दरभंगा में दुष्कर्म मामले में उम्र कैद की सजा:गर्भवती हो गई थी नाबालिग, सात दिन पहले कोर्ट ने दोषी करार दिया था

दरभंगा में दुष्कर्म मामले में उम्र कैद की सजा:गर्भवती हो गई थी नाबालिग, सात दिन पहले कोर्ट ने दोषी करार दिया था

दरभंगा में नाबालिग से दुष्कर्म हुई था, वो प्रेग्नेंट हो गई थी। मामले में पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश सुलेखा झा की आदालत ने गुरुवार को भालपट्‌टी के रहने वाले अनिरुद्ध मंडल को उम्र कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही पीड़िता के पुनर्वास के लिए बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है। प्रतिकर राशि का भुगतान जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से किया जाएगा। पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार पराजित ने बताया कि अभियुक्त ने दादा-दादी की अनुपस्थिति में बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। चाइल्डलाइन की मदद से मामले में महिला थाना में कांड संख्या 92/22 दर्ज कराया गया। इसके बाद जीआर संख्या 102/23 के तहत न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई। डीएनए टेस्ट कराया गया
अनुसंधान के दौरान जन्मे बच्चे और अभियुक्त का डीएनए टेस्ट कराया गया। जांच में दोनों का डीएनए समान पाया गया, जिससे अभियोजन के मामले को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य मिला।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में सात गवाहों की गवाही कराई गई। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान का परीक्षण करने के बाद 19 अगस्त को ही अभियुक्त को दोषी करार दिया था।
गुरुवार को सजा के बिंदु पर अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद अदालत ने सजा सुनाई। पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अनिरुद्ध मंडल को आजीवन सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दरभंगा में नाबालिग से दुष्कर्म हुई था, वो प्रेग्नेंट हो गई थी। मामले में पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश सुलेखा झा की आदालत ने गुरुवार को भालपट्‌टी के रहने वाले अनिरुद्ध मंडल को उम्र कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही पीड़िता के पुनर्वास के लिए बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है। प्रतिकर राशि का भुगतान जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से किया जाएगा। पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार पराजित ने बताया कि अभियुक्त ने दादा-दादी की अनुपस्थिति में बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। चाइल्डलाइन की मदद से मामले में महिला थाना में कांड संख्या 92/22 दर्ज कराया गया। इसके बाद जीआर संख्या 102/23 के तहत न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई। डीएनए टेस्ट कराया गया
अनुसंधान के दौरान जन्मे बच्चे और अभियुक्त का डीएनए टेस्ट कराया गया। जांच में दोनों का डीएनए समान पाया गया, जिससे अभियोजन के मामले को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य मिला।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में सात गवाहों की गवाही कराई गई। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान का परीक्षण करने के बाद 19 अगस्त को ही अभियुक्त को दोषी करार दिया था।
गुरुवार को सजा के बिंदु पर अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद अदालत ने सजा सुनाई। पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अनिरुद्ध मंडल को आजीवन सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।  

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