खैरथल-तिजारा जिले में नंगली ओझा में श्मशान घाट तक पहुंचने वाला रास्ता बदहाल और इतना संकरा हो गया है कि लोगों को अंतिम यात्रा के दौरान भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते की समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और स्थानीय जिम्मेदारों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। हाल ही में जाटव समाज की 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला कलादेवी का निधन हुआ। जब ग्रामीण उनकी पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जा रहे थे, तो बदहाल और संकरे रास्ते के कारण उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को रास्ते में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीण फतेहसिंह, भजनलाल, किशोरी और रोशनलाल ने बताया कि श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता पहले पर्याप्त चौड़ा था, लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति खराब होती चली गई। वर्तमान में आवागमन के लिए महज एक संकरी डोल जैसी जगह बची है। ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दौरान हालात और भी खराब हो जाते हैं और रास्ते से निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। ‘श्मशान घाट पूरे गांव की सुविधा, रास्ता भी होना चाहिए सुगम’ ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट किसी एक परिवार या समाज की सुविधा नहीं, बल्कि पूरे गांव की सार्वजनिक आवश्यकता है। ऐसे में वहां तक पहुंचने के लिए सुरक्षित और सुगम रास्ता होना जरूरी है। उनका कहना है कि जब किसी परिवार में मृत्यु होती है, उस समय पहले से ही लोग दुख में होते हैं। ऐसे में शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए रास्ते में संघर्ष करना बेहद पीड़ादायक स्थिति है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट तक जाने वाले पुराने रास्ते की मौके पर जांच कर उसकी वास्तविक चौड़ाई सुनिश्चित की जाए तथा रास्ते को जल्द दुरुस्त कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखेंगे।

