Nepal Glacier Collapse: नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ के बाद खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि नेपाल में उस इलाके के आसपास मौजूद ग्लेशियर अभी भी अस्थिर हैं, जहां हाल ही में ग्लेशियर टूटने के बाद भारी तबाही हुई थी। इनके फिर से टूटने पर भूस्खलन, नदी में रुकावट और नई बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब प्रभावित इलाके में जमा पानी का बड़ा हिस्सा निकल चुका है। चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, 1 सितंबर की सुबह ड्रोन से की गई निगरानी में चोछेन खोला नदी के पास बने इम्पैक्ट क्रेटर में जमा पानी काफी हद तक निकल गया था। इसके बाद नीचे की ओर नदी का बहाव भी सामान्य बताया गया। हालांकि, अधिकारियों ने आसपास के ग्लेशियरों और पहाड़ी ढलानों को अब भी संभावित खतरा बताया है।
26 अगस्त को कैसे आई थी तबाही?
26 अगस्त को नेपाल के लांगटांग लिरुंग इलाके में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इसके साथ बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टान भी नीचे की ओर बहने लगी। देखते ही देखते बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का तेज मलबा प्रवाह शुरू हो गया।
यह मलबा पहाड़ी घाटियों से होते हुए करीब 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक गया। रास्ते में इसने और चट्टान, मिट्टी और पानी को अपने साथ मिला लिया। इससे बहाव और ज्यादा ताकतवर हो गया। बाढ़ ने नेपाल में घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। इसका असर चीन के तिब्बत क्षेत्र तक भी पहुंचा।
अब दोबारा क्यों बढ़ा खतरा?
ग्लेशियर टूटने के बाद बड़ी मात्रा में मलबा नदियों के रास्ते में जमा हो गया। इससे कई जगह पानी का बहाव रुक सकता है और प्राकृतिक बांध बन सकते हैं। इनके पीछे पानी जमा होने से अस्थायी झील बन जाती है। अगर ऐसा प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है तो जमा पानी एक साथ नीचे की ओर बह सकता है। इससे अचानक बाढ़ आ सकती है। इसी तरह नदी किनारे होने वाला भूस्खलन भी नदी का रास्ता रोक सकता है और नई झील बना सकता है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने प्रभावित इलाके में नदी किनारे छोटे भूस्खलनों का पता चलने की भी जानकारी दी है। इसी वजह से ग्लेशियर, पहाड़ी ढलान और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।
14 ग्लेशियल झीलों पर भी नजर
चीन के अधिकारियों के मुताबिक, ग्यिरोंग त्सांगपो नदी बेसिन में पहले चिन्हित की गई 14 ग्लेशियल झीलें फिलहाल बड़े स्तर पर स्थिर हैं। यह तत्काल खतरे के लिहाज से राहत की बात है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे इलाके का खतरा खत्म हो गया है।अधिकारियों की चिंता खास तौर पर चोछेन खोला के उस इलाके को लेकर है, जहां हालिया घटना के दौरान ग्लेशियर और मलबे ने बड़ा असर डाला था।
हिमालय में ग्लेशियरों की बढ़ती अस्थिरता चिंता का विषय
विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ता तापमान और ग्लेशियरों का पिघलना ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ और चट्टानों को अस्थिर कर सकता है। हालांकि, 26 अगस्त की घटना को केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताना जल्दबाजी होगी। किसी खास ग्लेशियर के टूटने के तत्काल कारणों को समझने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। नेपाल के लिए यह खतरा बेहद गंभीर है। नेपाल की कई बस्तियां और जरूरी सुविधाएं पहाड़ी नदियों के आसपास बसी हैं। ऐसे में ग्लेशियर टूटने या भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ बड़े इलाके में तबाही मचा सकती है।
फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में पानी का स्तर कम हुआ है और नदी का बहाव सामान्य बताया जा रहा है। लेकिन चीन की नई चेतावनी साफ संकेत देती है कि एक बाढ़ का पानी उतरना खतरे के पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। आसपास के ग्लेशियरों और पहाड़ी ढलानों की निगरानी अभी भी जरूरी है।

