जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग:सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई; दिल्ली पुलिस ने 2873 लोगों पर नई FIR की परमिशन मांगी

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग:सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई; दिल्ली पुलिस ने 2873 लोगों पर नई FIR की परमिशन मांगी

नई दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज 1 सितंबर को सुनवाई करेगा। यह मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की थी। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है। CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मंगलवार को मामले की तत्काल सुनवाई को मंजूरी दी थी। बेंच ने कहा कि अगर पक्षकार आपस में सहमति बना रहे हैं, तो उसे कोई परेशानी नहीं है। SG मेहता ने कहा- हम एक IA (इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन) दाखिल करना चाहते हैं। यह प्रदर्शन से जुड़ा है और FIR रद्द करने के लिए है। हम संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं। आवेदन में कहा गया है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के अनुसार, दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR आगे नहीं चलाना चाहती। दिल्ली पुलिस का दावा- 2800 से ज्यादा क्रिमिनल पहचाने गए दिल्ली पुलिस ने आवेदन में कहा कि NCRB के रिकॉर्ड के मुताबिक प्रदर्शन स्थल पर कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग मौजूद थे। पुलिस जांच करना चाहती है कि इनमें से किसी की हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में भूमिका थी या नहीं। पुलिस ने कहा कि वह केवल इन 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति चाहती है। इस FIR की जांच ‘क्रिमिनल बैकग्राउंड’ की तय परिभाषा के आधार पर की जाएगी। पुलिस ने कहा कि आम तौर पर नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। लेकिन जनहित और मामले की खास परिस्थितियों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट से विशेष अनुमति मांगी गई है। साथ ही पुरानी FIR रद्द करने की मांग की गई है। पुलिस ने कोर्ट से यह भी कहा कि उसका फैसला सिर्फ इस मामले की परिस्थितियों तक सीमित रहे और भविष्य के मामलों में इसे मिसाल न माना जाए। CJP ने टीचर्स-डे पर दिल्ली में दोबारा मार्च बुलाया कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सितंबर में दिल्ली में फिर प्रदर्शन मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराने के लिए किए वादे पूरे नहीं किए। CJP के मुताबिक, मार्च 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन निकलेगा। इसका नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करेंगे, जिन्होंने NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराने के बाद आत्महत्या की थी। मार्च में जुलाई के आंदोलन के दौरान पुलिस ज्यादती का आरोप लगाने वाले छात्रों के परिवार भी शामिल होंगे। NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक हाईपावर्ड कमेटी बनाई थी। कमेटी को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए प्रदर्शनों और छात्रों पर पुलिस ज्यादती के आरोपों की जांच करनी थी। 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की रिहाई के आदेश में ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ का मतलब साफ किया। कोर्ट ने कहा कि इसमें केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोग आएंगे। बाकी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR राज्य सरकारें कानून के तहत बंद या वापस ले सकती हैं। यह सफाई केंद्र के उस बयान के बाद आई थी, जिसमें उसने कहा था कि वह NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ FIR जारी नहीं रखना चाहता। इसमें 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च करने वाले छात्र भी शामिल थे, अगर उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में झड़प 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद छात्रों का आंदोलन कई शहरों तक फैल गया। उनकी मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से CJP की दूसरी मांगें मानने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कर दिया गया था।

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