खरगोन में रक्षाबंधन के अवसर पर खरगोन में भगवान को पहली राखी बांधने की अनूठी परंपरा देखने को मिली। शुक्रवार सुबह शहर के करीब 500 साल पुराने श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में भगवान गणेश को 16 वर्गफीट की विशेष राखी अर्पित की गई। राखी पर 12 ज्योतिर्लिंगों की तस्वीरें उकेरी गई थीं। इस दौरान शहर की सुख-समृद्धि, शांति और सुरक्षा की कामना की गई। यह विशाल राखी शहर की पलक भालसे ने करीब 15 दिनों की मेहनत से तैयार की। पलक हर साल भगवान गणेश के लिए अलग-अलग थीम पर राखी बनाती हैं। इस बार उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंगों को थीम बनाया। उनका कहना है कि राखी बनाने का विचार पहले से तय नहीं होता, बल्कि ईश्वर की प्रेरणा से उन्हें थीम सूझती है। शुक्रवार सुबह पंडित प्रणय भट्ट के सानिध्य में पलक ने श्वेता और अन्य बहनों के साथ भगवान सिद्धिविनायक को राखी अर्पित की। इससे पहले पलक भगवान के लिए ‘विश्वगुरु भारत’, ‘अष्टविनायक गणेश’ और ‘सनातन भारत’ जैसी थीम पर भी राखियां बना चुकी हैं। एक ही पाषाण पर बनी है भगवान की प्रतिमा मंदिर के पुजारी पंडित प्रणय भट्ट ने बताया कि भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा एक ही पाषाण से बनी है। प्रतिमा के हाथ में शिवलिंग की अंगूठी, तीसरा नेत्र और सूंड पर नाग बना हुआ है। भगवान के गले में 108 दानों की रुद्राक्ष माला भी सुशोभित है। कुंदा नदी के तट पर मिली थी प्रतिमा मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, करीब 500 साल पहले नवलपुरा में नागा साधुओं ने बड़ा यज्ञ किया था। यज्ञ के बाद साधु भगवान की प्रतिमा लेकर कुंदा नदी के तट पर पहुंचे और रात में वहीं विश्राम किया। उन्होंने प्रतिमा को नदी किनारे रख दिया। सुबह जब साधुओं ने प्रतिमा को उठाने का प्रयास किया तो वह अपने स्थान से नहीं हिली। साधुओं ने इसे भगवान की इच्छा माना और प्रतिमा वहीं छोड़कर चले गए। इसके बाद कुंदा नदी के तट पर ही भगवान सिद्धिविनायक की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। देखे तस्वीरें:-

