भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में दो अधिकारी दोषी:न्यायिक समिति की रिपोर्ट में कई तथ्य दर्ज, एमआईसी और जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में दो अधिकारी दोषी:न्यायिक समिति की रिपोर्ट में कई तथ्य दर्ज, एमआईसी और जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट

भागीरथपुरा के चर्चित दूषित पानी कांड में 36 मौतों की जांच के लिए गठित हाईकोर्ट की एक सदस्यीय न्यायिक समिति की रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आने आए हैं। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक 36 मौतों में से 24 को दूषित पानी से हुई मौत माना गया है, जबकि 12 मौतों के मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है। रिपोर्ट में दूषित पानी से हुई मौतों के लिए 20 लाख रुपए मुआवजे की सिफारिश किए जाने की भी जानकारी है। वहीं, दूषित पानी से प्रभावित लोगों के लिए 5 लाख रुपए मुआवजे की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट में एमआईसी और जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट दी गई है। पाइपलाइन बदलने में देरी को माना बड़ी वजह रिपोर्ट के मुताबिक भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या के पीछे पाइपलाइन से जुड़े काम में देरी को अहम कारण माना गया है। जांच में यह बात सामने आने की जानकारी है कि यदि समय पर पाइपलाइन बदल दी जाती तो दूषित पानी की स्थिति नहीं बनती। जांच कमेटी ने इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में पाइपलाइन के काम और टेंडर प्रक्रिया में देरी को लेकर अधिकारियों की भूमिका की विस्तार से पड़ताल की गई है। अधिकारियों की लापरवाही का उल्लेख रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं के मुताबिक, पाइपलाइन से जुड़े काम में देरी के लिए नगर निगम के जल विभाग के अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में देरी और संबंधित स्तर पर बरती गई लापरवाही का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक प्रति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए इसमें दर्ज निष्कर्षों पर अंतिम रूप से अदालत की सुनवाई और आदेश का इंतजार रहेगा। जनप्रतिनिधियों को नहीं माना जिम्मेदार रिपोर्ट की सामने आई जानकारी में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि किसी जनप्रतिनिधि को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया है। वहीं, नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) को भी क्लीन चिट दिए जाने की जानकारी है। इसी तरह कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। इसका अर्थ यह है कि जांच कमेटी ने घटना की जिम्मेदारी मुख्य रूप से प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर तय करने की दिशा में निष्कर्ष दिए हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग रिपोर्ट सामने आने के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से इसे सार्वजनिक किए जाने और इसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता प्रमोद द्विवेदी की ओर से एडवोकेट मनीष यादव ने इस मामले में रिपोर्ट को लेकर अदालत के समक्ष पक्ष रखा है। एडवोकेट यादव के मुताबिक यह मामला केवल भागीरथपुरा में हुई मौतों तक सीमित नहीं है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भविष्य में शहर के किसी भी हिस्से में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और पेयजल व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय हो। उनका कहना है कि रिपोर्ट में यदि दूषित पानी को मौतों का कारण माना गया है तो पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और जिम्मेदारी तय करने के मुद्दे पर भी गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं, रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित हाईकोर्ट की ओर से गठित रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी है। रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है और उसे रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित रखा गया है। संबंधित पक्षों के अधिवक्ता रजिस्ट्रार के पास जाकर रिपोर्ट का अध्ययन कर सकते हैं। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और इसकी प्रति पक्षकारों को उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भी कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा गया है। इस पर आगे की सुनवाई में निर्णय होने की संभावना है। 36 मौतों के आंकड़े ने पूरे मामले को बनाया था गंभीर भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में दूषित पानी की समस्या सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त और अन्य बीमारियों की चपेट में आए थे। देखते ही देखते यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल गया था। मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर हुईं। अदालत ने प्रभावित क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, बीमार लोगों को उपचार देने और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा था। अब इन सवालों के जवाब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में रिपोर्ट के आधिकारिक परीक्षण के बाद सामने आएंगे। फिलहाल रिपोर्ट के निष्कर्षों की सामने आई जानकारी ने भागीरथपुरा त्रासदी में जिम्मेदारी, मुआवजे और भविष्य की जल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। ये खबर भी पढ़ें…
दूषित पानी की त्रासदी के बाद इंदौर में पहला रक्षाबंधन रक्षाबंधन यानी भाई-बहन के रिश्ते, प्यार और अपनापन का त्योहार। बाजारों में रंग-बिरंगी राखियां, मिठाइयों की खुशबू और भाई की कलाई पर राखी बांधती बहनों की मुस्कान… लेकिन इंदौर के भागीरथपुरा में इस बार त्योहार का रंग फीका है।पूरी खबर पढ़ें भागीरथपुरा कांड की 600+ पेज की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 मौतों की जांच को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट द्वारा गठित एक सदस्यीय न्यायिक समिति की 600 से ज्यादा पेज की जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जा चुकी है।पूरी खबर पढ़ें

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