हिमालय में फटने की कगार पर ग्लेशियल झीलें, भारत-नेपाल और चीन में लाखों जिंदगियों पर गहराया संकट

हिमालय में फटने की कगार पर ग्लेशियल झीलें, भारत-नेपाल और चीन में लाखों जिंदगियों पर गहराया संकट

Himalayan Glacial Lakes: क्या हमारी खूबसूरत दुनिया धीरे-धीरे तबाही की तरफ बढ़ रही है? नेपाल और तिब्बत के बॉर्डर पर हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ कोई आम घटना नहीं है। यह एक चेतावनी है जो इस ओर कर रही है कि हमारी धरती गर्म हो रही है और हिमालय पर बर्फ के बड़े-बड़े पहाड़ अब पिघलकर टूटने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय का तेजी से गर्म होना इस पूरे क्षेत्र को एक ‘टाइम बम’ पर खड़ा कर रहा है। अगर इसे रोकने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो भारत, नेपाल और चीन में रहने वाले लाखों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।

कैसे आई नेपाल-तिब्बत में तबाही?

नेपाल के लांगटांग लिरुंग पहाड़ की चोटी से बर्फ का एक बहुत बड़ा टुकड़ा टूटकर सीधे घाटी में गिर गया। बर्फ और चट्टानों के इस भीषण भूस्खलन ने नीचे बहती त्रिशूली नदी के प्रवाह को अचानक उग्र कर दिया। इसके बाद आई बाढ़ ने जो तबाही मचाई, उसने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए। इस आपदा में 1,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। चिंता की बात यह भी है कि करीब 900 से अधिक हाइड्रोपावर कर्मचारी एक सुरंग में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए राहत कार्य जारी है।

क्या होती हैं ग्लेशियल झीलें और ये क्यों फटती है?

जब ऊंचे पहाड़ों पर जमे ग्लेशियर गर्मी के कारण पिघलने लगते हैं, तो उनका पानी ग्लेशियर के आसपास, नीचे या अंदर जमा होने लगता है। मिट्टी, पत्थर और बर्फ का ढीला मलबा इस पानी को रोककर एक प्राकृतिक तालाब या बना देता है। जब ग्लेशियर ज्यादा पिघलते हैं, तो इस झील में पानी का दबाव बहुत बढ़ जाता है। एक समय ऐसा आता है जब मिट्टी और पत्थरों की यह दीवार पानी का भार नहीं झेल पाती और टूट जाती है। इसे ही ग्लेशियल झील का फटना कहते हैं। जब यह झील फटती है, तो करोड़ों लीटर पानी तेज रफ्तार से नीचे बसे गांवों और शहरों को बहा ले जाता है।

चीन की चेतावनी, फिर आ सकती है बाढ़

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने डेटा का हवाला देते हुए सचेत किया है कि नेपाल की कुओजियान नदी के आसपास के ग्लेशियर अब बहुत कमजोर हो चुके हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि नदी के प्रभाव वाले क्षेत्र में पानी का दायरा जरूर कुछ कम हुआ है, लेकिन खतरा टला नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि दोबारा भूस्खलन होता है, तो नदी का रास्ता फिर रुक सकता है। इससे एक नई अस्थिर झील बन सकती है, जो कभी भी दोबारा फट सकती है।

47 से बढ़कर और हुई संख्या, भारत के लिए भी खतरे की घंटी

वर्ष 2020 के एक अध्ययन में नेपाल, चीन और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में 47 बेहद खतरनाक ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई थी। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र (UN) की सहायक महासचिव कन्नी विग्नाराजा के अनुसार, ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि इन संवेदनशील झीलों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।

हिमालय क्षेत्र दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। इसका सीधा असर भारत के उत्तरी राज्यों, नेपाल और चीन के निचले इलाकों पर पड़ रहा है। लाखों लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जो कभी भी इन झीलों के फटने से डूब सकते हैं।

नेपाल में आई यह अचानक बाढ़ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्रकृति अब इंसानों को संभलने का आखिरी मौका दे रही है। अगर वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह तबाही मानवता के लिए अंत की शुरुआत साबित हो सकती है।

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