मुंगेर के नौवागढ़ी और रामपुर मौजा में गुरुवार को फिर तनाव हो गया। यहां फोरलेन से सटी किसानों की जमीन पर हाईटेंशन बिजली के तार बिछाने का काम शुरू किया गया। जिला प्रशासन के अधिकारी बड़ी संख्या में महिला और पुलिस बल के साथ गढ़ीरामपुर पहुंचे थे। किसानों के विरोध के बावजूद उन जमीनों पर पेड़ हटाकर हाईटेंशन तार खींचने का काम शुरू कराया गया, जिनका मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद किसानों ने नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि वे विकास के लिए पहले ही अपनी जमीन सरकार को दे चुके हैं। अब बची हुई जमीन के बीच से हाईटेंशन टावर और तार ले जाने से उनकी बाकी जमीन पर भी असर पड़ रहा है। तार को किनारे से ले जाने की अपील किसानों ने बताया कि गढ़ीरामपुर में हुए सहयोग शिविर में उन्होंने प्रशासन से मांग की थी कि टावर और तार को जमीन के बीच से ले जाने के बजाय किनारे से ले जाया जाए। लेकिन उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। किसानों का दावा है कि जिलाधिकारी निखिल धनराज ने भी एनएचएआई के अधिकारियों को दो टावर पश्चिम दिशा में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। किसानों का आरोप है कि इसके बावजूद एनएचएआई अपने पुराने तय रास्ते पर ही काम कर रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक निर्देश के बाद भी जमीन के बीच से ही टावर और तार ले जाने का काम जारी है।
जमीन ही किसानों का है सहारा किसान शैलेश चौधरी ने कहा कि किसान विकास के लिए पहले ही अपनी जमीन दे चुके हैं। अब बची जमीन के बीच से टावर और तार ले जाने से खेती करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जमीन ही किसान की पूंजी और बच्चों के भविष्य का सहारा है। ऐसे में बची हुई जमीन पर भी असर पड़ने से परिवार के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो जाएगा। राम बहादुर चौधरी ने कहा कि विरोध के बावजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में काम शुरू कराया जाना किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है। वहीं विपिन सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में किसान अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं। आपत्ति के बावजूद जबरन काम कराया जाना उचित नहीं है। किसानों ने मांग की कि टावर और हाईटेंशन तार को जमीन के बीच से हटाकर किनारे से ले जाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पर सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि मौके पर मौजूद कई अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन सभी अधिकारी बयान देने से परहेज करते रहे। मुंगेर के नौवागढ़ी और रामपुर मौजा में गुरुवार को फिर तनाव हो गया। यहां फोरलेन से सटी किसानों की जमीन पर हाईटेंशन बिजली के तार बिछाने का काम शुरू किया गया। जिला प्रशासन के अधिकारी बड़ी संख्या में महिला और पुलिस बल के साथ गढ़ीरामपुर पहुंचे थे। किसानों के विरोध के बावजूद उन जमीनों पर पेड़ हटाकर हाईटेंशन तार खींचने का काम शुरू कराया गया, जिनका मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद किसानों ने नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि वे विकास के लिए पहले ही अपनी जमीन सरकार को दे चुके हैं। अब बची हुई जमीन के बीच से हाईटेंशन टावर और तार ले जाने से उनकी बाकी जमीन पर भी असर पड़ रहा है। तार को किनारे से ले जाने की अपील किसानों ने बताया कि गढ़ीरामपुर में हुए सहयोग शिविर में उन्होंने प्रशासन से मांग की थी कि टावर और तार को जमीन के बीच से ले जाने के बजाय किनारे से ले जाया जाए। लेकिन उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। किसानों का दावा है कि जिलाधिकारी निखिल धनराज ने भी एनएचएआई के अधिकारियों को दो टावर पश्चिम दिशा में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। किसानों का आरोप है कि इसके बावजूद एनएचएआई अपने पुराने तय रास्ते पर ही काम कर रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक निर्देश के बाद भी जमीन के बीच से ही टावर और तार ले जाने का काम जारी है।
जमीन ही किसानों का है सहारा किसान शैलेश चौधरी ने कहा कि किसान विकास के लिए पहले ही अपनी जमीन दे चुके हैं। अब बची जमीन के बीच से टावर और तार ले जाने से खेती करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जमीन ही किसान की पूंजी और बच्चों के भविष्य का सहारा है। ऐसे में बची हुई जमीन पर भी असर पड़ने से परिवार के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो जाएगा। राम बहादुर चौधरी ने कहा कि विरोध के बावजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में काम शुरू कराया जाना किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है। वहीं विपिन सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में किसान अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं। आपत्ति के बावजूद जबरन काम कराया जाना उचित नहीं है। किसानों ने मांग की कि टावर और हाईटेंशन तार को जमीन के बीच से हटाकर किनारे से ले जाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पर सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि मौके पर मौजूद कई अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन सभी अधिकारी बयान देने से परहेज करते रहे।

