी खाद्य सामग्री नहीं मिल पा रही है। दुकानों के बंद रहने से परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि जलजमाव के बावजूद अब तक प्रशासन या नगर निगम की ओर से अपेक्षित मदद नहीं पहुंची है। मझौआ के पासवान टोली में 50 घरों के 300 लोग पानी से घिरे मझौंवा, पासवान टोली, सिंगही शिवशक्ति नगर, उत्तरी कृष्णानगर, गौसगंज, बरहबतरा, उजियार टोला और मोती टोला में भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। मझौआ की पासवान टोली में करीब 50 घरों में रहने वाले लगभग 300 लोग चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। गलियों में कमर से ऊपर तक पानी जमा है। लोगों को घर से निकलने के लिए गहरे पानी में उतरना पड़ रहा है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग सिर और कंधे पर गैस सिलेंडर रखकर पानी पार कर रहे हैं। छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा रहा है। महिलाएं भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी में उतरने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी आशा देवी ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो घरों के अंदर रहना भी मुश्किल हो जाएगा। ‘चार दिन से घर में पानी, इमरजेंसी हुई तो इसी पानी में निकलना पड़ेगा’ पवन सिंह के ससुर सुनील सिंह ने बताया कि पिछले चार दिनों से घर में पानी घुसा हुआ है। पति-पत्नी घर में कैद हैं। पवन सिंह की सास की तबीयत भी ठीक नहीं है। जरूरत का कोई भी सामान लाने में काफी परेशानी हो रही है। दूसरे लोगों की मदद से सामान घर तक पहुंच रहा है। रात में अगर कोई इमरजेंसी हो गई तो इसी घुटने तक पानी में घुसकर जाना पड़ेगा, जो खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने बताया कि बांध पर चढ़ने वाला रास्ता भी पानी में डूबकर बंद हो चुका है। बाहर जाने के लिए छोटी नावों का सहारा लेना पड़ेगा, लेकिन वह भी समय पर मिलना मुश्किल है। पवन सिंह खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में घूमकर राहत सामग्री बांट रहे हैं और पीड़ितों की मदद में लगे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। ‘12 लोगों के साथ पांच दिन से घर में कैद, घर का सामान खराब’ पवन सिंह की पड़ोसी रीता सिन्हा ने बताया कि घर में कमर तक पानी घुस गया है। पानी के कारण घर में रखा सामान खराब हो गया है। पिछले पांच दिनों से 12 लोगों के साथ घर में कैद हैं। वह खुद प्राइवेट टीचर हैं, लेकिन पानी के कारण स्कूल तक नहीं जा पा रही हैं। बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सभी लोग घर के ऊपरी तल पर रहने को मजबूर हैं। सांप, बिच्छू समेत जहरीले जीवों का डर लगातार बना रहता है। पानी के कारण ये जहरीले जीव ऊपर घर तक पहुंच जाते हैं। इतना पैसा खर्च कर घर बनाने के बावजूद इलाके में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। ‘जिंदगी नरकीय हो गई, कोई देखने वाला तक नहीं’ मारुति नगर निवासी मुरारी प्रसाद ने बताया कि हमलोगों की जिंदगी नरकीय हो गई है। पवन सिंह के घर के साथ पूरा मोहल्ला पानी में डूबा हुआ है। घरों में घुटने से ऊपर तक पानी घुसा है। कोई देखने वाला तक नहीं है। जो करना है, लोगों को खुद ही करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। ‘राशन-दवा के लिए तरसना पड़ रहा, बच्चों की पढ़ाई बंद’ मारुति नगर निवासी राम भरोसा सिंह ने बताया कि कॉलोनी में 30 से ज्यादा घर हैं। सभी के लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है। दवा, घर का राशन और जरूरी सामान के लिए लोगों को तरसना पड़ रहा है। घर से बाहर निकलते ही पानी में पैर फिसलने का डर रहता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हमलोग आखिर क्या करें, समझ में नहीं आ रहा। प्रशासन की ओर से आने-जाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। आरा शहर में बाढ़ और जलजमाव ने हजारों लोगों की जिंदगी को घरों में कैद कर दिया है। गंगा की सहायक नदियों में लगातार बढ़ रहे जलस्तर का असर अब गांगी नदी पर भी दिखने लगा है। गांगी नदी के उफान पर आने के बाद आरा नगर निगम के वार्ड संख्या-1, 2, 3, 4, 5 और 11 के कई मोहल्लों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। गांगी सुरक्षा तटबंध के उत्तर दिशा के कई इलाके जलमग्न हैं, जबकि दक्षिण दिशा के मोहल्लों में जलजमाव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि करीब 10 से 12 हजार लोगों के लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है। गलियों और मुख्य रास्तों पर कमर तक पानी है। कई घरों और दुकानों के निचले हिस्से में पानी घुस चुका है। लोग जरूरी सामान लेने के लिए भी पानी में उतरने को मजबूर हैं। पवन सिंह के घर वाले इलाके की स्थिति सबसे ज्यादा खराब शहर के मारुति नगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां भोजपुरी अभिनेता सह भाजपा एमएलसी पवन सिंह के घर में भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। उनके ससुर सुनील सिंह और सास कलावती देवी पिछले चार दिनों से घर से निकल नहीं पा रहे हैं। घर के अंदर घुटने तक पानी जमा है। पवन सिंह के घर के आसपास के करीब 40 से अधिक घरों के निचले फ्लोर पर तीन फीट तक पानी भर चुका है। घरों में रखे सामान को ऊंचे स्थानों पर रखना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि लगातार पानी बढ़ने से अब घर में रहना भी मुश्किल होता जा रहा है। लोग बोले- न टहल पा रहे, न सामान खरीदने बाजार जा पा रहे शहर के पॉश इलाकों में लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए ऊंचे और बहुमंजिले मकान भी जलजमाव के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। 50 लाख, 60 लाख और एक करोड़ रुपए तक खर्च कर बनाए गए मकानों के सामने भी पानी जमा है। लोगों के लिए घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। न वे सुबह-शाम टहल पा रहे हैं और न ही बाजार जाकर रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीद पा रहे हैं। बच्चों का स्कूल जाना बंद है। कई परिवार कई दिनों से घरों में बंद हैं। मोहल्लों में जगह-जगह कचरा पानी में उतराता दिखाई दे रहा है। इससे सड़ांध और तेज बदबू के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। लोगों को सता रहा सांप, बिच्छू का डर घरों में बाढ़ के पानी के घुसने के बाद प्रभावित लोगों को सबसे ज्यादा डर डूबने के साथ-साथ सांप, बिच्छू और दूसरे जहरीले जीवों का है। पानी के कारण नालियां और गलियां एक हो गई हैं। ऐसे में रात के समय घर से निकलना और भी खतरनाक हो गया है। कई परिवारों ने बताया कि हरी सब्जियां और जरूरी खाद्य सामग्री नहीं मिल पा रही है। दुकानों के बंद रहने से परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि जलजमाव के बावजूद अब तक प्रशासन या नगर निगम की ओर से अपेक्षित मदद नहीं पहुंची है। मझौआ के पासवान टोली में 50 घरों के 300 लोग पानी से घिरे मझौंवा, पासवान टोली, सिंगही शिवशक्ति नगर, उत्तरी कृष्णानगर, गौसगंज, बरहबतरा, उजियार टोला और मोती टोला में भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। मझौआ की पासवान टोली में करीब 50 घरों में रहने वाले लगभग 300 लोग चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। गलियों में कमर से ऊपर तक पानी जमा है। लोगों को घर से निकलने के लिए गहरे पानी में उतरना पड़ रहा है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग सिर और कंधे पर गैस सिलेंडर रखकर पानी पार कर रहे हैं। छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा रहा है। महिलाएं भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी में उतरने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी आशा देवी ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो घरों के अंदर रहना भी मुश्किल हो जाएगा। ‘चार दिन से घर में पानी, इमरजेंसी हुई तो इसी पानी में निकलना पड़ेगा’ पवन सिंह के ससुर सुनील सिंह ने बताया कि पिछले चार दिनों से घर में पानी घुसा हुआ है। पति-पत्नी घर में कैद हैं। पवन सिंह की सास की तबीयत भी ठीक नहीं है। जरूरत का कोई भी सामान लाने में काफी परेशानी हो रही है। दूसरे लोगों की मदद से सामान घर तक पहुंच रहा है। रात में अगर कोई इमरजेंसी हो गई तो इसी घुटने तक पानी में घुसकर जाना पड़ेगा, जो खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने बताया कि बांध पर चढ़ने वाला रास्ता भी पानी में डूबकर बंद हो चुका है। बाहर जाने के लिए छोटी नावों का सहारा लेना पड़ेगा, लेकिन वह भी समय पर मिलना मुश्किल है। पवन सिंह खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में घूमकर राहत सामग्री बांट रहे हैं और पीड़ितों की मदद में लगे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। ‘12 लोगों के साथ पांच दिन से घर में कैद, घर का सामान खराब’ पवन सिंह की पड़ोसी रीता सिन्हा ने बताया कि घर में कमर तक पानी घुस गया है। पानी के कारण घर में रखा सामान खराब हो गया है। पिछले पांच दिनों से 12 लोगों के साथ घर में कैद हैं। वह खुद प्राइवेट टीचर हैं, लेकिन पानी के कारण स्कूल तक नहीं जा पा रही हैं। बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सभी लोग घर के ऊपरी तल पर रहने को मजबूर हैं। सांप, बिच्छू समेत जहरीले जीवों का डर लगातार बना रहता है। पानी के कारण ये जहरीले जीव ऊपर घर तक पहुंच जाते हैं। इतना पैसा खर्च कर घर बनाने के बावजूद इलाके में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। ‘जिंदगी नरकीय हो गई, कोई देखने वाला तक नहीं’ मारुति नगर निवासी मुरारी प्रसाद ने बताया कि हमलोगों की जिंदगी नरकीय हो गई है। पवन सिंह के घर के साथ पूरा मोहल्ला पानी में डूबा हुआ है। घरों में घुटने से ऊपर तक पानी घुसा है। कोई देखने वाला तक नहीं है। जो करना है, लोगों को खुद ही करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। ‘राशन-दवा के लिए तरसना पड़ रहा, बच्चों की पढ़ाई बंद’ मारुति नगर निवासी राम भरोसा सिंह ने बताया कि कॉलोनी में 30 से ज्यादा घर हैं। सभी के लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है। दवा, घर का राशन और जरूरी सामान के लिए लोगों को तरसना पड़ रहा है। घर से बाहर निकलते ही पानी में पैर फिसलने का डर रहता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हमलोग आखिर क्या करें, समझ में नहीं आ रहा। प्रशासन की ओर से आने-जाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है।

