बारां। देवरी क्षेत्र के होडापुरा गांव के पास से निकलने वाली रैफी नदी की रपट पर शुक्रवार देर शाम उफान के दौरान बाइक सहित दादा और पोता बह गए थे। देर रात तक देवरी चौकी पुलिस और परिजन दोनों की तलाश करते रहे, लेकिन अंधेरा अधिक होने के कारण नदी में बहे दादा-पोते का कोई सुराग नहीं लग सका।
सूचना मिलने पर शनिवार सुबह एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंची। कस्बा थानाधिकारी योगेश शर्मा की मौजूदगी में टीम ने रैफी नदी में सुबह से रेस्क्यू अभियान शुरू किया, जो देर शाम तक चला। एसडीआरएफ की टीम ने नदी में कई स्थानों पर तलाश की, लेकिन दादा और पोते का कोई पता नहीं चल पाया। रविवार को भी एसडीआरएफ की टीम रेस्क्यू अभियान जारी रखेगी।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घटना की सूचना मिलते ही नदी में बहने वाले धारा सहरिया के पिता शुक्रवार शाम को ही घटनास्थल पर पहुंच गए थे। शनिवार को अन्य परिजन भी मौके पर पहुंचे। परिजनों की आंखें नम थीं और उनका रो-रोकर बुरा हाल था। धारा सहरिया के दो लड़के और एक लड़की हैं। तीनों की उम्र सात वर्ष से कम है। धारा की दो पत्नियां हैं। वहीं, कल्ला पुत्र गजुया सहरिया के दो पुत्र हैं।
हर साल बारिश में होती हैं दुर्घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार रैफी नदी की इस रपट पर बारिश के चार महीनों में ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। रपट क्षतिग्रस्त हो चुकी है और जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं। इसके कारण वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीर भी दुर्घटनाओं का शिकार होते रहते हैं। बारिश के दिनों में नदी में उफान आने पर दर्जनों मवेशी भी बह चुके हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी एक युवक की नदी में बहने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से रपट पर किसी प्रकार का संकेतक बोर्ड नहीं लगाया गया है। इससे अनजान राहगीरों को नदी में पानी के बहाव और खतरे की जानकारी नहीं मिल पाती।
काई जमने से रपट पर फिसलन
रैफी नदी की रपट छोटी है और नदी तल से महज चार-पांच फीट ऊंची है, जबकि नदी का फैलाव काफी अधिक है। इस नदी में मध्य प्रदेश की ओर से भी पानी आता है। बारिश के दिनों में लगातार पानी की चादर चलने से पूरी रपट पर काई जम जाती है। इससे राहगीरों के फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
नवीन पुल निर्माण कार्य अधर में
जानकारी के अनुसार रैफी नदी पर नवीन पुल निर्माण की घोषणा राजस्थान सरकार ने 29 जुलाई 2024 की देर शाम बजट में की थी। करीब 13 करोड़ रुपए के बजट से बनने वाले पुल के लिए टेंडर प्रक्रिया होने के दो साल बाद भी निर्माण कार्य अधर में लटका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर पुल निर्माण पूरा हो जाता तो इस तरह के हादसों को रोका जा सकता था।

वर्क ऑर्डर का संकेतक बोर्ड तक नहीं
नवीन पुल निर्माण कार्य स्थल पर वर्क ऑर्डर से संबंधित किसी प्रकार का संकेतक बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। बोर्ड नहीं होने से लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि पुल का निर्माण कब तक पूरा होगा और इसके लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है।

