Nepal Flood: एक तरफ जहां पूरे भारत में रक्षाबंधन का त्योहार बहनों की मुस्कान और खुशियों के साथ मनाया गया, वहीं पड़ोसी देश नेपाल में इस बार राखी पर सिर्फ आंसुओं का सैलाब देखने को मिला। नेपाल में इस बार त्योहार की न तो कोई खुशी थी और न ही कोई रौनक, चारों तरफ सिर्फ तबाही का सन्नाटा और अपनों को खोने का दर्द फैला हुआ था। भयंकर बाढ़ और भूस्खलन के बीच भाई अपनी बहनों के घर तो पहुंचे, लेकिन त्योहार मनाने नहीं, बल्कि मलबे में तब्दील हो चुके घर से जिंदगी समेटने और बहन का दुख बांटने आए थे।
‘भाई तो आ गया, पर खुशियां गायब हैं’, धेनुका का छलका दर्द
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाके से सामने आई धेनुका और उनके भाई बसंत की कहानी इस आपदा का सबसे भावुक चेहरा पेश करती है। धेनुका अपने दो छोटे बच्चों के साथ घर पर अकेली थी क्योंकि उनके पति काम के सिलसिले में विदेश में रहते हैं। जब कुदरत का कहर टूटा तो उनका घर कीचड़ और मलबे से भर गया। खबर मिलते ही उनका भाई बसंत अपनी बहन की मदद के लिए तुरंत भागकर आया। रक्षाबंधन के दिन जहां बहनों के हाथों में मिठाइयां और रेशम के धागे होने चाहिए थे, वहां धेनुका बिखरा सामान समेट रही थी और बसंत मलबे से काम की चीजें निकाल रहा था।
धेनुका ने रोते हुए बताया कि अपना भाई तो आखिर भाई ही होता है जो बहन को मुसीबत में देखकर खुद को रोक नहीं पाता। उन्होंने कहा कि अब तो रोते-रोते आंसू भी सूख चुके हैं, बस भाई के साथ खड़े होने से थोड़ी हिम्मत बंधी है। वहीं भाई बसंत का दर्द छलका कि उनकी बहन बहुत मजबूत है, लेकिन कोई भी भाई अपनी बहन को इस हाल में नहीं देखना चाहेगा। उनका कहना था कि कुदरत के इस भयंकर कहर के आगे इंसान पूरी तरह बेबस हो चुका है।
550 से ज्यादा की मौत, 1900 से अधिक लापता
नेपाल में हुई इस मूसलाधार बारिश और कीचड़ के सैलाब ने हर तरफ भारी तबाही मचाई है। नेपाली अधिकारियों और पुलिस के अनुसार अब तक 550 से अधिक लोगों के शव मिल चुके हैं। इसके अलावा स्थानीय निवासियों, विदेशी पर्यटकों, ट्रेकर्स और श्रद्धालुओं समेत लगभग 1,924 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। इतने खराब हालात के बावजूद सेना और राहत टीमों ने अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
सुरंग में फंसे 100 लोग, नई झील बनने से बढ़ा खतरा
नेपाल में तबाही का खतरा अभी टला नहीं है। पहाड़ों पर ग्लेशियर टूटने से एक नई झील बन गई है, जिसके भरने और बहने के डर से पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं तिब्बत की सीमा की तरफ से एक बांध के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलने के बाद नेपाली पुलिस ने नदी तटीय इलाकों में तैनात सुरक्षा कर्मियों और ग्रामीणों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। सबसे ज्यादा चिंता एक पनबिजली प्लांट की है, जहां कीचड़ और मलबे के कारण सुरंग में 100 से ज्यादा मजदूर फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल सेना का विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
चीन सीमा पर भी तबाही, हेलीकॉप्टरों से भेजी जा रही मदद
इस आपदा का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन के तिब्बती इलाके में भी भारी नुकसान देखा गया है। चीनी मीडिया के अनुसार सीमा पार भी कई मौतों की पुष्टि हुई है और सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित दुर्गम गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।

