- चीन से बैटरी आयात, महंगे लिथियम-लेड और डॉलर की चाल ने बढ़ाई कीमत : एक लाख का ई-स्कूटर अब 1.20 से 1.25 लाख में, 3 किलोवॉट लिथियम बैटरी 30 से बढक़र 35 हजार रुपए
ग्वालियर. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्च से राहत और पर्यावरण संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (इवी) को जेब के लिहाज से सस्ता विकल्प मानने वाले उपभोक्ताओं का बजट अब बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में मॉडल और बैटरी क्षमता के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर दिखाई दे रहा है। करीब एक लाख रुपए में मिलने वाला इ-स्कूटर अब 1.20 से 1.25 लाख रुपए तक पहुंच गया है। इवी की बढ़ती कीमतों के पीछे सबसे बड़ा कारण बैटरी की लागत में इजाफा है। बाजार कारोबारियों के मुताबिक देश की करीब 90 फीसदी इवी कंपनियां बैटरी और उसके प्रमुख कंपोनेंट के लिए चीन पर निर्भर हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, शिपिंग खर्च और आपूर्ति शृंखला पर दबाव सीधे वाहनों की कीमत को प्रभावित करता है।
पेट्रोल से राहत की चाह, लेकिन बढ़ा बजट
पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते खर्च और कम रनिंग कॉस्ट के कारण इलेक्ट्रिक दोपहिया की मांग तेजी से बढ़ रही है। ग्वालियर में हर महीने 1500 से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया बिक रहे हैं। कई बड़े ब्रांड के लोकप्रिय मॉडलों के लिए ग्राहकों को 20 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इवी कारोबारी हरिओम नागपाल के मुताबिक पिछले चार महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग करीब 30 फीसदी बढ़ी है। कंपनियां मांग के अनुपात में उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। यही वजह है कि डीलरों के पास स्टॉक पहुंचते ही बुकिंग के आधार पर वाहनों की डिलीवरी की जा रही है। इवी कारोबारी उमेश उप्पल बताते हैं कि इलेक्ट्रिक दोपहिया का चलन 2016-18 के दौरान शुरू हुआ था, लेकिन 2020 के बाद बाजार ने तेजी पकड़ी। पिछले दो वर्षों में ग्राहकों का रुझान और बढ़ा है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के असर से कच्चे माल, परिवहन और आपूर्ति शृंखला की लागत बढ़ी है, जिसका प्रभाव इवी की कीमतों पर पड़ा है।
बैटरी महंगी तो इवी महंगी
इवी की कुल लागत में बैटरी की बड़ी हिस्सेदारी होती है। करीब दो साल पहले 3 किलोवॉट की लिथियम बैटरी 30 हजार रुपए में मिल जाती थी, जिसकी कीमत अब करीब 35 हजार रुपए हो गई है। यानी केवल बैटरी पर पांच हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह 32 एएच की लेड बैटरी 12 हजार से बढक़र करीब 16 हजार रुपए तक पहुंच गई है। लिथियम और लेड की कीमतों के साथ बैटरी सेल और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) की लागत भी बढ़ी है। चीन पर निर्भरता, आयात लागत, डॉलर और शिपिंग खर्च बढऩे से कंपोनेंट महंगे हुए हैं। बैटरी इवी की लागत का बड़ा हिस्सा होने के कारण इसमें मामूली वृद्धि भी वाहन की अंतिम कीमत बढ़ा देती है।
मांग ने पकड़ी रफ्तार
- ग्वालियर में हर महीने 1500 से ज्यादा इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री।
- कई बड़े ब्रांड के मॉडलों पर 20 से 30 दिन की वेटिंग।
- पिछले चार महीनों में मांग करीब 30 फीसदी बढ़ी।
- स्टॉक आते ही बुकिंग के आधार पर डिलीवरी।
- 2020 के बाद इवी बाजार में तेज हुई वृद्धि।
- उत्पादन की तुलना में मांग अधिक होने से लोकप्रिय मॉडल तत्काल उपलब्ध नहीं।

