सीनियर अधिकारियों को भी नहीं थी खबर, ट्रंप ने चुपके से CIA चीफ को रूस भेजा

सीनियर अधिकारियों को भी नहीं थी खबर, ट्रंप ने चुपके से CIA चीफ को रूस भेजा

John Ratcliffe Moscow visit: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के चीफ जॉन रैटक्लिफ की गोपनीय मॉक्सो यात्रा ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी थी। अब उनके इस मिशन को लेकर अमेरिकी अखबार में रिपोर्ट छपी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन के कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, रैटक्लिफ लातविया से बिना एक पहचान वाले अमेरिकी C17 सैन्य मालवाहक विमान से मॉस्को पहुंचे थे। इस यात्रा को इतनी गोपनीयता से अंजाम दिया गया कि जब इसकी खबर बाहर आई, तो कई यूरोपीय अधिकारी भी इसकी जानकारी जुटाने में जुट गए। खास बात यह है कि रैटक्लिफ की यात्रा पर CIA ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के हाल के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने रेडियो होस्ट ग्लेन बेक को दिए इंटरव्यू में इस दौरे को अर्ध-नियमित करार दिया था।

रूस ने यूक्रेन पर तेज किए हमले, ईरान को भी दिया समर्थन

हाल के दिनों में रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। मॉस्को ने तेहरान को भी अपना समर्थन बढ़ाया है। रैटक्लिफ ने अपनी मॉस्को यात्रा के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत फिर शुरू करने पर भी जोर दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने गुरुवार को कहा कि सितंबर में बातचीत फिर शुरू हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल के शुरू होने से पहले से ही यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने अलास्का समिट भी किया और पुतिन को दावत पर भी बुलाया। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कई बार पुतिन से मिलने मॉस्को जा चुके हैं। बाद में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी इस प्रक्रिया में शामिल हुए। विदेश मंत्री मार्को रुबियो और पूर्व यूक्रेन दूत कीथ केलॉग भी दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए विदेश यात्राएं कर चुके हैं।

ईरान से दूरी बनाने का दबाव

रैटक्लिफ ने मॉस्को यात्रा के दौरान रूस से यह भी आग्रह किया कि वह ईरान के साथ अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंध कम करे, क्योंकि ट्रंप प्रशासन तेहरान के खिलाफ प्रतिबंधों की मुहिम को और तेज कर रहा है।

रूस को चेतावनी भी दी

खबर सामने आई है कि सीआईए चीफ ने रूसी खुफिया अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया कि अमेरिका नाटो के अनुच्छेद 5 के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अनुच्छेद 5 के तहत नाटो के किसी भी सदस्य देश पर हमले को पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। यह चेतावनी हाल की उन खुफिया रिपोर्टों के बीच आई है जिनमें कहा गया है कि रूस आने वाले कुछ वर्षों में नाटो की ताकत को परख सकता है।

रैटक्लिफ को ही क्यों चुना गया

व्हाइट हाउस का मानना है कि रैटक्लिप पहले भी विषम परिस्थितियों में क्रेमलिन के साथ बातचीत करने में कामयाब रहे हैं। वह रूस में बंद अमेरिकी बंदियों को वापस भी ला चुके हैं। उनके पास रूसी खुफिया एजेंसियों से पुराने संपर्क हैं और ट्रंप के करीबी सर्कल में उनकी मजबूत पैठ है, जिसके चलते उन्हें इस संवेदनशील मिशन के लिए चुना गया।

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