ग्रामीणों ने 70 हजार खर्च कर खुद बनाया चचरी पुल:जमुई के लोगो की बारिश में 5 किलोमीटर घूमने की मजबूरी खत्म, जतहर नदी पर आवागमन आसान

ग्रामीणों ने 70 हजार खर्च कर खुद बनाया चचरी पुल:जमुई के लोगो की बारिश में 5 किलोमीटर घूमने की मजबूरी खत्म, जतहर नदी पर आवागमन आसान

जमुई में प्रशासन की मदद का इंतजार किए बिना ग्रामीणों ने खुद पहल की और करीब 20 दिनों में जतहर नदी पर एक चचरी पुल बना दिया। दिन-रात की मेहनत से तैयार हुए इस पुल पर अब आवागमन शुरू हो गया है। पुल बनने के बाद जतहर इलाके के ग्रामीणों को काफी राहत मिली है। खासकर बारिश के दिनों में नदी पार करने की परेशानी से लोगों को काफी हद तक छुटकारा मिलेगा। ग्रामीणों के अनुसार, इस चचरी पुल को बनाने में करीब 70 हजार रुपए खर्च हुए हैं। इसमें मजदूरी का खर्च शामिल नहीं है, क्योंकि पुल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों ने खुद मेहनत की। ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से जतहर नदी पर सुरक्षित रास्ते की मांग कर रहे थे, लेकिन समस्या हल नहीं होने पर उन्होंने खुद ही चचरी पुल बनाने का फैसला लिया। जतहर नदी को पार में थी दिक्कत चचरी पुल बनने से पहले बारिश के दिनों में जतहर नदी को पार करना ग्रामीणों के लिए बड़ी दिक्कत थी। नदी में पानी बढ़ने पर लोगों को कमर से ऊपर तक पानी में उतरकर नदी पार करनी पड़ती थी। स्कूली बच्चों को भी परिजन गोद और कंधे पर उठाकर नदी पार कराते थे। कई बार पानी ज्यादा होने पर आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता था। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को करीब पांच किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर दूसरे स्थान तक पहुंचना पड़ता था। इस परेशानी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, किसानों और ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता था। बाजार जाने, स्कूल पहुंचने और जरूरी काम के लिए ग्रामीणों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी। खेतों तक पहुंचने में किसानों को होगी आसानी अब चचरी पुल तैयार होने के बाद इन समस्याओं से तुरंत राहत मिली है। पुल से आसपास के गांवों के बीच आपस में जुड़ना भी आसान हुआ है। पैदल आने-जाने वाले लोगों को इसका सबसे अधिक फायदा मिल रहा है। किसानों को खेतों तक पहुंचने में आसानी होगी, वहीं बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत कम होगी। ग्रामीणों ने कहा कि चचरी पुल भले ही स्थायी पुल का विकल्प नहीं है, लेकिन वर्तमान समय में यह उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 20 दिनों की मेहनत और सामूहिक प्रयास से तैयार हुए इस पुल के बाद ग्रामीणों में खुशी है। अब लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में जतहर इलाके की अन्य मूलभूत समस्याओं का भी समाधान होगा। जमुई में प्रशासन की मदद का इंतजार किए बिना ग्रामीणों ने खुद पहल की और करीब 20 दिनों में जतहर नदी पर एक चचरी पुल बना दिया। दिन-रात की मेहनत से तैयार हुए इस पुल पर अब आवागमन शुरू हो गया है। पुल बनने के बाद जतहर इलाके के ग्रामीणों को काफी राहत मिली है। खासकर बारिश के दिनों में नदी पार करने की परेशानी से लोगों को काफी हद तक छुटकारा मिलेगा। ग्रामीणों के अनुसार, इस चचरी पुल को बनाने में करीब 70 हजार रुपए खर्च हुए हैं। इसमें मजदूरी का खर्च शामिल नहीं है, क्योंकि पुल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों ने खुद मेहनत की। ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से जतहर नदी पर सुरक्षित रास्ते की मांग कर रहे थे, लेकिन समस्या हल नहीं होने पर उन्होंने खुद ही चचरी पुल बनाने का फैसला लिया। जतहर नदी को पार में थी दिक्कत चचरी पुल बनने से पहले बारिश के दिनों में जतहर नदी को पार करना ग्रामीणों के लिए बड़ी दिक्कत थी। नदी में पानी बढ़ने पर लोगों को कमर से ऊपर तक पानी में उतरकर नदी पार करनी पड़ती थी। स्कूली बच्चों को भी परिजन गोद और कंधे पर उठाकर नदी पार कराते थे। कई बार पानी ज्यादा होने पर आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता था। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को करीब पांच किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर दूसरे स्थान तक पहुंचना पड़ता था। इस परेशानी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, किसानों और ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता था। बाजार जाने, स्कूल पहुंचने और जरूरी काम के लिए ग्रामीणों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी। खेतों तक पहुंचने में किसानों को होगी आसानी अब चचरी पुल तैयार होने के बाद इन समस्याओं से तुरंत राहत मिली है। पुल से आसपास के गांवों के बीच आपस में जुड़ना भी आसान हुआ है। पैदल आने-जाने वाले लोगों को इसका सबसे अधिक फायदा मिल रहा है। किसानों को खेतों तक पहुंचने में आसानी होगी, वहीं बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत कम होगी। ग्रामीणों ने कहा कि चचरी पुल भले ही स्थायी पुल का विकल्प नहीं है, लेकिन वर्तमान समय में यह उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 20 दिनों की मेहनत और सामूहिक प्रयास से तैयार हुए इस पुल के बाद ग्रामीणों में खुशी है। अब लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में जतहर इलाके की अन्य मूलभूत समस्याओं का भी समाधान होगा।  

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