कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर डिप्टी स्टेशन मैनेजर (डीएसएस) नरेंद्र सिंह चाहर के साथ 12 जुलाई को घसीट-घसीटकर पिटाई में रेलवे सुरक्षा बल के दो सब इंस्पेक्टर समेत चार दोषी पाए गए हैं। जांच समिति की रिपोर्ट कार्रवाई के लिए मुख्यालय भेज दी गई है। अमृतसर से विशाखापत्तनम जा रही हीराकुंड एक्सप्रेस 12 जुलाई की सुबह 10.50 बजे कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर रुकी थी। पेठा खरीदने और पैर में चोट के कारण एक महिला यात्री एसी कोच में नहीं चढ़ सकी। कोलकाता जा रही महिला यात्री को मुश्किल में देख डीएसएम नरेंद्र सिंह चाहर ने गार्ड से बात की। गार्ड और डीएसएम के इशारे पर ट्रेन को रोका गया। आरपीएफ की टीम ने महिला यात्री को दोषी मानते हुए एक हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। इसको लेकर विवाद में आरपीएफ की टीम ने डीएसएम की पिटाई की गई और प्लेटफार्म पर घसीटते हुए थाने तक ले गए। पूरी घटना सीसीटीवी में रिकार्ड हुई। मामला तूल पकड़ने पर एसआइ मेघराज मीणा और बाल किशन, कांस्टेबल जितेंद्र और बदन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद उन्हें निलंबित करते स्थानांतरण कर दिया गया था। इसके बाद वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक कुलदीप मीना की निगरानी में गठित तीन सदस्यीय समिति ने 32 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। इसमें महिला यात्री भी शामिल रही। 35 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। रिपोर्ट में समिति ने टिप्पणी की है कि आरपीएफ कर्मियों ने अपने पद और गरिमा का ध्यान नहीं रखा। अपने दायरे से बाहर जाते हुए डीएसएम की पिटाई की। समिति के एक अधिकारी ने बताया कि आरपीएफ कर्मियों को जांच में दोषी पाया गया है। विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

