‘दिमागी नक्सल के पास न गन है, न धन’, शेखर सुमन के बयान ने छेड़ी बहस, यूजर्स बोले- सबको सत्ता जाने का डर है

‘दिमागी नक्सल के पास न गन है, न धन’, शेखर सुमन के बयान ने छेड़ी बहस, यूजर्स बोले- सबको सत्ता जाने का डर है

Shekhar Suman Statement: एक्टर और होस्ट शेखर सुमन अपने शो ‘शेखर टुनाइट‘ में बेबाक अंदाज में अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। अब उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। शेखर सुमन ने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति के पास सिर्फ विचार और सवाल हैं, तो उनसे डरने की जरूरत क्यों है। उन्होंने कहा कि ऐसे विचारों और सवालों को दबाने के बजाय उनका जवाब सत्य, तथ्य और तर्क के आधार पर दिया जाना चाहिए।

‘दिमागी नक्सल से लोग इतना डरते क्यों हैं?’

शेखर सुमन ने ये भी कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ के पास न तो बंदूक है और न ही धन, बल्कि उसके पास सिर्फ एक वैचारिक मन है। उन्होंने सवाल किया कि उन विचारों और सवालों को तर्क के साथ जवाब देने के बजाय दबाने या कुचलने की कोशिश क्यों की जाती है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर लोग विचारों और सवालों से डर रहे हैं तो हो सकता है कि वे कुछ छिपा रहे हों। शेखर सुमन ने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि कहीं सवाल पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र में मौजूद ‘दीमक’ को उजागर तो नहीं कर रहा।

गांधी और तिलक का उदाहरण दिया

शेखर सुमन ने अपने बयान में महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से उतारे जाने के बाद भेदभाव पर सवाल नहीं उठाया होता या लोकमान्य तिलक ने अंग्रेजों के खिलाफ स्वराज का सवाल नहीं उठाया होता तो क्या होता। उन्होंने कहा कि हर अच्छे बदलाव, तरक्की, नई खोज और नई सोच की शुरुआत किसी न किसी सवाल से हुई है।

‘पूछिए, जवाब मांगिए और बोलिए- हम सब दिमागी नक्सल हैं’

शेखर सुमन ने कहा कि दिमाग में उठने वाले सवालों को खत्म नहीं होने देना चाहिए। उनके मुताबिक, जब इंसान सवाल पूछता है तो वह किसी न किसी सवाल से आजादी की ओर बढ़ता है। उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा, ‘पूछिए, जवाब मांगिए और बोलिए- हां, हम सब दिमागी नक्सल हैं।’

बयान पर सोशल मीडिया पर क्या बोले यूजर्स?

शेखर सुमन के बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक यूजर ने उन्हें आगाह करते हुए लिखा कि उन्हें इस तरह खुलेआम किसी की पोल नहीं खोलनी चाहिए, वरना उन पर भी गलत आरोप लगाकर कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, एक यूजर ने शेखर सुमन की इस बात को गलत दिशा में बताया है। तो दूसरे यूजर ने उनके बयान का समर्थन करते हुए लिखा, ‘हां, सवाल पूछिए, जवाब मांगिए और गर्व से बोलिए- हां, हम दिमागी नक्सल हैं।’ एक अन्य यूजर ने लिखा कि ‘सबको सत्ता जाने का डर है, लेकिन बदलाव आएगा तो सारे स्कैम बाहर आ जाएंगे।’ इस तरह शेखर सुमन के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

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