ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी पर भगवान राधा-कृष्ण का सिंधिया रियासत के बेशकीमती आभूषणों से श्रृंगार किया गया। इन आभूषणों में हीरे, पन्ने, माणिक, पुखराज और नीलम जैसे रत्न जड़े हैं, जिन्हें साल के बाकी दिनों में बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जन्माष्टमी पर इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच लॉकर से निकाला जाता है। शुक्रवार को विशेष समिति की निगरानी में आभूषण बैंक से निकालकर गोपाल मंदिर लाए गए और भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लग गई। 35 करोड़ का सात लड़ियों वाला हार भगवान के श्रृंगार में सात लड़ियों वाला हार सबसे खास है। इसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हैं। इस एंटीक हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए बताई जाती है। इसके अलावा पन्ने और हीरे से जड़ा मुकुट, सोने की बांसुरी, सोने की नथ, जंजीर और अन्य आभूषण भी भगवान को पहनाए गए। इन आभूषणों में सोना, हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज और नीलम जैसे रत्नों का इस्तेमाल किया गया है। आजादी के बाद लॉकर में रखे गए आजादी से पहले तक ये जेवर भगवान राधा-कृष्ण को पहनाए जाते थे। आजादी के बाद सुरक्षा कारणों से इन्हें बैंक लॉकर में सुरक्षित रखवा दिया गया। साल 2007 में ये आभूषण नगर निगम की देखरेख में आए। इसके बाद से हर जन्माष्टमी पर विशेष समिति की निगरानी में इन्हें बैंक लॉकर से निकालकर मंदिर लाया जाता है। नगर निगम को इन आभूषणों को बैंक से निकलवाने और सुरक्षित रखने का अधिकार है। श्रृंगार के बाद इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच वापस बैंक लॉकर में रख दिया जाता है। 1921 में माधवराव सिंधिया ने बनवाया था मंदिर फूलबाग चौराहे के पास स्थित गोपाल मंदिर का निर्माण वर्ष 1921 में तत्कालीन ग्वालियर रियासत के शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने कराया था। भगवान की पूजा के लिए उन्होंने चांदी के बर्तन और पहनाने के लिए रत्न जड़ित सोने के आभूषण तैयार करवाए थे। इनमें राधा-कृष्ण के लिए तैयार किए गए 55 पन्नों से जड़ा विशेष हार, सात लड़ियों वाला हार, सोने की बांसुरी, सोने की नथ और जंजीर शामिल हैं। चांदी के पूजा के बर्तन भी मंदिर में रखे गए हैं। हर साल जन्माष्टमी पर इन्हीं आभूषणों से भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस स्वरूप के दर्शन के लिए ग्वालियर के अलावा आसपास के क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। जन्माष्टमी की रात भगवान के जन्म के समय तक मंदिर में भक्तों की भीड़ बनी रहती है। 100 से ज्यादा जवान तैनात, मेटल डिटेक्टर से जांच करोड़ों रुपए के आभूषणों को देखते हुए गोपाल मंदिर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में 100 से अधिक जवान तैनात हैं और सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। प्रवेश द्वार पर ASP और CSP स्तर के अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मेटल डिटेक्टर से जांच की जा रही है और पूरे परिसर पर CCTV कैमरों से नजर रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में आभूषण बैंक लॉकर से मंदिर तक लाए जाते हैं। श्रृंगार के बाद इन्हें वापस बैंक लॉकर में सुरक्षित रख दिया जाता है।

