Jhiram Ghati NIA Verdict: झीरम का फैसला आधा-अधूरा न्याय, बड़े सवाल अब भी अनसुलझे, जांच पर उठे सवाल

Jhiram Ghati NIA Verdict: झीरम का फैसला आधा-अधूरा न्याय, बड़े सवाल अब भी अनसुलझे, जांच पर उठे सवाल

Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी हमले में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे आधा-अधूरा न्याय करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता में कहा, कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन एनआईए ने जिन तथ्यों और आरोपों को अदालत के सामने रखा, उसी के आधार पर फैसला आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि झीरम हत्याकांड की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और घटना के पीछे संभावित राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की जांच नहीं की गई।

कांग्रेस के ये नेता हुए थे शहीद

नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार, दिनेश पटेल, अभिषेक गोलच्छा, अल्ला नूर, भागीरथी नाथ, मनोज जोशी, राजकुमार श्रीवास्तव, गणपत नाग, सदाशिव नाग, गोपी माधवन, योंगेंद्र शर्मा शामिल हैं।

महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने मारी थी 100 गोलियां

सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा नक्सली अपना दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी।

किसी की राजनीति सियासत उनके बेटे संभाल रहे तो किसी की पत्नी

झीरम कांड में शहीद होने के बाद कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक सियासत या तो पूरी तरह से खत्म हो गई या फिर उनके बेटे और पत्नी अब संभाल रही है। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की हत्या के बाद उनके छोटे बेटे उमेश पटेल अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं। इसी तरह महेंद्र कर्मा की हत्या के बाद उनकी पत्नी देवती कर्मा राजनीति में सक्रिय हैं। इसी तरह से योगेंद्र शर्मा के बाद उनकी पत्नी अनिता शर्मा, विद्याचरण शुक्ल के परिवार में अमित शुक्ल अपने परिवार की राजनीति को आगे बढ़ रहे हैं।

कांग्रेस के यह हैं बड़े सवाल

1- एनआईए ने हमले में करीब 200 नक्सलियों के शामिल होने की बात मानी थी और 39 लोगों को नामजद किया गया था, फिर आरोप सिद्ध केवल 10 लोगों पर ही क्यों हुए?
2- गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) और रमन्ना सहित कई प्रमुख नक्सली नेताओं के अगस्त 2014 तक नाम थे। सितंबर 2014 में इनके नाम हटा दिए गए।
3- आत्मसमर्पण करने वाले चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू दादा और केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता से एनआईए ने कब पूछताछ की।
4- घायल और जीवित बचे कितने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए गए।

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