ढाका से दक्षिण अफ्रीका पहुंचे तौहीद हृदोय के लिए शायद यह दौरा किसी बड़े लक्ष्य के साथ शुरू नहीं हुआ था। उन्हें बांग्लादेश ए टीम में जगह इसलिए मिली क्योंकि कई खिलाड़ी चोटिल थे और कुछ खिलाड़ियों के वीजा से जुड़ी दिक्कतें थीं। नुरुल हसन, रिशाद हुसैन और मोहम्मद सैफुद्दीन के साथ हृदोय को भी टीम में भेजा गया, ताकि दक्षिण अफ्रीका दौरे पर खिलाड़ियों की संख्या पूरी रहे। लेकिन अब वही हृदोय इस दौरे के सबसे बड़े चर्चा के केंद्र में हैं।
पोटचेफस्ट्रूम में दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ हृदोय ने नाबाद 350 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर सबको चौंका दिया। यह मैदान उनके लिए खास भी है। गौरतलब है कि 2020 में इसी मैदान पर हृदोय बांग्लादेश की अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। चार दिवसीय मुकाबले में उनकी लंबी पारी ने न सिर्फ बांग्लादेश ए को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि उनके लाल गेंद वाले खेल को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी है।
दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका रवाना होने से पहले हृदोय खुद लंबे प्रारूप को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं दिख रहे थे। हवाई अड्डे पर उनसे जब इस दौरे की तैयारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने टेस्ट क्रिकेट के बजाय दक्षिण अफ्रीकी परिस्थितियों में खुद को ढालने और आगे होने वाली सीमित ओवरों की श्रृंखला तथा अगले साल के एकदिवसीय विश्व कप की तैयारी पर जोर दिया था।
हृदोय के लिए टेस्ट क्रिकेट का सफर अब तक बहुत छोटा रहा है। सफेद गेंद के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के बाद उन्हें टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए तीन साल से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। जिम्बाब्वे के हरारे में दूसरे टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बाद वह टीम से बाहर हो गए। वह अब तक केवल एक टेस्ट मैच खेल पाए हैं।
उनके टेस्ट चयन को लेकर तब भी सवाल उठे थे। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट में बहुत जल्दी उतार दिया गया, जबकि कुछ ने उनकी तकनीक को सीमित ओवरों के खेल के लिए ज्यादा उपयुक्त बताया। हालांकि, कुछ लोगों ने टेस्ट टीम में उन्हें लगातार मौका देने की पैरवी भी की थी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का मानना रहा है कि बांग्लादेश की टीम में जगह बनाना आसान नहीं है और किसी खिलाड़ी को मौका मिलने के बाद उसे अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर मिल सकते हैं। हृदोय के मामले में ऐसा लगातार नहीं हुआ। शायद यही वजह है कि उन्होंने अपने टेस्ट भविष्य को लेकर ज्यादा उम्मीदें पालने के बजाय अपने खेल पर ध्यान देना शुरू कर दिया।
दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ 350 रन की नाबाद पारी के बाद हृदोय ने भी साफ किया कि राष्ट्रीय टीम के लिए कितने मैच खेलने हैं, यह उनके हाथ में नहीं है। उनका काम मौका मिलने पर अच्छा प्रदर्शन करना है और आगे का फैसला चयनकर्ताओं को करना है।
बता दें कि हृदोय बांग्लादेश के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले केवल तीसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने तमीम इकबाल के नाबाद 334 और रकीबुल हसन के नाबाद 313 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए बांग्लादेशी बल्लेबाज का प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया है।
अब चयनकर्ताओं के सामने असली चुनौती सिर्फ हृदोय को टेस्ट टीम में शामिल करने की नहीं है। उन्हें यह भरोसा भी देना होगा कि अगर उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट में वापस बुलाया जाता है तो लगातार मौके मिलेंगे। दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ उनकी पारी ने दिखा दिया है कि जब उम्मीदों का बोझ नहीं होता, तो हृदोय अपने स्वाभाविक अंदाज में खेलते हुए बड़ी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं।

