आरा रेलवे स्टेशन से 200 मीटर दूर ट्रेन नंबर 15483 अलीद्वारपुर-दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस डिरेल हो गई। भास्कर इन्विस्टिगेशन में सामने आया कि महानंदा एक्सप्रेस 10 मिनट पहले जिस ट्रैक पर खड़ी थी, उसके बगल से पटना से आ रही अमृत भारत एक्सप्रेस को गुजरना था। स्टेशन मास्टर की ओर से अमृत भारत के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया, लेकिन महानंदा एक्सप्रेस के लोकोपायलट ने इसे अपनी ट्रेन के लिए समझ लिया और ट्रेन को ट्रैक पर दौड़ा दी। ट्रेन करीब 200 मीटर दूर गई तो लोकोपायलट को समझ आया कि वो गलत रूट पर है। फिर उसने तत्काल स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी दी। फिर ट्रेन को रिवर्स करने के दौरान दो बोगियों के दो-दो पहिए ट्रैक से उतर गए। महानंदा एक्सप्रेस के लोकोपायलट से आखिर कैसे चूक हुई? ट्रेन के डिरेल होने पर जिम्मेदारों के क्या जवाब आए? घटना को लेकर एडीआरएम ने क्या कार्रवाई की? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें… अब समझिए ग्रीन सिग्नल को लेकर लोकोपायलट से चूक कैसे हुई आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर खड़ी महानंदा एक्सप्रेस के लोकोपायलट और दो को-लोकोपायलट केबिन में मौजूद थे। ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी लोकोपायलट उमाशंकर पांडेय के पास थी। 10 मिनट तक स्टेशन पर ठहराव का समय पूरा होने के बाद उमाशंकर पांडेय ने आगे करीब 100 मीटर दूर खंभे में ग्रीन सिग्नल को देखा। उमाशंकर पांडेय को लगा कि टाइम खत्म हो चुका है, इसलिए स्टेशन मास्टर की ओर से ग्रीन सिग्नल दिया गया है। फिर उमाशंकर पांडेय ने अपनी ट्रेन को आगे बढ़ा दी। जब ट्रेन का इंजन, उसके पीछे जेनरल कोच और एसी का एच-वन कोच 593/9A पोल संख्या क्रॉस कर चुका था, तब लोकोपायलट को लगा कि वो गलत रूट पर हैं। दरअसल, लोकोपायलट को जो सिग्नल दिखा था, वो अमृत भारत के लिए था। उमाशंकर पांडेय इसे समझ नहीं पाए और उन्होंने ट्रेन को आगे बढ़ा दी। ट्रेन दिल्ली वाले रूट पर न जाकर पोल संख्या 593/9A के पास मौजूद चेंजिंग प्वाइंट से ट्रैक चेंज कर सासाराम वाले रूट पर चली गई। अब पढ़िए ट्रेन के डिरेल होने के बाद जिम्मेदारों ने क्या कहा लोकोपायलट उमाशंकर पांडेय ने बताया कि सुबह 3: 52 बजे मैं अपनी ट्रेन 15483 अलीद्वारपुर-दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस को लेकर आरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंचा था। 10 मिनट तक ठहराव के बाद 4:02 बजे मुझे ग्रीन सिग्नल दिखा और मैंने ट्रेन ट्रैक पर बढ़ा दी। ट्रेन का इंजन, उसके पीछे जेनरल कोच और एसी का एच-वन कोच 593/9A पोल संख्या क्रॉस कर चुका था। कुछ देर बाद मैंने देखा कि मेरी गाड़ी का प्वाइंट दूसरी ओर बना हुआ है, मैं दूसरी ओर जा रहा हूं, तत्काल मैंने ट्रेन को रोक दी। उमाशंकर ने कहा कि जैसे ही मैं गाड़ी को रिवर्स करने लगा, तो कुछ टेक्निकल दिक्कत आई। फिर मैंने ट्रेन के पीछे मौजूद गार्ड से बात की और धीरे-धीरे ट्रेन को बैक करने लगा। इसी दौरान मेरी गाड़ी का इंजन तो निकल गया था, लेकिन 2 बोगियां डिरेल हो गई। इसमें एक जनरल और दूसरा एसी कोच है। दोनों बोगियों के दो-दो चक्के पटरी से उतरे थे। आरा स्टेशन मैनेजर ने घटना के बाद क्या कहा? महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे स्टेशन प्रबंधक एनके राय ने बताया कि सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर मुझे ट्रेन के डिरेल होने की सूचना मिली। मैं तुरंत घर से गाड़ी रिजर्व कर 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंचा। घटनास्थल पर मैंने देखा कि एसएलआर और दूसरी एच-1 बोगी डिरेल हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों बोगियों के दो-दो पहिए पटरी से उतरे थे। इसके बाद वरीय अधिकारियों से बात की और घटना की सूचना दी। अनाउंस करके ट्रेन के यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर बैठा दिया। इसके बाद दूसरे इंजन से ट्रेन के डिरेल बोगी को छोड़ गाड़ी को रिवर्स कर दूसरी तरफ लाया गया। अनाउंस कर प्लेटफॉर्म नंबर चार पर मौजूद यात्रियों को दोबारा ट्रेन में सीट दिलाई और ट्रेन को रवाना किया गया। हादसे की वजह गलत सिग्नल मिलना था। इस मामले में गलती किसकी है, ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने के 3 घंटे के अंदर ही एडीआरएम ने आरा रेलवे स्टेशन मैनेजर एनके राय को सस्पेंडं कर दिया। दिल्ली जा रहे यात्री ने कहा- अचानक जोरदार झटका लगा महानंदा एक्सप्रेस से सफर कर रहे यात्री संजय पासवान ने कहा कि महानंदा एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय 2:53 बजे पटना जंक्शन पहुंची थी। इसके बाद ट्रेन 3:54 बजे आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-2 पर पहुंची। यानी आरा पहुंचने में ट्रेन करीब 9 मिनट की देरी से पहुंची। आरा जंक्शन से ट्रेन निकलने के कुछ ही देर बाद अचानक जोरदार झटका लगा। कोच के अंदर बैठे सभी यात्री घबरा गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। काफी देर तक ट्रेन खड़ी रही। बाद में फर्स्ट एसी के यात्रियों को सेकेंड और थर्ड एसी कोच में शिफ्ट किया गया। इस दौरान यात्रियों को पता चला कि ट्रेन का आगे वाला बोगी पटरी से उतर गया है। घटना के बाद सभी यात्री काफी परेशान थे, लेकिन भगवान का शुक्र है कि बड़ा हादसा टल गया और किसी की जान नहीं गई। असल में किसकी गलती ये जांच के बाद ही पता चलेगा रेलवे के अधिकारियों की ओर से की गई प्रारंभिक जांच में सिग्नल और ट्रेन के मूवमेंट की वजह से हादसा हुआ है। रेलवे अधिकारी ये जांच कर रहे हैं कि अप मेन लाइन का ग्रीन सिग्नल किस ट्रेन के लिए था, सिग्नल सासाराम लाइन की ओर क्यों गया और महानंदा एक्सप्रेस गलत दिशा में कैसे आगे बढ़ गई? घटना के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच और रेलवे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। आरा रेलवे स्टेशन से 200 मीटर दूर ट्रेन नंबर 15483 अलीद्वारपुर-दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस डिरेल हो गई। भास्कर इन्विस्टिगेशन में सामने आया कि महानंदा एक्सप्रेस 10 मिनट पहले जिस ट्रैक पर खड़ी थी, उसके बगल से पटना से आ रही अमृत भारत एक्सप्रेस को गुजरना था। स्टेशन मास्टर की ओर से अमृत भारत के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया, लेकिन महानंदा एक्सप्रेस के लोकोपायलट ने इसे अपनी ट्रेन के लिए समझ लिया और ट्रेन को ट्रैक पर दौड़ा दी। ट्रेन करीब 200 मीटर दूर गई तो लोकोपायलट को समझ आया कि वो गलत रूट पर है। फिर उसने तत्काल स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी दी। फिर ट्रेन को रिवर्स करने के दौरान दो बोगियों के दो-दो पहिए ट्रैक से उतर गए। महानंदा एक्सप्रेस के लोकोपायलट से आखिर कैसे चूक हुई? ट्रेन के डिरेल होने पर जिम्मेदारों के क्या जवाब आए? घटना को लेकर एडीआरएम ने क्या कार्रवाई की? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें… अब समझिए ग्रीन सिग्नल को लेकर लोकोपायलट से चूक कैसे हुई आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर खड़ी महानंदा एक्सप्रेस के लोकोपायलट और दो को-लोकोपायलट केबिन में मौजूद थे। ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी लोकोपायलट उमाशंकर पांडेय के पास थी। 10 मिनट तक स्टेशन पर ठहराव का समय पूरा होने के बाद उमाशंकर पांडेय ने आगे करीब 100 मीटर दूर खंभे में ग्रीन सिग्नल को देखा। उमाशंकर पांडेय को लगा कि टाइम खत्म हो चुका है, इसलिए स्टेशन मास्टर की ओर से ग्रीन सिग्नल दिया गया है। फिर उमाशंकर पांडेय ने अपनी ट्रेन को आगे बढ़ा दी। जब ट्रेन का इंजन, उसके पीछे जेनरल कोच और एसी का एच-वन कोच 593/9A पोल संख्या क्रॉस कर चुका था, तब लोकोपायलट को लगा कि वो गलत रूट पर हैं। दरअसल, लोकोपायलट को जो सिग्नल दिखा था, वो अमृत भारत के लिए था। उमाशंकर पांडेय इसे समझ नहीं पाए और उन्होंने ट्रेन को आगे बढ़ा दी। ट्रेन दिल्ली वाले रूट पर न जाकर पोल संख्या 593/9A के पास मौजूद चेंजिंग प्वाइंट से ट्रैक चेंज कर सासाराम वाले रूट पर चली गई। अब पढ़िए ट्रेन के डिरेल होने के बाद जिम्मेदारों ने क्या कहा लोकोपायलट उमाशंकर पांडेय ने बताया कि सुबह 3: 52 बजे मैं अपनी ट्रेन 15483 अलीद्वारपुर-दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस को लेकर आरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंचा था। 10 मिनट तक ठहराव के बाद 4:02 बजे मुझे ग्रीन सिग्नल दिखा और मैंने ट्रेन ट्रैक पर बढ़ा दी। ट्रेन का इंजन, उसके पीछे जेनरल कोच और एसी का एच-वन कोच 593/9A पोल संख्या क्रॉस कर चुका था। कुछ देर बाद मैंने देखा कि मेरी गाड़ी का प्वाइंट दूसरी ओर बना हुआ है, मैं दूसरी ओर जा रहा हूं, तत्काल मैंने ट्रेन को रोक दी। उमाशंकर ने कहा कि जैसे ही मैं गाड़ी को रिवर्स करने लगा, तो कुछ टेक्निकल दिक्कत आई। फिर मैंने ट्रेन के पीछे मौजूद गार्ड से बात की और धीरे-धीरे ट्रेन को बैक करने लगा। इसी दौरान मेरी गाड़ी का इंजन तो निकल गया था, लेकिन 2 बोगियां डिरेल हो गई। इसमें एक जनरल और दूसरा एसी कोच है। दोनों बोगियों के दो-दो चक्के पटरी से उतरे थे। आरा स्टेशन मैनेजर ने घटना के बाद क्या कहा? महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे स्टेशन प्रबंधक एनके राय ने बताया कि सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर मुझे ट्रेन के डिरेल होने की सूचना मिली। मैं तुरंत घर से गाड़ी रिजर्व कर 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंचा। घटनास्थल पर मैंने देखा कि एसएलआर और दूसरी एच-1 बोगी डिरेल हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों बोगियों के दो-दो पहिए पटरी से उतरे थे। इसके बाद वरीय अधिकारियों से बात की और घटना की सूचना दी। अनाउंस करके ट्रेन के यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर बैठा दिया। इसके बाद दूसरे इंजन से ट्रेन के डिरेल बोगी को छोड़ गाड़ी को रिवर्स कर दूसरी तरफ लाया गया। अनाउंस कर प्लेटफॉर्म नंबर चार पर मौजूद यात्रियों को दोबारा ट्रेन में सीट दिलाई और ट्रेन को रवाना किया गया। हादसे की वजह गलत सिग्नल मिलना था। इस मामले में गलती किसकी है, ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने के 3 घंटे के अंदर ही एडीआरएम ने आरा रेलवे स्टेशन मैनेजर एनके राय को सस्पेंडं कर दिया। दिल्ली जा रहे यात्री ने कहा- अचानक जोरदार झटका लगा महानंदा एक्सप्रेस से सफर कर रहे यात्री संजय पासवान ने कहा कि महानंदा एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय 2:53 बजे पटना जंक्शन पहुंची थी। इसके बाद ट्रेन 3:54 बजे आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-2 पर पहुंची। यानी आरा पहुंचने में ट्रेन करीब 9 मिनट की देरी से पहुंची। आरा जंक्शन से ट्रेन निकलने के कुछ ही देर बाद अचानक जोरदार झटका लगा। कोच के अंदर बैठे सभी यात्री घबरा गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। काफी देर तक ट्रेन खड़ी रही। बाद में फर्स्ट एसी के यात्रियों को सेकेंड और थर्ड एसी कोच में शिफ्ट किया गया। इस दौरान यात्रियों को पता चला कि ट्रेन का आगे वाला बोगी पटरी से उतर गया है। घटना के बाद सभी यात्री काफी परेशान थे, लेकिन भगवान का शुक्र है कि बड़ा हादसा टल गया और किसी की जान नहीं गई। असल में किसकी गलती ये जांच के बाद ही पता चलेगा रेलवे के अधिकारियों की ओर से की गई प्रारंभिक जांच में सिग्नल और ट्रेन के मूवमेंट की वजह से हादसा हुआ है। रेलवे अधिकारी ये जांच कर रहे हैं कि अप मेन लाइन का ग्रीन सिग्नल किस ट्रेन के लिए था, सिग्नल सासाराम लाइन की ओर क्यों गया और महानंदा एक्सप्रेस गलत दिशा में कैसे आगे बढ़ गई? घटना के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच और रेलवे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

