Panic Attack: हार्ट अटैक जैसा महसूस हो सकता है पैनिक अटैक, मेयो और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें अचानक क्यों बढ़ जाती है धड़कन

Panic Attack: हार्ट अटैक जैसा महसूस हो सकता है पैनिक अटैक, मेयो और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें अचानक क्यों बढ़ जाती है धड़कन

Panic Attack Symptoms: अचानक सीने में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैरों का ठंडा पड़ जाना और दिल की धड़कन का इतनी तेजी से भागना जैसे सीना चीरकर बाहर आ जाएगी यह अनुभव इतना डरावना होता है कि किसी को भी लग सकता है कि उसे हार्ट अटैक आया है। लेकिन हर बार यह डरावना अनुभव दिल का दौरा ही हो, यह जरूरी नहीं है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह समस्या ‘पैनिक अटैक’ (Panic Attack) की हो सकती है। पैनिक अटैक अचानक और बिना किसी पूर्व चेतावनी के आता है। हालांकि, यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन जब यह अटैक आता है, तो व्यक्ति को लगता है कि उसकी जान जाने वाली है या वह नियंत्रण खो रहा है। आइए समझते हैं कि पैनिक अटैक क्या है, यह क्यों आता है और इसके लक्षण हार्ट अटैक से कितने मिलते-जुलते हैं।

पैनिक अटैक क्या है और यह अचानक क्यों आता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पैनिक अटैक का मतलब है अत्यधिक डर या घबराहट की एक अचानक आने वाली तीव्र लहर। यह तब होता है जब शरीर में कोई वास्तविक खतरा या कोई स्पष्ट कारण न होने पर भी हमारा दिमाग फाइट या फ्लाइट (Fight or Flight) मोड को चालू कर देता है।

1.मस्तिष्क की गलत प्रतिक्रिया- जब हमारे सामने कोई असली खतरा होता है (जैसे कोई हमला कर दे), तो हमारा दिमाग डर का हार्मोन रिलीज करता है ताकि हम भाग सकें या लड़ सकें। पैनिक अटैक में बिना किसी खतरे के भी दिमाग यही प्रतिक्रिया दे देता है।

2. अचानक और तीव्र हमला- यह अटैक आमतौर पर कुछ ही सेकंडों में अपने चरम पर पहुंच जाता है और अक्सर 10 से 20 मिनट के भीतर धीरे-धीरे शांत हो जाता है। हालांकि, इसके बाद व्यक्ति खुद को बेहद थका हुआ और ढीला महसूस करता है।

3. पैनिक डिसऑर्डर- अगर किसी व्यक्ति को बार-बार बिना किसी वजह के ऐसे अटैक आते हैं और वह हर समय इस डर में रहता है कि उसे फिर से पैनिक अटैक न आ जाए, तो इस स्थिति को पैनिक डिसऑर्डर कहा जाता है।

पैनिक अटैक के मुख्य लक्षण क्या हैं?

मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पैनिक अटैक आते ही शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव एक साथ शुरू हो जाते हैं, जिन्हें पहचानना बहुत जरूरी है;

  • दिल अचानक बहुत तेजी से धड़कने लगता है।
  • सांस फूलना और घबराहट।
  • सीने में दर्द या भारीपन।
  • अत्यधिक पसीना और कंपकंपी।
  • चक्कर आना और सिर घूमना।
  • नियंत्रण खोने या मौत का डर।
  • सच्चाई से कटाव महसूस होना।

अचानक धड़कन बढ़ने और पैनिक अटैक आने के मुख्य कारण

  • मानसिक तनाव (Stress)।
  • अनुवांशिकता (Genetics)।
  • अतीत का कोई ट्रॉमा (Trauma)।
  • दिमाग के केमिकल्स में असंतुलन।
  • कैफीन और नशे का सेवन।

हार्ट अटैक और पैनिक अटैक में अंतर कैसे समझें?

यह अंतर समझना बेहद जरूरी है क्योंकि दोनों के लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। पैनिक अटैक में सीने का दर्द अक्सर तेज, चुभने वाला और सीने के बिल्कुल बीच में होता है। जबकि हार्ट अटैक में दर्द के साथ-साथ ऐसा लगता है जैसे सीने पर भारी वजन रख दिया गया हो, और यह दर्द अक्सर बाएं हाथ, जबड़े या पीठ तक फैलता है। पैनिक अटैक 10-20 मिनट में अपने आप कम होने लगता है। लेकिन हार्ट अटैक का दर्द समय के साथ बढ़ता जाता है और ठीक नहीं होता।पैनिक अटैक ज्यादातर आराम से बैठे-बैठे या अचानक आता है, जबकि हार्ट अटैक अक्सर शारीरिक मेहनत (जैसे सीढ़ियां चढ़ना या दौड़ना) के दौरान ज्यादा होता है।

अगर पैनिक अटैक आए तो तुरंत क्या करें?

  • गहरी सांस लें (Box Breathing)।
  • खुद को याद दिलाएं कि यह जानलेवा नहीं है।
  • ध्यान भटकाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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