बिहारशरीफ के नवजीवन शिशु अस्पताल का निबंधन रद्द:नवजात की अदला-बदली हुई थी, हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने की कार्रवाई

बिहारशरीफ के नवजीवन शिशु अस्पताल का निबंधन रद्द:नवजात की अदला-बदली हुई थी, हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने की कार्रवाई

नालंदा में नवजात की अदला-बदली और संभावित तस्करी के मामल में घिरे कागजी मोहल्ला (भैसासुर रोड) स्थित ‘नवजीवन शिशु हॉस्पिटल’ का निबंधन रद्द कर दिया गया है। ये कार्रवाई पटना उच्च न्यायालय के कड़े रुख और त्रिस्तरीय जांच समिति की सिफारिश के बाद हुई। नालंदा सिविल सर्जन ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए अस्पताल संचालक डॉ. ब्रजेश कुमार को किसी भी परिस्थिति में अस्पताल का संचालन न करने का सख्त निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर डीएम ने गठित की थी 3 सदस्यीय जांच कमेटी जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, माननीय पटना उच्च न्यायालय में दायर आपराधिक रिट याचिका संख्या (Cr.W.J.C. No.- 3338/2025 – अविनाश कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में 11 अगस्त 2026 को आदेश पारित किया गया था। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नालंदा की जिलाधिकारी ने मामले की तहकीकात और कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त जांच कमेटी गठित करने का निर्देश दिया गया था।
अपर समाहर्त्ता-सह-वरीय पदाधिकारी (जिला विधि शाखा) की ओर से 17 अगस्त को जांच टीम गठित की गई। त्रिस्तरीय टीम ने 24 अगस्त को अस्पताल में सघन जांच की। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट (पत्रांक 3054, दिनांक 25 अगस्त 2026) में स्पष्ट अनुशंसा की कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के दृष्टिकोण से अस्पताल की अनुज्ञप्ति रद्द की जाए। इसी रिपोर्ट के आधार पर बिहार रजिस्ट्रीकरण और विनियमन नियमावली के तहत अस्पताल के औपबंधिक रजिस्ट्रीकरण संख्या-138/2026 को रद्द कर दिया गया।
बेटा पैदा हुआ तो थमा दी थी बेटी, डीएनए जांच में खुला था राज यह पूरा मामला बिहारशरीफ के बहुचर्चित नवजात अदला-बदली कांड से जुड़ा हुआ है। पीड़ित पिता अविनाश कुमार ने बताया था कि प्रसव के बाद उनके नवजात बेटे को बेहतर चिकित्सा के लिए भैंसासुर मोड़ स्थित ‘नवजीवन शिशु अस्पताल’ में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का आरोप था कि इलाज पूरा होने के बाद जब बच्चे को डिस्चार्ज किया गया, तो अस्पताल प्रबंधन ने बेटे के स्थान पर उन्हें एक बच्ची सौंप दी। परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया। जिसके बाद बिहारशरीफ नगर थाने में प्राथमिक दर्ज (कांड संख्या 453/2023) कराई गई थी। इसके बाद हुए डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए, जिसमें यह पुष्टि हुई कि सौंपी गई बच्ची उस दंपति की जैविक संतान नहीं थी। इसके बाद बच्चे की अदला-बदली और संभावित बच्चा तस्करी के मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अस्पताल संचालन किया तो कार्रवाई होगी
सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से जारी पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि निबंधन रद्द होने के बाद भी नवजीवन शिशु अस्पताल का संचालन किसी भी रूप में पाया गया, तो संचालक डॉ. ब्रजेश कुमार के विरुद्ध बिहार नैदानिक स्थापन नियमावली और हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आदेश की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, नालंदा को भी भेजी गई है, ताकि अस्पताल के संचालन पर रोक सुनिश्चित कराई जा सके। नालंदा में नवजात की अदला-बदली और संभावित तस्करी के मामल में घिरे कागजी मोहल्ला (भैसासुर रोड) स्थित ‘नवजीवन शिशु हॉस्पिटल’ का निबंधन रद्द कर दिया गया है। ये कार्रवाई पटना उच्च न्यायालय के कड़े रुख और त्रिस्तरीय जांच समिति की सिफारिश के बाद हुई। नालंदा सिविल सर्जन ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए अस्पताल संचालक डॉ. ब्रजेश कुमार को किसी भी परिस्थिति में अस्पताल का संचालन न करने का सख्त निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर डीएम ने गठित की थी 3 सदस्यीय जांच कमेटी जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, माननीय पटना उच्च न्यायालय में दायर आपराधिक रिट याचिका संख्या (Cr.W.J.C. No.- 3338/2025 – अविनाश कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में 11 अगस्त 2026 को आदेश पारित किया गया था। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नालंदा की जिलाधिकारी ने मामले की तहकीकात और कार्रवाई के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त जांच कमेटी गठित करने का निर्देश दिया गया था।
अपर समाहर्त्ता-सह-वरीय पदाधिकारी (जिला विधि शाखा) की ओर से 17 अगस्त को जांच टीम गठित की गई। त्रिस्तरीय टीम ने 24 अगस्त को अस्पताल में सघन जांच की। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट (पत्रांक 3054, दिनांक 25 अगस्त 2026) में स्पष्ट अनुशंसा की कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के दृष्टिकोण से अस्पताल की अनुज्ञप्ति रद्द की जाए। इसी रिपोर्ट के आधार पर बिहार रजिस्ट्रीकरण और विनियमन नियमावली के तहत अस्पताल के औपबंधिक रजिस्ट्रीकरण संख्या-138/2026 को रद्द कर दिया गया।
बेटा पैदा हुआ तो थमा दी थी बेटी, डीएनए जांच में खुला था राज यह पूरा मामला बिहारशरीफ के बहुचर्चित नवजात अदला-बदली कांड से जुड़ा हुआ है। पीड़ित पिता अविनाश कुमार ने बताया था कि प्रसव के बाद उनके नवजात बेटे को बेहतर चिकित्सा के लिए भैंसासुर मोड़ स्थित ‘नवजीवन शिशु अस्पताल’ में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का आरोप था कि इलाज पूरा होने के बाद जब बच्चे को डिस्चार्ज किया गया, तो अस्पताल प्रबंधन ने बेटे के स्थान पर उन्हें एक बच्ची सौंप दी। परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया। जिसके बाद बिहारशरीफ नगर थाने में प्राथमिक दर्ज (कांड संख्या 453/2023) कराई गई थी। इसके बाद हुए डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए, जिसमें यह पुष्टि हुई कि सौंपी गई बच्ची उस दंपति की जैविक संतान नहीं थी। इसके बाद बच्चे की अदला-बदली और संभावित बच्चा तस्करी के मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अस्पताल संचालन किया तो कार्रवाई होगी
सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से जारी पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि निबंधन रद्द होने के बाद भी नवजीवन शिशु अस्पताल का संचालन किसी भी रूप में पाया गया, तो संचालक डॉ. ब्रजेश कुमार के विरुद्ध बिहार नैदानिक स्थापन नियमावली और हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आदेश की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, नालंदा को भी भेजी गई है, ताकि अस्पताल के संचालन पर रोक सुनिश्चित कराई जा सके।  

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