गोगा नवमी के अवसर पर शनिवार को खंडवा में वीर गोगादेव महाराज की छड़ी यात्रा का नगर भ्रमण हुआ। वाल्मीकि समाज की ओर से निकाली जा रही यह यात्रा करीब 128 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इस बार शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से 15 छड़ी निशान चल समारोह में शामिल हुए हैं। छड़ियों के भ्रमण को लेकर सुबह से ही समाजजनों में उत्साह नजर आया। करीब 20 से 22 फीट ऊंची सजी-धजी छड़ियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। छड़ी निशानों के साथ समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। जगह-जगह लोगों ने छड़ियों के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रसाद चढ़ाया। गांधी नगर से शुरू हुआ चल समारोह छड़ी यात्रा की शुरुआत गांधी नगर से शाम करीब 6 बजे हुई। इसके बाद छड़ियां मोटर रोड, ईश्वरपुरा, बदनाम, तीन पुलिया और स्टेशन रोड सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ीं। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों और श्रद्धालुओं ने छड़ियों का स्वागत किया। चल समारोह के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा। छड़ियों के साथ बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु शामिल हुए। 15 स्थानों के निशान हुए शामिल इस बार चल समारोह में गांधी नगर सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकले 15 छड़ी निशान शामिल हुए हैं। इनमें कुछ छड़ियां 20 से 22 फीट तक ऊंची हैं। आयोजन समिति द्वारा छड़ियों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है। छड़ी निशानों के नगर भ्रमण को गोगादेव महाराज की आराधना और समाज की पुरानी परंपरा के रूप में देखा जाता है। गोगादेव की छड़ियों का नगर भ्रमण और पूजन गोगा नवमी से जुड़ी प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। विभिन्न शहरों में भी गोगादेव के निशानों का नगर भ्रमण कराया जाता है। श्री गोगादेव चौहान मंदिर में होगा पूजन नगर भ्रमण के बाद छड़ी निशान श्री गोगादेव चौहान मंदिर पहुंची। यहां छड़ियों का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके साथ ही गोगादेव महाराज के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान हुए। पूजन के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया। 128 साल से चली आ रही परंपरा वाल्मीकि समाज के लिए गोगादेव महाराज की छड़ी यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा भी है। समाज के बुजुर्गों के अनुसार खंडवा में यह परंपरा करीब 128 वर्षों से चली आ रही है। समय के साथ आयोजन का स्वरूप बदला, लेकिन छड़ी निकालने और नगर भ्रमण कराने की परंपरा आज भी कायम है।

