भारतीय सेना अब मेड-इन-इंडिया गोलियां ही इस्तेमाल करेगी। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इंडो-रशियन राइफल्स (IRRPL) ने आज शनिवार को 5 साल के लिए एक डील की है। इसके तहत अडाणी डिफेंस भारतीय सेना की AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए 7.62mm साइज की गोलियां बनाकर सप्लाई करेगी। इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सेना को गोलियों के लिए अब किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और भारत में ही लगातार कारतूस मिलते रहेंगे। अमेठी में बन रहीं 6 लाख से ज्यादा AK-203 राइफल्स IRRPL भारत और रूस की सरकार द्वारा मिलकर 2019 में बनाई गई एक कंपनी है। इसका काम भारतीय सेना के लिए आधुनिक AK-203 राइफलें बनाना है। इस कंपनी का कारखाना उत्तर प्रदेश के अमेठी (कोरवा) में है। रक्षा मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में इस कारखाने में 6,01,427 AK-203 राइफलें बनाने का ऑर्डर दिया था। गोलियां अडाणी के कानपुर प्लांट में तैयार होंगी अडाणी डिफेंस ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपना नया कारखाना शुरू किया है, जहां छोटे हथियारों के लिए गोलियां बनाई जाती हैं। नई डील से देश में ही कारतूस और छोटे हथियार बनाने की ताकत बढ़ेगी, जिससे भारत रक्षा जरूरतों के मामले में खुद पर निर्भर बनेगा और आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती मिलेगी। IRRPL भारत और रूस की कंपनियों का ज्वाइंट वेंचर है इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) में भारत और रूस दोनों देशों की कंपनियां शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने IRRPL को AK-203 राइफल्स के घरेलू उत्पादन का काम सौंपा है। विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता होगी कम शुरुआत में भारत-रूस का यह डिफेंस प्रोग्राम सिर्फ देश में AK-203 राइफल बनाने तक सीमित था। अब मेड-इन-इंडिया गोलियों के जुड़ने से हथियार प्रणाली के इस महत्वपूर्ण हिस्से के लिए विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम हो जाएगी। भारत सरकार लगातार रक्षा उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता घटाने के प्रयास कर रही है। राइफल और गोली दोनों का उत्पादन देश में होने से यह प्रोजेक्ट पूरी तरह लोकल हो जाएगा।
सेना के लिए AK-203 राइफल की गोलियां भारत में बनेंगी:अडाणी डिफेंस 5 साल तक सप्लाई करेगी, IRRPL से डील साइन की

