शहर में आरक्षण व्यवस्था में सुधार और यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में युवाओं और सवर्ण समाज की आवाज मुखर होने लगी है। मंगलवार को भाजपा नेता अरविंद राज त्रिपाठी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में युवाओं और सवर्ण समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर एक विशाल ‘मशाल जुलूस’ निकाला। यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें शामिल युवाओं ने आरक्षण में न्यायसंगत सुधार और नियमों की समीक्षा की पुरजोर मांग की। मोतीझील से आजाद पार्क तक रोशनी और नारों का सैलाब मशाल जुलूस की शुरुआत मोतीझील स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क गेट से हुई। हाथों में जलती हुई मशालें लिए सैकड़ों युवा अनुशासित तरीके से पंक्तिबद्ध होकर आगे बढ़े। जुलूस मोतीझील से शुरू होकर स्वरूप नगर के व्यस्त गोल चौराहे से होते हुए आजाद पार्क (नेहरू पार्क) पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे रास्ते में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार लाने और हालिया यूजीसी गाइडलाइंस को वापस लेने (UGC Roll Back) के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। ‘आरक्षण में सुधार समय की मांग’, अरविंद राज त्रिपाठी के नेतृत्व में एकजुट हुए युवा जुलूस की अगुवाई कर रहे भाजपा नेता अरविंद राज त्रिपाठी ने कहा कि समाज के हर वर्ग को समान अवसर और न्याय मिलना बेहद जरूरी है। आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है ताकि योग्य और जरूरतमंद युवाओं को उनका हक मिल सके। उन्होंने कहा कि यूजीसी के जिन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों और युवाओं में असंतोष की भावना पनप रही है, उन पर सरकार और प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए। युवाओं ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और समानता के अधिकार के लिए है। कानून-व्यवस्था का रखा गया पूरा ध्यान, शांतिपूर्ण रहा पूरा प्रदर्शन मशाल जुलूस के दौरान आयोजकों और युवाओं ने शहर की यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा। मोतीझील से लेकर गोल चौराहे तक किसी भी आम नागरिक या वाहन चालक को परेशानी न हो, इसके लिए युवाओं की अपनी टीम ने खुद मोर्चा संभाल रखा था। सैकड़ों की भीड़ होने के बावजूद जुलूस में शामिल लोग बेहद अनुशासित दिखे और शांतिपूर्वक अपनी बात को शासन-प्रशासन तक पहुंचाया। प्रदर्शन के समापन पर आजाद पार्क में युवाओं ने एक सुर में आरक्षण नीति में जल्द सुधार और मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।

