नालंदा में उफनती सकरी और मुहाने नदी के तेवर नरम पड़ने के बाद जिला प्रशासन भले ही बाढ़ के हालात सामान्य होने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जलस्तर कम होने के बावजूद सकरी और मुहाने नदी पर बने डायवर्सन अब तक चालू नहीं हो सके हैं। नतीजतन, नालंदा और पड़ोसी शेखपुरा जिले की एक बड़ी आबादी पिछले एक सप्ताह से भारी फजीहत झेलने को विवश है। संपर्क पथ टूट जाने से ग्रामीण मीलों का चक्कर काटने को मजबूर हैं, वहीं खेतों में पानी जमा रहने से अन्नदाताओं की मेहनत गलकर नष्ट हो रही है। 15 की जगह 40 किलोमीटर का थकाऊ सफर बिहारशरीफ-कतरीसराय मार्ग पर दरियापुर के पास जर्जर पुल से आवाजाही पहले ही बंद थी। अब विकल्प के तौर पर सकरी नदी में बना डायवर्सन भी पानी में डूबा हुआ है। इससे मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क भंग है। जो दूरी पहले 12 से 15 किलोमीटर में तय हो जाती थी, उसके लिए अब लोगों को गिरियक-पावापुरी होकर 35 से 40 किलोमीटर या अस्थावां होकर 25 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। यही हाल शेखपुरा और बरबीघा के पश्चिमी इलाके के मुसाफिरों का भी है। बिजली के खंभे का ‘जुगाड़’ बना सहारा, हादसे का डर चंडी प्रखंड के सतनाग के पास मुहाने नदी के तेज बहाव में डायवर्सन बहने से सतनाग, मलबिगहा, नोनिया बिगहा, अमरौरा, द्वारिका बिगहा और सुमका गांव का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कट गया है। सरकारी स्तर पर मरम्मत न होने से परेशान ग्रामीणों ने टूटे हिस्से पर बिजली का पोल रखकर कामचलाऊ ‘जुगाड़’ पुल बनाया है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और मरीज जान हथेली पर रखकर इसी पोल के सहारे नदी पार कर रहे हैं, जिससे हर पल बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। 200 बीघे से अधिक खेत बने तालाब, फसलें तबाह होने की कगार पर अस्थावां प्रखंड के ओंदा में जिरायन नदी का टूटा तटबंध दुरुस्त तो कर दिया गया है, लेकिन जलजमाव किसानों के लिए नासूर बन चुका है। ओंदा, नेरुत, गोमचक, मौलाना बिगहा और भिखनी बिगहा के खेतों से पानी की निकासी बेहद धीमी है। नालंदा में उफनती सकरी और मुहाने नदी के तेवर नरम पड़ने के बाद जिला प्रशासन भले ही बाढ़ के हालात सामान्य होने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जलस्तर कम होने के बावजूद सकरी और मुहाने नदी पर बने डायवर्सन अब तक चालू नहीं हो सके हैं। नतीजतन, नालंदा और पड़ोसी शेखपुरा जिले की एक बड़ी आबादी पिछले एक सप्ताह से भारी फजीहत झेलने को विवश है। संपर्क पथ टूट जाने से ग्रामीण मीलों का चक्कर काटने को मजबूर हैं, वहीं खेतों में पानी जमा रहने से अन्नदाताओं की मेहनत गलकर नष्ट हो रही है। 15 की जगह 40 किलोमीटर का थकाऊ सफर बिहारशरीफ-कतरीसराय मार्ग पर दरियापुर के पास जर्जर पुल से आवाजाही पहले ही बंद थी। अब विकल्प के तौर पर सकरी नदी में बना डायवर्सन भी पानी में डूबा हुआ है। इससे मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क भंग है। जो दूरी पहले 12 से 15 किलोमीटर में तय हो जाती थी, उसके लिए अब लोगों को गिरियक-पावापुरी होकर 35 से 40 किलोमीटर या अस्थावां होकर 25 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। यही हाल शेखपुरा और बरबीघा के पश्चिमी इलाके के मुसाफिरों का भी है। बिजली के खंभे का ‘जुगाड़’ बना सहारा, हादसे का डर चंडी प्रखंड के सतनाग के पास मुहाने नदी के तेज बहाव में डायवर्सन बहने से सतनाग, मलबिगहा, नोनिया बिगहा, अमरौरा, द्वारिका बिगहा और सुमका गांव का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कट गया है। सरकारी स्तर पर मरम्मत न होने से परेशान ग्रामीणों ने टूटे हिस्से पर बिजली का पोल रखकर कामचलाऊ ‘जुगाड़’ पुल बनाया है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और मरीज जान हथेली पर रखकर इसी पोल के सहारे नदी पार कर रहे हैं, जिससे हर पल बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। 200 बीघे से अधिक खेत बने तालाब, फसलें तबाह होने की कगार पर अस्थावां प्रखंड के ओंदा में जिरायन नदी का टूटा तटबंध दुरुस्त तो कर दिया गया है, लेकिन जलजमाव किसानों के लिए नासूर बन चुका है। ओंदा, नेरुत, गोमचक, मौलाना बिगहा और भिखनी बिगहा के खेतों से पानी की निकासी बेहद धीमी है।

