छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े बिजली उत्पादक एनटीपीसी कोरबा संयंत्र में एक ब्रेकडाउन हो गया है। पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (PGCIL) द्वारा बे-ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान आई इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण एनटीपीसी कोरबा की सभी सातों इकाइयां एक साथ बंद हो गईं। गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात हुई इस घटना के 36 घंटे बाद भी शनिवार सुबह तक सभी इकाइयों को चालू नहीं किया जा सका है। इस ब्रेकडाउन के कारण एनटीपीसी कोरबा का 2600 मेगावाट बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। एनटीपीसी कोरबा की कुल क्षमता 2600 मेगावाट है, जिसमें 200 मेगावाट की तीन और 500 मेगावाट की चार इकाइयां शामिल हैं। सभी सातों इकाइयों के एक साथ बंद होने से संयंत्र में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई। ब्रेकर टेस्टिंग के दौरान इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जानकारी के मुताबिक, PGCIL की टीम PGCIL बे में ब्रेकर की जांच और टेस्टिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक इलेक्ट्रिकल फाल्ट हुआ, जिसका असर सीधे एनटीपीसी की सभी यूनिटों पर पड़ा। फाल्ट इतना बड़ा था कि सभी यूनिटें एक के बाद एक बंद होती चली गईं। बताया गया कि फाल्ट के बाद पूरे प्लांट में अंधेरा छा गया और सहायक व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुईं। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में असर इस घटना का असर छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्यों की बिजली सप्लाई पर भी पड़ा है। एनटीपीसी कोरबा से छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा सहित कई राज्यों को बिजली सप्लाई की जाती है। उत्पादन ठप होने से ग्रिड पर भी दबाव बढ़ गया है। जमनीपाली टाउनशिप में बिजली गुल जमनीपाली स्थित एनटीपीसी टाउनशिप में भी डेढ़ घंटे तक बिजली गुल रही। बाद में डीजी सेट और वैकल्पिक व्यवस्था से टाउनशिप की सप्लाई बहाल की गई। देर रात तक स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से टाउनशिप में अंधेरा पसरा रहा। शनिवार सुबह तक भी यूनिटें शुरू नहीं हो सकी थीं। इस संबंध में शनिवार सुबह एनटीपीसी कोरबा की जनसंपर्क अधिकारी उषा घोष से बात की गई। उन्होंने बताया कि संयंत्र की बंद इकाइयों को सुधारने का काम तेजी से जारी है। तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है। इकाइयों को एक-एक करके सिंक्रोनाइज किया जाएगा। इस बारे में शाम तक आधिकारिक जानकारी दी जाएगी।

