गोपालगंज का मॉडल सदर अस्पताल करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उद्देश्य था कि जिले के लोगों को आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन अस्पताल शुरू होने के दो साल से अधिक समय बाद भी इसकी जमीनी तस्वीर सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। अस्पताल परिसर में गंदगी, जलजमाव और सीवर की बदहाल व्यवस्था मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इमरजेंसी के पास जमा है गंदा पानी अस्पताल परिसर में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण शौचालयों और नालियों का गंदा पानी खुले में बह रहा है। सबसे खराब स्थिति इमरजेंसी वार्ड के ठीक बगल की है। जहां गंदा पानी जमा होने से दुर्गंध का माहौल बना हुआ है। इससे मरीजों, उनके परिजनों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को भी परेशानी हो रही है। खुले में बह रहा नाली और शौचालय का पानी अस्पताल में सीवर सिस्टम की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। नालियों और शौचालयों से निकलने वाला पानी उचित निकासी व्यवस्था के अभाव में परिसर के खुले हिस्सों में फैल रहा है। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इलाज कराने पहुंचे मरीजों को स्वस्थ माहौल मिलने के बजाय गंदगी और दुर्गंध के बीच समय बिताना पड़ रहा है। दो साल बाद भी नहीं बना इमरजेंसी का गेट अस्पताल के निर्माण के दौरान जिस स्थान पर अब जलजमाव और गंदा पानी जमा है, वहां इमरजेंसी के लिए एक नए गेट का निर्माण प्रस्तावित था। अस्पताल शुरू हुए दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह गेट जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। जिस जगह मरीजों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार होना था, वह अब गंदे पानी और कचरे के कारण बदहाल नजर आती है। करोड़ों खर्च, लेकिन व्यवस्था सवालों में करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस मॉडल अस्पताल की मौजूदा स्थिति निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अस्पताल परिसर में जलनिकासी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या का लंबे समय तक बने रहना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। मरीजों के स्वास्थ्य पर भी खतरा अस्पताल का उद्देश्य बीमार लोगों को बेहतर इलाज और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है। लेकिन परिसर में जमा गंदा पानी, दुर्गंध और गंदगी मरीजों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए मॉडल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति आखिर कब सुधरेगी और जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का स्थायी समाधान कब करेंगे। गोपालगंज का मॉडल सदर अस्पताल करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उद्देश्य था कि जिले के लोगों को आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन अस्पताल शुरू होने के दो साल से अधिक समय बाद भी इसकी जमीनी तस्वीर सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। अस्पताल परिसर में गंदगी, जलजमाव और सीवर की बदहाल व्यवस्था मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इमरजेंसी के पास जमा है गंदा पानी अस्पताल परिसर में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण शौचालयों और नालियों का गंदा पानी खुले में बह रहा है। सबसे खराब स्थिति इमरजेंसी वार्ड के ठीक बगल की है। जहां गंदा पानी जमा होने से दुर्गंध का माहौल बना हुआ है। इससे मरीजों, उनके परिजनों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को भी परेशानी हो रही है। खुले में बह रहा नाली और शौचालय का पानी अस्पताल में सीवर सिस्टम की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। नालियों और शौचालयों से निकलने वाला पानी उचित निकासी व्यवस्था के अभाव में परिसर के खुले हिस्सों में फैल रहा है। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इलाज कराने पहुंचे मरीजों को स्वस्थ माहौल मिलने के बजाय गंदगी और दुर्गंध के बीच समय बिताना पड़ रहा है। दो साल बाद भी नहीं बना इमरजेंसी का गेट अस्पताल के निर्माण के दौरान जिस स्थान पर अब जलजमाव और गंदा पानी जमा है, वहां इमरजेंसी के लिए एक नए गेट का निर्माण प्रस्तावित था। अस्पताल शुरू हुए दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह गेट जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। जिस जगह मरीजों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार होना था, वह अब गंदे पानी और कचरे के कारण बदहाल नजर आती है। करोड़ों खर्च, लेकिन व्यवस्था सवालों में करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस मॉडल अस्पताल की मौजूदा स्थिति निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अस्पताल परिसर में जलनिकासी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या का लंबे समय तक बने रहना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। मरीजों के स्वास्थ्य पर भी खतरा अस्पताल का उद्देश्य बीमार लोगों को बेहतर इलाज और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है। लेकिन परिसर में जमा गंदा पानी, दुर्गंध और गंदगी मरीजों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए मॉडल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति आखिर कब सुधरेगी और जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का स्थायी समाधान कब करेंगे।

