चतरा जिले के इटखोरी थाना क्षेत्र स्थित सेफ जोन अस्पताल में इलाज के दौरान 50 वर्षीय मरीज अशोक राम की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। मरीज की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। सूचना मिलने पर इटखोरी थाना पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने डॉक्टर और नर्स समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है। अस्पताल में हंगामे से जुड़ी तस्वीरें… परिजनों के अनुसार, सोमवार रात करीब 1:30 बजे अशोक राम को सीने में दर्द की शिकायत के बाद सेफ जोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतक के भाई उमेश रविदास और बेटी का आरोप है कि रात से सुबह तक इलाज चलने के बावजूद अशोक की हालत में सुधार नहीं हुआ। मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती देख परिजनों ने उसे बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर करने का अनुरोध किया। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर कुद्दुस के पिता रियाज मियां ने उन्हें रोकते हुए कहा कि डॉक्टर साहब बस आ ही रहे हैं। थोड़ा समय दो, सब ठीक हो जाएगा। इसके कुछ ही देर बाद मरीज की मौत हो गई। इंजेक्शन लगते ही दम तोड़ने का दावा परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की एक नर्स ने अशोक राम को इंजेक्शन लगाया। परिजनों के अनुसार, सुई लगने के तुरंत बाद ही अशोक राम ने दम तोड़ दिया। आंखों के सामने मरीज की मौत होते देख परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और खिड़की-दरवाजों के शीशे चकनाचूर कर दिए। अस्पताल परिसर में खड़ी एक वैगनआर कार को भी भीड़ ने निशाना बनाया। कार के आगे और पीछे के शीशे पूरी तरह तोड़ दिए गए। घटना की सूचना मिलते ही इटखोरी थाना प्रभारी और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। बताया गया कि आक्रोशित भीड़ के बीच पुलिस ने बमुश्किल सुरक्षित रास्ता बनाकर अस्पताल में मौजूद लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने डॉक्टर कुद्दुस, उनके पिता रियाज मियां और एक महिला नर्स समेत कुल चार लोगों को सुरक्षित निकालकर हिरासत में लिया और थाने ले गई। लापरवाही के आरोपों की जांच में जुटी पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यालय डीएसपी सुनील कुमार सिंह स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर कैंप कर रहे हैं। वह आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों को समझाकर स्थिति सामान्य करने का प्रयास की। पुलिस की ओर से अस्पताल में हुई तोड़फोड़ और मरीज की मौत, दोनों पहलुओं पर कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल डॉक्टर, नर्स समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, लेकिन इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अशोक राम की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज के दौरान चिकित्सकीय स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं। वहीं, अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। चतरा जिले के इटखोरी थाना क्षेत्र स्थित सेफ जोन अस्पताल में इलाज के दौरान 50 वर्षीय मरीज अशोक राम की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। मरीज की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। सूचना मिलने पर इटखोरी थाना पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने डॉक्टर और नर्स समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है। अस्पताल में हंगामे से जुड़ी तस्वीरें… परिजनों के अनुसार, सोमवार रात करीब 1:30 बजे अशोक राम को सीने में दर्द की शिकायत के बाद सेफ जोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतक के भाई उमेश रविदास और बेटी का आरोप है कि रात से सुबह तक इलाज चलने के बावजूद अशोक की हालत में सुधार नहीं हुआ। मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती देख परिजनों ने उसे बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर करने का अनुरोध किया। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर कुद्दुस के पिता रियाज मियां ने उन्हें रोकते हुए कहा कि डॉक्टर साहब बस आ ही रहे हैं। थोड़ा समय दो, सब ठीक हो जाएगा। इसके कुछ ही देर बाद मरीज की मौत हो गई। इंजेक्शन लगते ही दम तोड़ने का दावा परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की एक नर्स ने अशोक राम को इंजेक्शन लगाया। परिजनों के अनुसार, सुई लगने के तुरंत बाद ही अशोक राम ने दम तोड़ दिया। आंखों के सामने मरीज की मौत होते देख परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और खिड़की-दरवाजों के शीशे चकनाचूर कर दिए। अस्पताल परिसर में खड़ी एक वैगनआर कार को भी भीड़ ने निशाना बनाया। कार के आगे और पीछे के शीशे पूरी तरह तोड़ दिए गए। घटना की सूचना मिलते ही इटखोरी थाना प्रभारी और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। बताया गया कि आक्रोशित भीड़ के बीच पुलिस ने बमुश्किल सुरक्षित रास्ता बनाकर अस्पताल में मौजूद लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने डॉक्टर कुद्दुस, उनके पिता रियाज मियां और एक महिला नर्स समेत कुल चार लोगों को सुरक्षित निकालकर हिरासत में लिया और थाने ले गई। लापरवाही के आरोपों की जांच में जुटी पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यालय डीएसपी सुनील कुमार सिंह स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर कैंप कर रहे हैं। वह आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों को समझाकर स्थिति सामान्य करने का प्रयास की। पुलिस की ओर से अस्पताल में हुई तोड़फोड़ और मरीज की मौत, दोनों पहलुओं पर कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल डॉक्टर, नर्स समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, लेकिन इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अशोक राम की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज के दौरान चिकित्सकीय स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं। वहीं, अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

