Divya Mittal IAS Resignation: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वेच्छा से इस्तीफा देकर प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि 13 साल की अविस्मरणीय यात्रा को विराम दे दिया है। करीबियों के अनुसार यह फैसला अचानक नहीं था। मई 2026 में देवरिया जिलाधिकारी पद से हटाए जाने के बाद से ही उन्होंने इस्तीफे का मन बना लिया था। उस रात उन्होंने परिवार और करीबी साथियों से बातचीत में अपने दर्द को व्यक्त किया था।
डीएम पद से हटने का दर्द
दिव्या मित्तल को मई के पहले सप्ताह में देवरिया डीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद में विशेष सचिव बना दिया गया। फील्ड पोस्टिंग छूटने के बाद वे खुश नहीं थीं। करीबियों का कहना है कि उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर छोड़कर आईएएस इसलिए चुना था ताकि जनता की सेवा कर सकें, जो मुख्य रूप से जिला स्तर पर डीएम के रूप में संभव था। शासन में बैठाने से उनकी इच्छा अधूरी रह गई। मई में ही उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह दर्द झलक गया था, जिसमें उन्होंने शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए थे।
शीर्ष शिक्षा और खुशी का सवाल
पोस्ट में दिव्या ने लिखा था कि आईआईटी दिल्ली, आईआईएम बेंगलुरु और फिर आईएएस जैसी बेहतरीन शिक्षा मिली, लेकिन मन को शांत रखना या अकेलेपन से निपटना नहीं सिखाया गया। उन्होंने स्कूल और उच्च संस्थानों में खुश रहने की शिक्षा न दिए जाने पर सवाल उठाया। उस समय कोई नहीं समझ सका था कि यह इस्तीफे की दिशा में पहला कदम साबित होगा। करीबी बताते हैं कि डीएम पद छूटने वाली रात उन्होंने गहराई से सोचा और परिवार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा।
तीन जिलों में डीएम का सफर
2013 बैच की अधिकारी दिव्या ने पहले आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से पीजीडीएम किया। लंदन में जॉब छोड़कर सेवा में आईं। मेरठ, गोंडा, कानपुर, बरेली के बाद संत कबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की डीएम रहीं। मिर्जापुर में उन्होंने दूरदराज के गांव में पाइप से पानी पहुंचाने का काम किया, जो स्वतंत्रता के 75 साल बाद पहली बार हुआ। देवरिया में भी उनके फैसले चर्चा में रहे।
परिवार और प्राथमिकताएं
खुद दिव्या ने बाद में स्पष्ट किया कि इस्तीफा किसी दबाव या अचानक ट्रिगर का नतीजा नहीं, बल्कि परिवार, रुचियों और प्राथमिकताओं पर आधारित सोच-समझकर लिया गया फैसला है। वे दो बेटियों की मां हैं। आईएएस को जीवन का एक अध्याय बताते हुए उन्होंने कहा कि पद खत्म हो सकता है, लेकिन सपना नहीं। प्रशासनिक महकमा इस फैसले से अचंभित रहा क्योंकि उन्होंने बिना कोई विवाद बताए स्वेच्छा से पद छोड़ा।
करीबी कहते हैं कि उस रात दिव्या ने इस्तीफे का दृढ़ संकल्प लिया था। जनता की सेवा का सपना अधूरा लगने लगा था। उनका इस्तीफा अभी प्रक्रियाधीन है, लेकिन इस एक फैसले ने पूरे प्रशासनिक दायरे को हिला दिया।


करते हैं दिव्या मित्तल को , लोगों की जिंदगियों में बदलाव (पानी) लाने के लिए और उनके द्वारा किए गए अनेकों प्रयासों के लिए 
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