नालंदा में मानसून की पहली मार:जिरायन के तटबंध में 25 फीट कटाव; 2,500 बीघे की फसल डूबी, कई गांवों पर बाढ़ का खतरा

नालंदा में मानसून की पहली मार:जिरायन के तटबंध में 25 फीट कटाव; 2,500 बीघे की फसल डूबी, कई गांवों पर बाढ़ का खतरा

नालंदा जिले में मानसून की पहली ही तेज आमद ने प्रशासनिक तैयारियों की कलई खोलकर रख दी है। महज चार दिन पहले तक जिन नदियों के पेट में धूल उड़ रही थी, वे अब उफान पर आकर तबाही मचा रही हैं। अस्थावां प्रखंड के ओंदा गांव के पास जिरायन नदी के तटबंध में करीब 25 फीट का बड़ा कटाव हो गया है। तेज धार के साथ पानी तेजी से रिहायशी और कृषि क्षेत्रों में फैल रहा है। ओंदा, नेरुत, गोमचक, मौलाना बिगहा और भिखनी बिगहा गांव के किसानों की करीब 2,500 बीघे में लहलहाती धान, मक्का और मौसमी सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। पहले सूखे की मार और अब जलप्रलय से अपनी पूंजी डूबती देख किसान बेबस नजर आ रहे हैं।
संसाधनों की कमी से राहत कार्य धीमा, ग्रामीणों में आक्रोश ओंदा में तटबंध टूटने की सूचना पर जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची है, लेकिन पर्याप्त संसाधनों और बोल्डर-बोरियों के अभाव में मरम्मत का काम नाकाफी साबित हो रहा है। तेज बहाव के कारण कटाव का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बहाव को युद्धस्तर पर नहीं रोका गया तो बाढ़ का पानी पास के कई अन्य गांवों को भी अपनी चपेट में ले लेगा। उतरथू में सोयबा नदी का किनारा दरका, मरम्मत जारी इधर, बिंद प्रखंड में भी बाढ़ का खतरा गहरा गया है। उतरथू पंचायत सरकार भवन के पास सोयबा नदी के तेज दबाव के कारण तटबंध कटने लगा है। मुखिया प्रतिनिधि नीतिन कुमार की सूचना पर बीडीओ जफरूद्दीन और कनीय अभियंता अशोक कुमार ने मौके पर पहुंचकर बालू भरी बोरियों और बल्लियों के सहारे मरम्मत कार्य शुरू कराया। बांध पर बढ़ते दबाव से तटवर्ती आबादी दहशत में है। उदेरास्थान से छोड़ा गया 36 हजार क्यूसेक पानी, शहरी क्षेत्र में अलर्ट जहानाबाद स्थित उदेरास्थान बराज से गुरुवार को कुल 36 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद लोकाइन, कड़ुआ और भूतही नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। लगातार बारिश से सकरी, गोइठवा और पंचाने की धार भी तेज हो गई है। बिहारशरीफ के सोहसराय, सलेमपुर, आशानगर, सोहडीह और बबुरबन्ना जैसे निचले मोहल्लों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने सभी संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। पैमार के किसानों के लिए वरदान बना जलस्तर बाढ़ की विभीषिका के बीच पैमार नदी में पानी आने से बेन, इस्लामपुर, सिलाव, राजगीर और परवलपुर प्रखंड के किसानों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से गिरते भूजल स्तर के कारण सूखे का संकट झेल रहे इन इलाकों में नदी का पानी आने से खरीफ फसलों को नया जीवन मिला है। नालंदा जिले में मानसून की पहली ही तेज आमद ने प्रशासनिक तैयारियों की कलई खोलकर रख दी है। महज चार दिन पहले तक जिन नदियों के पेट में धूल उड़ रही थी, वे अब उफान पर आकर तबाही मचा रही हैं। अस्थावां प्रखंड के ओंदा गांव के पास जिरायन नदी के तटबंध में करीब 25 फीट का बड़ा कटाव हो गया है। तेज धार के साथ पानी तेजी से रिहायशी और कृषि क्षेत्रों में फैल रहा है। ओंदा, नेरुत, गोमचक, मौलाना बिगहा और भिखनी बिगहा गांव के किसानों की करीब 2,500 बीघे में लहलहाती धान, मक्का और मौसमी सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। पहले सूखे की मार और अब जलप्रलय से अपनी पूंजी डूबती देख किसान बेबस नजर आ रहे हैं।
संसाधनों की कमी से राहत कार्य धीमा, ग्रामीणों में आक्रोश ओंदा में तटबंध टूटने की सूचना पर जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची है, लेकिन पर्याप्त संसाधनों और बोल्डर-बोरियों के अभाव में मरम्मत का काम नाकाफी साबित हो रहा है। तेज बहाव के कारण कटाव का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बहाव को युद्धस्तर पर नहीं रोका गया तो बाढ़ का पानी पास के कई अन्य गांवों को भी अपनी चपेट में ले लेगा। उतरथू में सोयबा नदी का किनारा दरका, मरम्मत जारी इधर, बिंद प्रखंड में भी बाढ़ का खतरा गहरा गया है। उतरथू पंचायत सरकार भवन के पास सोयबा नदी के तेज दबाव के कारण तटबंध कटने लगा है। मुखिया प्रतिनिधि नीतिन कुमार की सूचना पर बीडीओ जफरूद्दीन और कनीय अभियंता अशोक कुमार ने मौके पर पहुंचकर बालू भरी बोरियों और बल्लियों के सहारे मरम्मत कार्य शुरू कराया। बांध पर बढ़ते दबाव से तटवर्ती आबादी दहशत में है। उदेरास्थान से छोड़ा गया 36 हजार क्यूसेक पानी, शहरी क्षेत्र में अलर्ट जहानाबाद स्थित उदेरास्थान बराज से गुरुवार को कुल 36 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद लोकाइन, कड़ुआ और भूतही नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। लगातार बारिश से सकरी, गोइठवा और पंचाने की धार भी तेज हो गई है। बिहारशरीफ के सोहसराय, सलेमपुर, आशानगर, सोहडीह और बबुरबन्ना जैसे निचले मोहल्लों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने सभी संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। पैमार के किसानों के लिए वरदान बना जलस्तर बाढ़ की विभीषिका के बीच पैमार नदी में पानी आने से बेन, इस्लामपुर, सिलाव, राजगीर और परवलपुर प्रखंड के किसानों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से गिरते भूजल स्तर के कारण सूखे का संकट झेल रहे इन इलाकों में नदी का पानी आने से खरीफ फसलों को नया जीवन मिला है।  

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