बिहार शरीफ सदर अस्पताल में फेफड़े और सांस संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा की शुरुआत की गई है। स्वास्थ्य विभाग के गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम यानी एनसीडी के अंतर्गत अस्पताल में आधुनिक कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर मशीन स्थापित की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अस्पताल में ही पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क मिलने लगी है, जिससे प्रतिदिन अस्पताल पहुंचने वाले फेफड़े के दर्जनों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में सदर अस्पताल के ओपीडी में हर दिन 30 से 40 मरीज सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े से जुड़े रोगों का इलाज कराने पहुंच रहे हैं, जिनकी वास्तविक स्थिति का आकलन अब इस मशीन से तुरंत हो सकेगा। विशेष स्क्रीनिंग अभियान के तहत उपलब्ध कराई गई स्पाइरोमीटर मशीन सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के विशेष स्क्रीनिंग अभियान के तहत यह कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर मशीन यहां उपलब्ध कराई गई है। यह उपकरण फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की शक्ति की वैज्ञानिक जांच करता है, जिससे साफ पता चल जाता है कि मरीज का फेफड़ा कितने प्रतिशत काम कर रहा है। यह जांच खास तौर पर उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो लंबे समय से बीड़ी या सिगरेट पीने के आदी हैं, अथवा जो क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी की गिरफ्त में हैं। उपाधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जब तक फेफड़ों की कार्यक्षमता का सटीक प्रतिशत सामने नहीं आता, तब तक दवाइयों की सही खुराक तय करना मुश्किल होता है। अब इस जांच के आधार पर मरीजों का ऐसा लंबा और सटीक उपचार शुरू किया जा सकेगा जिससे उन्हें बीमारी से स्थायी राहत मिल सके। उपलब्धता और आर्थिक दृष्टि से यह सुविधा जिले के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटर में टेस्ट कराने पर देने पड़ते हैं डेढ़ हजार डॉ. राजीव रंजन के अनुसार आमतौर पर स्पाइरोमीटर जैसी उन्नत तकनीक केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों में ही उपलब्ध होती है और सामान्य जिला अस्पतालों में इसका मिलना दुर्लभ है। यदि कोई मरीज निजी पैथोलॉजी केंद्रों में यह टेस्ट कराता है, तो उसे एक से डेढ़ हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि कई निजी जांच केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं होती। सदर अस्पताल में यह जांच पूरी तरह मुफ्त होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी और उन्हें पटना या अन्य बड़े शहरों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलेगी। अस्पताल में मुंह के कैंसर सहित अन्य प्रकार के कैंसर की जांच स्वास्थ्य विभाग की यह पहल केवल फेफड़ों की जांच तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एनसीडी सेल के तहत गैर-संचारी रोगों की व्यापक रोकथाम के लिए कई स्तरों पर स्क्रीनिंग चलाई जा रही है। अस्पताल में आने वाले मरीजों का उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थायरॉयड और मुंह के कैंसर सहित अन्य प्रकार के कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए भी परीक्षण किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने सांस फूलने, लगातार खांसी या फेफड़ों की किसी भी परेशानी से पीड़ित लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अस्पताल पहुंचकर इस नई मशीन से अपनी जांच कराएं और निशुल्क उपचार का लाभ उठाएं। बिहार शरीफ सदर अस्पताल में फेफड़े और सांस संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा की शुरुआत की गई है। स्वास्थ्य विभाग के गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम यानी एनसीडी के अंतर्गत अस्पताल में आधुनिक कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर मशीन स्थापित की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अस्पताल में ही पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क मिलने लगी है, जिससे प्रतिदिन अस्पताल पहुंचने वाले फेफड़े के दर्जनों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में सदर अस्पताल के ओपीडी में हर दिन 30 से 40 मरीज सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े से जुड़े रोगों का इलाज कराने पहुंच रहे हैं, जिनकी वास्तविक स्थिति का आकलन अब इस मशीन से तुरंत हो सकेगा। विशेष स्क्रीनिंग अभियान के तहत उपलब्ध कराई गई स्पाइरोमीटर मशीन सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के विशेष स्क्रीनिंग अभियान के तहत यह कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर मशीन यहां उपलब्ध कराई गई है। यह उपकरण फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की शक्ति की वैज्ञानिक जांच करता है, जिससे साफ पता चल जाता है कि मरीज का फेफड़ा कितने प्रतिशत काम कर रहा है। यह जांच खास तौर पर उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो लंबे समय से बीड़ी या सिगरेट पीने के आदी हैं, अथवा जो क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी की गिरफ्त में हैं। उपाधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जब तक फेफड़ों की कार्यक्षमता का सटीक प्रतिशत सामने नहीं आता, तब तक दवाइयों की सही खुराक तय करना मुश्किल होता है। अब इस जांच के आधार पर मरीजों का ऐसा लंबा और सटीक उपचार शुरू किया जा सकेगा जिससे उन्हें बीमारी से स्थायी राहत मिल सके। उपलब्धता और आर्थिक दृष्टि से यह सुविधा जिले के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटर में टेस्ट कराने पर देने पड़ते हैं डेढ़ हजार डॉ. राजीव रंजन के अनुसार आमतौर पर स्पाइरोमीटर जैसी उन्नत तकनीक केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों में ही उपलब्ध होती है और सामान्य जिला अस्पतालों में इसका मिलना दुर्लभ है। यदि कोई मरीज निजी पैथोलॉजी केंद्रों में यह टेस्ट कराता है, तो उसे एक से डेढ़ हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि कई निजी जांच केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं होती। सदर अस्पताल में यह जांच पूरी तरह मुफ्त होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी और उन्हें पटना या अन्य बड़े शहरों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलेगी। अस्पताल में मुंह के कैंसर सहित अन्य प्रकार के कैंसर की जांच स्वास्थ्य विभाग की यह पहल केवल फेफड़ों की जांच तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एनसीडी सेल के तहत गैर-संचारी रोगों की व्यापक रोकथाम के लिए कई स्तरों पर स्क्रीनिंग चलाई जा रही है। अस्पताल में आने वाले मरीजों का उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थायरॉयड और मुंह के कैंसर सहित अन्य प्रकार के कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए भी परीक्षण किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने सांस फूलने, लगातार खांसी या फेफड़ों की किसी भी परेशानी से पीड़ित लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अस्पताल पहुंचकर इस नई मशीन से अपनी जांच कराएं और निशुल्क उपचार का लाभ उठाएं।

