कैनरा बैंक की धनीपुर शाखा से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 35.80 लाख रुपए का लोन लेने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक में बंधक रखे गए बैनामे में मूल दस्तावेज के एक शब्द के आगे दूसरा स्थान जोड़कर उसे कूटरचित किया गया। खाता NPA होने के बाद बैंक ने दस्तावेज की जांच की तो कथित फर्जीवाड़ा सामने आया। बैंक प्रबंधन की शिकायत पर पहले पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई। कार्रवाई नहीं होने पर बैंक ने कोर्ट का रुख किया। ACJM कोर्ट नंबर-1 के आदेश पर गांधी पार्क पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को महिला और उसके साथी के खिलाफ FIR दर्ज की है। तीन चरणों में लिया लोन बैंक के मुख्य प्रबंधक आलोक कुमार के मुताबिक, आरोपी आशा रानी अग्रवाल पत्नी गोपाल प्रसाद अग्रवाल और सह-खातेदार भगवान स्वरूप अग्रवाल, निवासी सब्जी मंडी, सासनी गेट, अलीगढ़ के खिलाफ शिकायत की गई है। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार अलग-अलग समय में 16 सितंबर 2020: 16 लाख रुपए का मॉर्गेज लोन लिया गया। 7 जनवरी 2021: 17 लाख रुपए की OCC लिमिट लोन लिया गया। 18 नवंबर 2021: GECL योजना के तहत 2.80 लाख रुपए लोन लिया गया। इस तरह कुल लोन: 35.80 लाख रुपए लोन लिया गया। NPA हुआ खाता, तब खुली दस्तावेज की हेराफेरी लोन की किश्तों का भुगतान नहीं होने पर बैंक ने 14 फरवरी 2025 को खाते को NPA घोषित कर दिया। इसके बाद बैंक ने SARFAESI एक्ट के तहत बंधक संपत्ति पर कार्रवाई शुरू की। इसी दौरान बैंक ने बंधक रखे मूल बैनामे की जांच कराई। आरोप है कि बैनामे में जहां ‘पडियावली’ लिखा था, उसके आगे फर्जी तरीके से ‘जयगंज’ शब्द जोड़ दिया गया था। बैंक का आरोप है कि इसी कूटरचित दस्तावेज को बंधक रखकर लोन हासिल किया गया। संपत्ति नीलाम की, फिर भी 12.92 लाख बाकी बैंक ने SARFAESI कार्रवाई के तहत 30 अगस्त 2025 को संपत्ति की ई-नीलामी की। इससे बैंक को 22.88 लाख रुपए की रिकवरी हुई। इसके बावजूद बैंक का 12.92 लाख रुपए बकाया रह गया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग तेज की। बैंक प्रबंधन ने पहले SSP को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर ACJM कोर्ट नंबर-1 में प्रार्थना पत्र दिया गया। कोर्ट के आदेश पर गांधी पार्क पुलिस ने FIR दर्ज की। सीओ द्वितीय धनंजय के अनुसार अब पुलिस दस्तावेज, लोन प्रक्रिया और कथित फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

