छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर अभी कमजोर है, लेकिन अगले 72 घंटे में इसका पैटर्न बदलने वाला है। अभी प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो रही है, जबकि 8 सितंबर से उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके बाद इसका दायरा धीरे-धीरे मध्य छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ेगा। मौसम विभाग ने 8 सितंबर को सरगुजा और बलरामपुर में, 9 सितंबर को 6 जिलों में और 10 सितंबर को रायपुर समेत 16 जिलों में मध्यम से भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। यानी बारिश का असर उत्तर से शुरू होकर तीन दिन में प्रदेश के बड़े हिस्से तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 8 सितंबर को सरगुजा और बलरामपुर में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। 9 सितंबर को इसका असर सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर के साथ बिलासपुर, कोरबा और बलौदाबाजार तक पहुंचने की संभावना है। 10 सितंबर को बारिश का दायरा और बढ़ेगा। इस दिन सरगुजा, जशपुर, कोरिया, एमसीबी, बलरामपुर, बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मुंगेली, बलौदाबाजार, रायपुर, बेमेतरा, दुर्ग और महासमुंद में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। तीन दिनों में बारिश का फोकस उत्तर से मध्य छत्तीसगढ़ की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है। 8 सितंबर को जहां सिर्फ दो जिलों के लिए यलो अलर्ट है, वहीं 10 सितंबर को यह संख्या बढ़कर 16 हो जाएगी। भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. जीके दास, कृषि मौसम विज्ञानी बारिश की मात्रा से ज्यादा उसका गैप फसलों के लिए अहम प्रदेश में मानसूनी बारिश सामान्य से 4 फीसदी कम है। कुल बारिश के लिहाज से यह कमी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन बारिश का वितरण असमान बना हुआ है। कई इलाकों में कुछ दिनों तक बारिश नहीं होती और फिर कम समय में तेज बारिश की स्थिति बनती है। ऐसे समय में बारिश की कुल मात्रा से ज्यादा यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि खेतों को पानी कितने अंतराल में मिल रहा है। 8 से 10 सितंबर के बीच बारिश बढ़ने पर जिन इलाकों में खेतों में नमी कम हो गई है, वहां धान समेत खरीफ फसलों को फायदा मिल सकता है। वहीं जिन खेतों में पहले से पर्याप्त नमी है और लगातार तेज बारिश होती है, वहां जलभराव से नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। खासकर निचले खेतों में पानी की निकासी की व्यवस्था जरूरी होगी।

