“रानी के पापा, आसमान से बहुत तेज पानी आवता… इसके बाद फोन पर टी, टी, टी… की आवाज आई और कॉल डिसकनेक्ट हो गया। मेरी पत्नी मुझे हर चीज फोन पर बताती थी। पता नहीं, वह और मेरे बच्चे जिंदा हैं या इस दुनिया में नहीं रहे।” मोतिहारी के बुधन साह अपनी भाभी सुनीता को यही बात बताकर परिवार को नेपाल ढूंढने गए, तब से वे भी लापता हैं। उनकी भाभी ने आखिरी बातचीत की जानकारी दैनिक भास्कर को दी है। इधर, जहां बुधन की पत्नी लापता हुई, वहीं से करीब 14km की दूरी पर एक कमरे में सलमान, अबरार और नियाज सो रहे थे… आगे क्या हुआ.., उसके पहले देखिए और जानिए हादसे की वो जगह…. ‘अचानक पानी की लहरों की आवाज और टूटने-फूटने के धमाके होने लगे’ नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर हैं। भीषण त्रासदी से जिंदा बचकर मोतिहारी और बेतिया लौटे लोगों ने अपनी कहानी सुनाई। शुक्रवार शाम को अपने दोस्त अबरार और नियाज के साथ बेतिया लौटने वाले सलमान ने बताया कि हमलोगों का कमरा कंपनी साइट से 100 मीटर ऊंची जगह पर था। दोपहर एक बजे दूर से हॉर्न जैसी आवाज आ रही थी। हमें लगा कोई फैक्ट्री चालू हुई होगी, लेकिन आवाज धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी। हमलोग कमरे से बाहर आए, तो ऐसा लगा कि कोई समुद्र में बम गिरा रहा हो… दूर से काला धुआं, आसमान में सफेद चादर दिख रही थी… थोड़ी देर बाद ही पानी की लहरों की आवाज और टूटने-फूटने के धमाके एक साथ होने लगे। हमलोग बता नहीं सकते, उस वक्त क्या हुआ… एक भयंकर सैलाब आया। बिल्कुल काला पानी, कीचड़, मलबा बहुत स्पीड से नीचे की ओर जा रहा था। जो कुछ भी उसके बीच आ रहा था, वह सब उसमें समा जा रहा था। यह त्रासदी हमारे कमरे से कुछ ही मीटर की दूरी पर हो रही थी। सैलाब का दूसरा साइड बहुत चौड़ा था। मैंने अबरार और नियाज को बोला, भाई, आज कंपनी शायद नहीं खुलेगी। चलो, चलकर देखते हैं। आंधी और सैलाब थमा तो हमलोग वहां पहुंचे। वहां की हालत देखी नहीं गई। 100 से ज्यादा चाइनीज लोगों की लाशें थीं। मेरी कंपनी की बिल्डिंग तो वहां थी नहीं, सिर्फ कीचड़ था। उसमें उतरते तो हम कीचड़ में ही कई फीट नीचे चले जाते। फिर हमलोग वहां से भागे। बेटा त्रासदी से लौटकर घर पहुंचा, पिता लापता सलमान ने बताया कि सैलाब देखकर लोग भाग रहे थे। नेपाली पुलिस ने हमलोगों को देखा तो हेलिकॉप्टर में बैठाकर रेस्क्यू किया। फिर हमें दूसरे हेलिकॉप्टर में बैठाकर काठमांडू लाया गया। इसके बाद हमलोग अपने बेतिया के लिए बस बैठ गए। सुबह की शिफ्ट के साथी का कोई पता नहीं चल पाया। इनमें एक अरमान भी था। अरमान की पत्नी शहरून खातून ने बताया कि मेरे पति और बेटे सलमान आलम एक माह पहले नेपाल गए थे। बेटा सलमान शुक्रवार की शाम नेपाल से घर लौट आया है। उसके घर पहुंचने के बाद घटना की जानकारी मिली। लेकिन अरमान अब तक घर नहीं लौटे हैं। उनके लापता होने से परिवार में मातम पसरा है। बेतिया के बाद दैनिक भास्कर की टीम मोतिहारी के आदापुर थाना क्षेत्र के लालाछपड़ा गांव पहुंची, जहां एक ही परिवार के पांच लोग लापता हैं। लालाछपड़ा गांव में सबसे पहले बुधन साह के घर उनकी भाभी सुनीता से बातचीत की। उन्होंने बताया, “घटना वाले दिन सुबह ही बुधन अपने बड़े बेटे के साथ कबाड़ खरीदने निकले थे। तभी भाभी का फोन आया और उन्होंने सिर्फ इतना कहा, ‘रानी के पापा, आसमान से बहुत पानी आ रहा है।’ इसके बाद फोन कट गया। फिर दोबारा बात नहीं हो सकी। तब से तलाश की जा रही है।” सुनीता ने बताया कि शनिवार सुबह पता चाल कि काठमांडू में उनके मामा रहते हैं। बुधन साह को वहां बुलाया है, क्योंकि अस्पतालों में कई शव रखे गए हैं। बुधन अपनी पत्नी और बच्चों की तलाश में काठमांडू गए हैं। इसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। दस दिन पहले ही गांव आया था पूरा परिवार सुनीता ने बताया कि करीब 10 दिन पहले घर में पूजा थी। उसमें शामिल होने के लिए पूरा परिवार गांव आया था। पूजा समाप्त होने के बाद सभी वापस नेपाल चले गए। वहीं उनका कबाड़ का व्यवसाय है और पूरा परिवार वहीं रहकर जीवन-यापन करता है। बुधन ने बड़ी बेटी संध्या की शादी बड़े धूमधाम से की थी। उसकी 12 वर्षीय बेटी आयुषी भी है। रक्षाबंधन पर संध्या अपने भाई को राखी बांधने के लिए 26 अगस्त को मायके पहुंची थी। घर पहुंचे कुछ ही देर हुई थी कि अचानक आई बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया और पूरा परिवार लापता हो गया। ग्रामीण बुधन साह के घर पहुंचकर परिजनों का ढांढस बंधा रहे हैं। सभी की आंखें नम हैं। जगीराहा गांव के तीन मजदूर भी लापता वहीं, बीजधारी थाना क्षेत्र के जगीराहा गांव के तीन लोग भी नेपाल में लापता हैं। दैनिक भास्कर की टीम गांव पहुंची तो पता चला कि लापता लोगों में रामबाबू साह, मुनील कुमार और प्रमोद प्रसाद शामिल हैं। तीनों नेपाल के रसुवा स्थित एंड्रिट हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड के हाइड्रो प्लांट में काम करते थे। मुनील कुमार और प्रमोद प्रसाद सगे भाई हैं, जबकि रामबाबू साह उनके चचेरे भाई हैं। परिजनों के अनुसार, 26 अगस्त से तीनों के मोबाइल फोन बंद हैं। लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन किसी से बात नहीं हो पा रही है। पांच साल से नेपाल में कर रहे थे काम परिजनों ने बताया कि तीनों पिछले पांच साल से नेपाल के रसुवा में रहकर हाइड्रो प्लांट में काम कर रहे थे। छुट्टी में वे गांव आए थे। सबसे पहले रामबाबू 10 जुलाई को नेपाल लौटे। इसके बाद 22 जुलाई को प्रमोद और 15 अगस्त को मुनील भी नेपाल गए थे। परिजनों के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब सात बजे प्रमोद ने अपनी पत्नी वीणा देवी से लगभग सात मिनट तक फोन पर बात की थी। इसके बाद से उनका मोबाइल बंद है। वहीं, रामबाबू और मुनील से भी कोई संपर्क नहीं हो सका है। मुनील के पिता कृष्ण प्रसाद साह ने बताया कि बेटे से संपर्क नहीं होने के कारण पूरा परिवार चिंतित है। ADM बोले- लिस्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी गई एडीएम सह आपदा पदाधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अब तक आठ लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। हालांकि, परिजनों की ओर से आधिकारिक आवेदन नहीं दिया गया है, फिर भी सभी लापता लोगों की सूची तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन लगातार संपर्क में है। जैसे ही कोई सूचना मिलेगी, तत्काल परिजनों को दी जाएगी। “रानी के पापा, आसमान से बहुत तेज पानी आवता… इसके बाद फोन पर टी, टी, टी… की आवाज आई और कॉल डिसकनेक्ट हो गया। मेरी पत्नी मुझे हर चीज फोन पर बताती थी। पता नहीं, वह और मेरे बच्चे जिंदा हैं या इस दुनिया में नहीं रहे।” मोतिहारी के बुधन साह अपनी भाभी सुनीता को यही बात बताकर परिवार को नेपाल ढूंढने गए, तब से वे भी लापता हैं। उनकी भाभी ने आखिरी बातचीत की जानकारी दैनिक भास्कर को दी है। इधर, जहां बुधन की पत्नी लापता हुई, वहीं से करीब 14km की दूरी पर एक कमरे में सलमान, अबरार और नियाज सो रहे थे… आगे क्या हुआ.., उसके पहले देखिए और जानिए हादसे की वो जगह…. ‘अचानक पानी की लहरों की आवाज और टूटने-फूटने के धमाके होने लगे’ नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर हैं। भीषण त्रासदी से जिंदा बचकर मोतिहारी और बेतिया लौटे लोगों ने अपनी कहानी सुनाई। शुक्रवार शाम को अपने दोस्त अबरार और नियाज के साथ बेतिया लौटने वाले सलमान ने बताया कि हमलोगों का कमरा कंपनी साइट से 100 मीटर ऊंची जगह पर था। दोपहर एक बजे दूर से हॉर्न जैसी आवाज आ रही थी। हमें लगा कोई फैक्ट्री चालू हुई होगी, लेकिन आवाज धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी। हमलोग कमरे से बाहर आए, तो ऐसा लगा कि कोई समुद्र में बम गिरा रहा हो… दूर से काला धुआं, आसमान में सफेद चादर दिख रही थी… थोड़ी देर बाद ही पानी की लहरों की आवाज और टूटने-फूटने के धमाके एक साथ होने लगे। हमलोग बता नहीं सकते, उस वक्त क्या हुआ… एक भयंकर सैलाब आया। बिल्कुल काला पानी, कीचड़, मलबा बहुत स्पीड से नीचे की ओर जा रहा था। जो कुछ भी उसके बीच आ रहा था, वह सब उसमें समा जा रहा था। यह त्रासदी हमारे कमरे से कुछ ही मीटर की दूरी पर हो रही थी। सैलाब का दूसरा साइड बहुत चौड़ा था। मैंने अबरार और नियाज को बोला, भाई, आज कंपनी शायद नहीं खुलेगी। चलो, चलकर देखते हैं। आंधी और सैलाब थमा तो हमलोग वहां पहुंचे। वहां की हालत देखी नहीं गई। 100 से ज्यादा चाइनीज लोगों की लाशें थीं। मेरी कंपनी की बिल्डिंग तो वहां थी नहीं, सिर्फ कीचड़ था। उसमें उतरते तो हम कीचड़ में ही कई फीट नीचे चले जाते। फिर हमलोग वहां से भागे। बेटा त्रासदी से लौटकर घर पहुंचा, पिता लापता सलमान ने बताया कि सैलाब देखकर लोग भाग रहे थे। नेपाली पुलिस ने हमलोगों को देखा तो हेलिकॉप्टर में बैठाकर रेस्क्यू किया। फिर हमें दूसरे हेलिकॉप्टर में बैठाकर काठमांडू लाया गया। इसके बाद हमलोग अपने बेतिया के लिए बस बैठ गए। सुबह की शिफ्ट के साथी का कोई पता नहीं चल पाया। इनमें एक अरमान भी था। अरमान की पत्नी शहरून खातून ने बताया कि मेरे पति और बेटे सलमान आलम एक माह पहले नेपाल गए थे। बेटा सलमान शुक्रवार की शाम नेपाल से घर लौट आया है। उसके घर पहुंचने के बाद घटना की जानकारी मिली। लेकिन अरमान अब तक घर नहीं लौटे हैं। उनके लापता होने से परिवार में मातम पसरा है। बेतिया के बाद दैनिक भास्कर की टीम मोतिहारी के आदापुर थाना क्षेत्र के लालाछपड़ा गांव पहुंची, जहां एक ही परिवार के पांच लोग लापता हैं। लालाछपड़ा गांव में सबसे पहले बुधन साह के घर उनकी भाभी सुनीता से बातचीत की। उन्होंने बताया, “घटना वाले दिन सुबह ही बुधन अपने बड़े बेटे के साथ कबाड़ खरीदने निकले थे। तभी भाभी का फोन आया और उन्होंने सिर्फ इतना कहा, ‘रानी के पापा, आसमान से बहुत पानी आ रहा है।’ इसके बाद फोन कट गया। फिर दोबारा बात नहीं हो सकी। तब से तलाश की जा रही है।” सुनीता ने बताया कि शनिवार सुबह पता चाल कि काठमांडू में उनके मामा रहते हैं। बुधन साह को वहां बुलाया है, क्योंकि अस्पतालों में कई शव रखे गए हैं। बुधन अपनी पत्नी और बच्चों की तलाश में काठमांडू गए हैं। इसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। दस दिन पहले ही गांव आया था पूरा परिवार सुनीता ने बताया कि करीब 10 दिन पहले घर में पूजा थी। उसमें शामिल होने के लिए पूरा परिवार गांव आया था। पूजा समाप्त होने के बाद सभी वापस नेपाल चले गए। वहीं उनका कबाड़ का व्यवसाय है और पूरा परिवार वहीं रहकर जीवन-यापन करता है। बुधन ने बड़ी बेटी संध्या की शादी बड़े धूमधाम से की थी। उसकी 12 वर्षीय बेटी आयुषी भी है। रक्षाबंधन पर संध्या अपने भाई को राखी बांधने के लिए 26 अगस्त को मायके पहुंची थी। घर पहुंचे कुछ ही देर हुई थी कि अचानक आई बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया और पूरा परिवार लापता हो गया। ग्रामीण बुधन साह के घर पहुंचकर परिजनों का ढांढस बंधा रहे हैं। सभी की आंखें नम हैं। जगीराहा गांव के तीन मजदूर भी लापता वहीं, बीजधारी थाना क्षेत्र के जगीराहा गांव के तीन लोग भी नेपाल में लापता हैं। दैनिक भास्कर की टीम गांव पहुंची तो पता चला कि लापता लोगों में रामबाबू साह, मुनील कुमार और प्रमोद प्रसाद शामिल हैं। तीनों नेपाल के रसुवा स्थित एंड्रिट हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड के हाइड्रो प्लांट में काम करते थे। मुनील कुमार और प्रमोद प्रसाद सगे भाई हैं, जबकि रामबाबू साह उनके चचेरे भाई हैं। परिजनों के अनुसार, 26 अगस्त से तीनों के मोबाइल फोन बंद हैं। लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन किसी से बात नहीं हो पा रही है। पांच साल से नेपाल में कर रहे थे काम परिजनों ने बताया कि तीनों पिछले पांच साल से नेपाल के रसुवा में रहकर हाइड्रो प्लांट में काम कर रहे थे। छुट्टी में वे गांव आए थे। सबसे पहले रामबाबू 10 जुलाई को नेपाल लौटे। इसके बाद 22 जुलाई को प्रमोद और 15 अगस्त को मुनील भी नेपाल गए थे। परिजनों के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब सात बजे प्रमोद ने अपनी पत्नी वीणा देवी से लगभग सात मिनट तक फोन पर बात की थी। इसके बाद से उनका मोबाइल बंद है। वहीं, रामबाबू और मुनील से भी कोई संपर्क नहीं हो सका है। मुनील के पिता कृष्ण प्रसाद साह ने बताया कि बेटे से संपर्क नहीं होने के कारण पूरा परिवार चिंतित है। ADM बोले- लिस्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी गई एडीएम सह आपदा पदाधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अब तक आठ लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। हालांकि, परिजनों की ओर से आधिकारिक आवेदन नहीं दिया गया है, फिर भी सभी लापता लोगों की सूची तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रशासन लगातार संपर्क में है। जैसे ही कोई सूचना मिलेगी, तत्काल परिजनों को दी जाएगी।

