गोरखपुर छावनी-उनौला के बीच दोहरीकरण पूरा:ट्रैक से पुल और सिग्नल तक हुई गहन जांच

गोरखपुर छावनी-उनौला के बीच दोहरीकरण पूरा:ट्रैक से पुल और सिग्नल तक हुई गहन जांच

रेल यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों के बेहतर संचालन के लिए गोरखपुर छावनी-पनियहवा रेलखंड के दोहरीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में गोरखपुर छावनी से उनौला स्टेशन के बीच 7.64 किलोमीटर रेलखंड का दोहरीकरण कार्य पूरा हो गया है। काम पूरा होने के बाद गुरुवार को रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्व सर्किल ई. श्रीनिवास ने गोरखपुर छावनी-उनौला रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रेलवे के निर्माण और परिचालन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। रेल संरक्षा आयुक्त ने अलग-अलग स्थानों पर ट्रैक, सिग्नल, पुल, समपार फाटक, ओवरहेड बिजली लाइन और अन्य संरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की। गोरखपुर छावनी स्टेशन से शुरू हुआ निरीक्षण रेल संरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण की शुरुआत गोरखपुर छावनी स्टेशन से की। यहां उन्होंने यार्ड रीमॉडलिंग के चल रहे कार्यों को देखा। इसके अलावा वी.डी.यू. पैनल, रिले रूम और उनौला छोर पर संरक्षा उपकरणों में किए गए बदलावों की जानकारी अधिकारियों से ली। उन्होंने स्टेशन पर प्वाइंट संख्या 221-ए का भी बारीकी से निरीक्षण किया। नई विद्युतीकृत लाइन में लगाए गए विभिन्न फिटिंग्स की मानक स्थिति की जांच की गई। इसके साथ ही गोरखपुर छावनी स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई और ट्रैक के केंद्र से प्लेटफॉर्म की दूरी भी मापी गई। मोटर ट्रॉली से रेलखंड का किया निरीक्षण स्टेशन के निरीक्षण के बाद रेल संरक्षा आयुक्त मोटर ट्रॉली से गोरखपुर छावनी-उनौला के बीच रेलखंड का निरीक्षण करने निकले। रास्ते में उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर रुककर संरक्षा व्यवस्था को परखा। किलोमीटर 390/13 पर स्थित स्विच एक्सटेंशन ज्वाइंट संख्या 48 का निरीक्षण किया गया। इसके बाद किलोमीटर 387/30 पर समपार फाटक संख्या 2-सी का निरीक्षण किया गया। यहां दोहरीकरण के बाद किए गए बदलावों को देखा गया और गेटमैन से संरक्षा संबंधी जानकारी लेकर उसका ज्ञान भी परखा गया। पुल और समपार फाटकों की भी जांच निरीक्षण के दौरान कर्व संख्या 11-सी पर इंडेंट का मापन किया गया। इसके साथ ही ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम की स्थिति और उसके मानकों की जांच की गई। किलोमीटर 386/23 पर स्थित पुल संख्या 02 का भी निरीक्षण किया गया। पुल की फिटिंग्स और फाउंडेशन की जांच के साथ पुल के मुकाबले ट्रैक के केंद्र-विचलन की भी माप की गई। इसके बाद किलोमीटर 385/15 पर स्थित समपार फाटक संख्या 2-एसी का निरीक्षण किया गया। यहां दोहरीकरण के अनुरूप किए गए बदलावों और ट्रैक की निर्धारित सहन-सीमा की जांच की गई। ट्रैक से लेकर बिजली लाइन तक जांच मोटर ट्रॉली से निरीक्षण के दौरान रेल संरक्षा आयुक्त ने पूरे रेलखंड में कई बिंदुओं की जांच की। इसमें रेलपथ, बैलास्ट, ओवरहेड ट्रैक्शन लाइन, सिग्नल पोस्ट और पोल्स की स्थिति शामिल रही। इसके अलावा रास्ते में आने वाले पुलों, पुलियाओं और समपार फाटकों को भी संरक्षा की दृष्टि से देखा गया। अधिकारियों से निर्माण कार्य और संरक्षा मानकों से जुड़ी जानकारी ली गई। अधिकतम निर्धारित गति पर सफल रहा स्पीड ट्रायल निरीक्षण के अंतिम चरण में रेल संरक्षा आयुक्त ने ओएमएस स्पेशल ट्रेन से उनौला से गोरखपुर छावनी रेलखंड के बीच स्पीड ट्रायल किया। यह ट्रायल अधिकतम निर्धारित गति पर किया गया और सफल रहा।

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