नंदीग्राम उपचुनाव में 82 हजार वोटों का रिकॉर्ड तोड़ें: शुभेंदु अधिकारी

नंदीग्राम उपचुनाव में 82 हजार वोटों का रिकॉर्ड तोड़ें: शुभेंदु अधिकारी

(शीर्षक में एक शब्द में बदलाव के साथ रिपीट)
कोलकाता, 31 अगस्त पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में अपनी सरकार के कामों का जिक्र करते हुए लोगों से अपील की कि वे आने वाले उपचुनाव में उनकी पिछली जीत के अंतर को और बढ़ाने में मदद करें। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय हुई बरसों की अनदेखी को दूर कर रही है। नंदीग्राम में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारी ने बार-बार उस इलाके के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र किया और जमीन अधिग्रहण-विरोधी आंदोलन को याद किया, जिसने इस इलाके को पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया था।

इस कार्यक्रम के दौरान सड़कें, पुल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कई ग्रामीण विकास एवं अवसंरचना परियोजनाएं शुरू की गईं। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से अपील की कि वे विधानसभा सीट से मिले उनके पिछले चुनावी जनादेश के 82,000 मतों के अंतर को पार करने का प्रयास करें। इस तरह उन्होंने विकास कार्यक्रम को और मजबूत राजनीतिक समर्थन हासिल करने की अपील में बदल दिया।

अधिकारी ने कहा, “नंदीग्राम प्राथमिकता में है। आपने मुझे चुना था और मैं लगभग साढ़े तीन महीने से मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा कर रहा हूं। इस कम समय में हमने जो काम किया है, वह बस शुरुआत है।”
उन्होंने कहा, “पिछली बार आपने मुझे 82,000 मतों से जिताया था।

क्या आपको याद है? इस बार उस रिकॉर्ड को तोड़ना है।” उन्होंने बार-बार भीड़ से वादा करने को कहा कि वे नया रिकॉर्ड बनाने में उनकी मदद करेंगे। अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी हालांकि बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी थी।

निर्वाचन आयोग ने अभी तक उपचुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की है। नंदीग्राम अधिकारी की राजनीतिक पहचान का मुख्य केंद्र रहा है। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया और 2026 के चुनावों में भी अपनी सीट बरकरार रखी।

साथ ही दक्षिण कोलकाता में बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में भी उन्हें हराया। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के साथ, खासकर नंदीग्राम के विकास और लंबित परियोजनाओं को लेकर, एक बड़ा राजनीतिक अंतर भी दिखाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली मुख्यमंत्री ने नंदीग्राम सीट हारने के बाद वहां की रेलवे परियोजना को रोक दिया था।

उनका कहना था कि इस परियोजना के लिए सिर्फ छह एकड़ जमीन की जरूरत थी और उनकी सरकार ने पहले ही लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन रेलवे को सौंप दी है। उन्होंने प्रस्तावित रेल संपर्क का जिक्र करते हुए कहा, “हम बाकी जमीन भी देंगे। अगले साल मार्च तक, मैं नंदीग्राम रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ूंगा।”
अधिकारी ने इस मौके का इस्तेमाल नंदीग्राम आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसा के इतिहास को याद करने के लिए भी किया।

जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस इलाके का इतिहास ब्रिटिश शासन और उसके बाद हुए राजनीतिक दमन, दोनों का विरोध करने का रहा है। ज़मीन अधिग्रहण के लिये 2007 का नंदीग्राम आंदोलन एक प्रस्तावित केमिकल हब के खिलाफ किसानों का जबरदस्त विरोध था जिसमें पुलिस की गोलीबारी से 14 लोगों की मौत हुई और आखिरकार राज्य की वाम मोर्चा सरकार गिर गई।

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