CBI ने Subhash Chandra पर दर्ज की FIR, LIC Housing Finance से धोखाधड़ी का आरोप

CBI ने Subhash Chandra पर दर्ज की FIR, LIC Housing Finance से धोखाधड़ी का आरोप

नयी दिल्ली, पांच सिंतबर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के खिलाफ कथित तौर पर अपनी कुल संपत्ति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआईसीएचएफएल) से कर्ज लेने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों के अनुसार, इन कर्जों के भुगतान में चूक होने से सार्वजनिक क्षेत्र की ऋणदाता कंपनी को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। एलआईसीएचएफएल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है, जो अब प्राथमिकी का हिस्सा है, कि चंद्रा ने अपनी कुल संपत्ति से जुड़े प्रमाण पत्र जमा किए थे।

इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर 980 करोड़ रुपये के दो कर्जों को मंजूरी दी गई और राशि जारी की गई। एलआईसीएचएफएल उन ऋणदाताओं में से एक था, जिन्होंने एनसीएलएटी का रुख किया था। कंपनी ने एनसीएलटी की उस पुनर्भुगतान योजना का विरोध किया था, जिसमें करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले चंद्रा की निजी संपत्ति से ऋणदाताओं को केवल लगभग 6.5 करोड़ रुपये ही मिलने की बात कही गई थी।

प्राथमिकी में नामजद आरोपी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि यह शिकायत वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दी गई 500 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा से जुड़ी है, जिसमें पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणकर्ता थी। इसके अलावा 480 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी, जिसमें स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणकर्ता थी।

शिकायत के अनुसार, 500 करोड़ रुपये की वसंत सागर ऋण सुविधा को आवास इकाई के अधिग्रहण, अतिरिक्त वित्त पोषण और कारोबारी विस्तार के लिए मंजूरी दी गई थी। इस ऋण के लिए 28 मार्च, 2018 को चंद्रा की ओर से जारी सतत गारंटी को सुरक्षा के रूप में रखा गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 480 करोड़ रुपये की डिजिटल ऋण सुविधा को अलग ऋण खाते के तहत किराया प्रतिभूतिकरण योजना में किराया छूट सुविधा के रूप में मंजूरी दी गई थी।

इस ऋण के लिए भी चंद्रा की ओर से जारी सतत गारंटी को सुरक्षा के रूप में रखा गया था। ऋणदाता के अनुसार, चंद्रा की ओर से जमा किया गया कुल संपत्ति प्रमाण पत्र डीजेएम एंड कंपनी ने 28 मार्च, 2018 को जारी किया था। इसमें उनकी कुल संपत्ति करीब 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी।

एलआईसीएचएफएल ने कहा कि डिजिटल ऋण सुविधा को मंजूरी देने में चंद्रा की ओर से जमा किए गए कुल संपत्ति प्रमाण पत्र को भी आंशिक रूप से आधार बनाया गया था। यह प्रमाण पत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म एमपीजे एंड कंपनी ने 6 जुलाई, 2018 को जारी किया था, जिसमें उनकी कुल संपत्ति 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी। एलआईसीएचएफएल के अनुसार, बाद में ये दोनों ऋण खाते ‘डिफॉल्ट’ हो गए।

प्राथमिकी के अनुसार, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत बाद की कार्यवाही के दौरान चंद्रा ने एलआईसीएचएफएल को दिए गए प्रमाण पत्रों में बताई गई अपनी कुल संपत्ति से इनकार किया। प्राथमिकी में कहा गया है कि कार्यवाही के दौरान उद्योगपति चंद्रा ने 2024 में अपनी कुल संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये बताई, जबकि 2017-18 में यह 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होने की बात कही थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया, “सुभाष चंद्रा ने उधार लेने वाली कंपनियों वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड तथा उनके अधिकारियों और निदेशकों के साथ मिलीभगत कर एलआईसीएचएफएल को धोखा दिया।

इस मिलीभगत के जरिए इन कंपनियों को ऋण जारी करवाए गए, जिनका बाद में कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।”
इसमें राज्यसभा के पूर्व सदस्य पर झूठे दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया गया है, ताकि अपनी शुद्ध संपत्ति (नेट वर्थ) को बढ़ा-चढ़ाकर और गलत तरीके से दिखाकर एलआईसीएचएफएल को मुख्य उधारकर्ताओं को रकम जारी करने के लिए धोखा दिया जा सके। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया, “आरोपियों ने एलआईसीएचएफएल के भरोसे को तोड़ा; उन्होंने रकम का गलत इस्तेमाल किया और एलआईसीएचएफएल की वसूली को नाकाम करने के लिए व्यक्तिगत गारंटर की संपत्ति को खत्म कर दिया।

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