999 करोड़ राजस्व नुकसान का आरोप:हाईकोर्ट का आदेश- पैनम कोल माइंस में अवैध खनन की अब एसीबी जांच होगी

999 करोड़ राजस्व नुकसान का आरोप:हाईकोर्ट का आदेश- पैनम कोल माइंस में अवैध खनन की अब एसीबी जांच होगी

झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को पाकुड़ की पैनम कोल माइंस से जुड़े अवैध खनन और रॉयल्टी के रूप में सरकारी राजस्व को हुए नुकसान के मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वर्ष 2015 में दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की ओर से दी गई जांच रिपोर्ट पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार को एसीबी से जांच कराकर रिपोर्ट 5 नवंबर तक हाईकोर्ट में पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राम सुभग सिंह की ओर से बताया गया कि पैनम कोल माइंस में अवैध खनन से जुड़े मामले की जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, इसके बावजूद सरकार ने जिम्मेदारी तय नहीं की। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट पहुंचे…पैनम कोल माइंस में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने पर अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने कोयला खनन में नियमों का उल्लंघन किया और सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी का नुकसान हुआ। मामले की पहले जांच हुई थी। लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। 11 साल पहले आयुक्त ने की थी जांच, डीसी को शो-कॉज तक सिमटा मामला…सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर 2015 को दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की ओर से तैयार जांच रिपोर्ट का जिक्र किया। कोर्ट को बताया गया कि रिपोर्ट में कई सवाल उठाए गए थे, पर तत्कालीन पाकुड़ डीसी सुनील कुमार को केवल शोकॉज किया गया। इसी के बाद अदालत ने एसीबी से जांच कराने का निर्देश दिया। एसीबी जांच में लीज शर्तों व राजस्व नुकसान का आकलन होगा एसीबी जांच में वित्तीय गड़बड़ियों, सरकारी राजस्व के नुकसान और जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की पड़ताल होगी। यह भी पता चलेगा कि तय नियमों और लीज शर्तों का पालन हुआ था या नहीं। रॉयल्टी की गणना और भुगतान में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इसके अलावा दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर क्या कार्रवाई हुई, यह भी सामने आएगा। मनोज कुमार, अधिवक्ता झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को पाकुड़ की पैनम कोल माइंस से जुड़े अवैध खनन और रॉयल्टी के रूप में सरकारी राजस्व को हुए नुकसान के मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वर्ष 2015 में दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की ओर से दी गई जांच रिपोर्ट पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार को एसीबी से जांच कराकर रिपोर्ट 5 नवंबर तक हाईकोर्ट में पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राम सुभग सिंह की ओर से बताया गया कि पैनम कोल माइंस में अवैध खनन से जुड़े मामले की जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, इसके बावजूद सरकार ने जिम्मेदारी तय नहीं की। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट पहुंचे…पैनम कोल माइंस में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने पर अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने कोयला खनन में नियमों का उल्लंघन किया और सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी का नुकसान हुआ। मामले की पहले जांच हुई थी। लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। 11 साल पहले आयुक्त ने की थी जांच, डीसी को शो-कॉज तक सिमटा मामला…सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर 2015 को दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की ओर से तैयार जांच रिपोर्ट का जिक्र किया। कोर्ट को बताया गया कि रिपोर्ट में कई सवाल उठाए गए थे, पर तत्कालीन पाकुड़ डीसी सुनील कुमार को केवल शोकॉज किया गया। इसी के बाद अदालत ने एसीबी से जांच कराने का निर्देश दिया। एसीबी जांच में लीज शर्तों व राजस्व नुकसान का आकलन होगा एसीबी जांच में वित्तीय गड़बड़ियों, सरकारी राजस्व के नुकसान और जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की पड़ताल होगी। यह भी पता चलेगा कि तय नियमों और लीज शर्तों का पालन हुआ था या नहीं। रॉयल्टी की गणना और भुगतान में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इसके अलावा दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर क्या कार्रवाई हुई, यह भी सामने आएगा। मनोज कुमार, अधिवक्ता  

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