बक्सर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, मंगलवार सुबह बक्सर में गंगा का जलस्तर 60.02 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर (59.32 मीटर) से ऊपर और खतरे के निशान (60.32 मीटर) से मात्र 30 सेंटीमीटर नीचे है। गंगा के बढ़ते दबाव के कारण सहायक कर्मनाशा नदी भी उफान पर है। इसका सीधा असर सिकरौल और आसपास के गांवों के संपर्क मार्गों पर दिख रहा है। सिकरौल गांव जाने वाली सड़क पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है, जिससे सड़क का हिस्सा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। इन परिस्थितियों के बावजूद, ग्रामीण आवश्यक कार्यों के लिए इसी जोखिम भरे रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही और समय रहते वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई, तो सिकरौल गांव का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। पानी बढ़ने से यात्रियों को हो रही परेशानी सड़क पर पानी बढ़ने से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से संपर्क मार्गों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है। इसी बीच, बनारपुर गांव में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गांव के निचले हिस्सों में पानी आबादी की ओर बढ़ रहा है और कई घरों के दरवाजों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर में और वृद्धि होने पर पानी घरों के अंदर प्रवेश कर सकता है। आसपास के खेतों में भी पानी फैलने लगा है, जिससे किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है। ग्रामीणों के मुताबिक गंगा और कर्मनाशा का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो आसपास के अन्य निचले इलाकों और गांवों पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, संपर्क मार्गों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार नाव समेत अन्य संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग की है। सिमरी में जनेश्वर सेतु जाने वाला मार्ग जलमग्न, आवागमन बंद
सिमरी प्रखंड में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब मुख्य संपर्क मार्ग पर दिखाई देने लगा है। गंगौली से जनेश्वर सेतु होते हुए उत्तर प्रदेश जाने वाली मुख्य सड़क पूरी तरह जलमग्न हो गई है। सड़क पर पानी का तेज बहाव होने के बावजूद कई लोग मोटरसाइकिल और पैदल रास्ता पार करने की कोशिश करते नजर आए। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल मार्ग पर बैरिकेडिंग कर आवागमन पूरी तरह रोक दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रामदास राय के डेरा थाना पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि लोग प्रतिबंधित मार्ग से होकर गुजरने का प्रयास न करें। अंचलाधिकारी भगवती शंकर पांडे ने बताया कि दियारा क्षेत्र में प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। संवेदनशील और खतरनाक स्थानों पर गोताखोर तथा नाविकों की तैनाती की गई है। संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम की मांग भी की गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ के पानी में प्रवेश करने से बचें और प्रतिबंधित मार्गों पर किसी भी स्थिति में आवागमन नहीं करें। लोगों को खतरनाक घाटों पर स्नान नहीं करने तथा बच्चों को बढ़े हुए गंगा के पानी से दूर रखने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के अनुसार बाढ़ की स्थिति पर संबंधित कर्मचारी लगातार नजर बनाए हुए हैं और जलस्तर में होने वाले बदलाव की निगरानी की जा रही है। SDRF और स्थानीय गोताखोरों को किया गया अलर्ट जिला जन संपर्क कार्यालय से मिली सूचना के अनुसार, बक्सर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। एक सितंबर को जलस्तर 60.02 मीटर दर्ज किया गया है। यह चेतावनी स्तर 59.32 मीटर से 70 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान 60.32 मीटर से महज 30 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। बक्सर, चौसा, सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर के निचले एवं दियारा क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। तटबंधों और संवेदनशील स्थानों पर चौबीसों घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से गंगा और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। बक्सर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, मंगलवार सुबह बक्सर में गंगा का जलस्तर 60.02 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर (59.32 मीटर) से ऊपर और खतरे के निशान (60.32 मीटर) से मात्र 30 सेंटीमीटर नीचे है। गंगा के बढ़ते दबाव के कारण सहायक कर्मनाशा नदी भी उफान पर है। इसका सीधा असर सिकरौल और आसपास के गांवों के संपर्क मार्गों पर दिख रहा है। सिकरौल गांव जाने वाली सड़क पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है, जिससे सड़क का हिस्सा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। इन परिस्थितियों के बावजूद, ग्रामीण आवश्यक कार्यों के लिए इसी जोखिम भरे रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही और समय रहते वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई, तो सिकरौल गांव का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। पानी बढ़ने से यात्रियों को हो रही परेशानी सड़क पर पानी बढ़ने से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से संपर्क मार्गों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है। इसी बीच, बनारपुर गांव में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गांव के निचले हिस्सों में पानी आबादी की ओर बढ़ रहा है और कई घरों के दरवाजों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर में और वृद्धि होने पर पानी घरों के अंदर प्रवेश कर सकता है। आसपास के खेतों में भी पानी फैलने लगा है, जिससे किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है। ग्रामीणों के मुताबिक गंगा और कर्मनाशा का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो आसपास के अन्य निचले इलाकों और गांवों पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, संपर्क मार्गों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार नाव समेत अन्य संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग की है। सिमरी में जनेश्वर सेतु जाने वाला मार्ग जलमग्न, आवागमन बंद
सिमरी प्रखंड में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब मुख्य संपर्क मार्ग पर दिखाई देने लगा है। गंगौली से जनेश्वर सेतु होते हुए उत्तर प्रदेश जाने वाली मुख्य सड़क पूरी तरह जलमग्न हो गई है। सड़क पर पानी का तेज बहाव होने के बावजूद कई लोग मोटरसाइकिल और पैदल रास्ता पार करने की कोशिश करते नजर आए। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल मार्ग पर बैरिकेडिंग कर आवागमन पूरी तरह रोक दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रामदास राय के डेरा थाना पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि लोग प्रतिबंधित मार्ग से होकर गुजरने का प्रयास न करें। अंचलाधिकारी भगवती शंकर पांडे ने बताया कि दियारा क्षेत्र में प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। संवेदनशील और खतरनाक स्थानों पर गोताखोर तथा नाविकों की तैनाती की गई है। संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम की मांग भी की गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ के पानी में प्रवेश करने से बचें और प्रतिबंधित मार्गों पर किसी भी स्थिति में आवागमन नहीं करें। लोगों को खतरनाक घाटों पर स्नान नहीं करने तथा बच्चों को बढ़े हुए गंगा के पानी से दूर रखने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के अनुसार बाढ़ की स्थिति पर संबंधित कर्मचारी लगातार नजर बनाए हुए हैं और जलस्तर में होने वाले बदलाव की निगरानी की जा रही है। SDRF और स्थानीय गोताखोरों को किया गया अलर्ट जिला जन संपर्क कार्यालय से मिली सूचना के अनुसार, बक्सर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। एक सितंबर को जलस्तर 60.02 मीटर दर्ज किया गया है। यह चेतावनी स्तर 59.32 मीटर से 70 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान 60.32 मीटर से महज 30 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। बक्सर, चौसा, सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर के निचले एवं दियारा क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। तटबंधों और संवेदनशील स्थानों पर चौबीसों घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से गंगा और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।

