नालंदा जिले में पुलिस और उत्पाद विभाग की अभिरक्षा से बंदियों के फरार होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बिहार थाना क्षेत्र स्थित सदर अस्पताल का है, जहां गुरुवार को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए लाया गया एक शराब तस्कर सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर हथकड़ी सरकाकर फरार हो गया। हालांकि, अस्पताल में तैनात होमगार्ड जवान की सूझबूझ और फुर्ती के चलते आरोपी को पीछा कर दोबारा दबोच लिया गया। उत्पाद विभाग की टीम ने हरनौत थाना क्षेत्र निवासी प्रिंस कुमार को 168 लीटर बीयर और 105 लीटर विदेशी शराब की खेप के साथ गिरफ्तार किया था। न्यायिक हिरासत में जेल भेजने से पहले नियमानुसार मेडिकल जांच के लिए कर्मी उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल परिसर में जवानों की ढिलाई का फायदा उठाकर प्रिंस ने हथकड़ी से हाथ निकाला और मुख्य द्वार से बाहर दौड़ लगा दी। बंदी को भागते देख ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड जवान ने तुरंत बाइक से उसका पीछा किया और डीएम-एसपी आवास मार्ग के पास उसे घेरकर पकड़ लिया। बाद में उसे उत्पाद विभाग के कर्मियों के हवाले किया गया। चार दिन पहले टोटो से कूदकर गलियों में भागा था कैदी जिले में अभिरक्षा से भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते रविवार को भी लहेरी थाना क्षेत्र के रांची रोड में ऐसा ही हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला था। नालंदा मोड़ से शराब के साथ पकड़े गए इस्लामपुर के मोनमा निवासी अखिलेश कुमार को जब पुलिस टोटो से जेल ले जा रही थी, तब वह भी हथकड़ी सरकाकर चलती टोटो से कूदकर फरार हो गया था। करीब 10 मिनट तक गलियों में पुलिस और आरोपी के बीच दौड़ हुई और आखिरकार स्थानीय लोगों की मदद से उसे पकड़ा जा सका। लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी पुलिस नहीं ले रही सबक सदर अस्पताल और सार्वजनिक मार्गों पर लगातार बंदियों के भागने की घटनाएं सुरक्षा तंत्र की भारी लापरवाही को उजागर कर रही हैं। हथकड़ी ढीली बांधना, कैदियों को सुरक्षित वाहन के बजाय टोटो से ले जाना और निगरानी में ढिलाई बरतना सीधे तौर पर पुलिस और मद्यनिषेध विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। हर बार स्थानीय लोगों या किसी सजग जवान की तत्परता से कैदी पकड़ तो लिए जाते हैं, लेकिन बार-बार दोहराई जा रही इन चूकों से विभाग कोई ठोस सबक लेता नहीं दिख रहा है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं। नालंदा जिले में पुलिस और उत्पाद विभाग की अभिरक्षा से बंदियों के फरार होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बिहार थाना क्षेत्र स्थित सदर अस्पताल का है, जहां गुरुवार को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए लाया गया एक शराब तस्कर सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर हथकड़ी सरकाकर फरार हो गया। हालांकि, अस्पताल में तैनात होमगार्ड जवान की सूझबूझ और फुर्ती के चलते आरोपी को पीछा कर दोबारा दबोच लिया गया। उत्पाद विभाग की टीम ने हरनौत थाना क्षेत्र निवासी प्रिंस कुमार को 168 लीटर बीयर और 105 लीटर विदेशी शराब की खेप के साथ गिरफ्तार किया था। न्यायिक हिरासत में जेल भेजने से पहले नियमानुसार मेडिकल जांच के लिए कर्मी उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल परिसर में जवानों की ढिलाई का फायदा उठाकर प्रिंस ने हथकड़ी से हाथ निकाला और मुख्य द्वार से बाहर दौड़ लगा दी। बंदी को भागते देख ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड जवान ने तुरंत बाइक से उसका पीछा किया और डीएम-एसपी आवास मार्ग के पास उसे घेरकर पकड़ लिया। बाद में उसे उत्पाद विभाग के कर्मियों के हवाले किया गया। चार दिन पहले टोटो से कूदकर गलियों में भागा था कैदी जिले में अभिरक्षा से भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते रविवार को भी लहेरी थाना क्षेत्र के रांची रोड में ऐसा ही हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला था। नालंदा मोड़ से शराब के साथ पकड़े गए इस्लामपुर के मोनमा निवासी अखिलेश कुमार को जब पुलिस टोटो से जेल ले जा रही थी, तब वह भी हथकड़ी सरकाकर चलती टोटो से कूदकर फरार हो गया था। करीब 10 मिनट तक गलियों में पुलिस और आरोपी के बीच दौड़ हुई और आखिरकार स्थानीय लोगों की मदद से उसे पकड़ा जा सका। लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी पुलिस नहीं ले रही सबक सदर अस्पताल और सार्वजनिक मार्गों पर लगातार बंदियों के भागने की घटनाएं सुरक्षा तंत्र की भारी लापरवाही को उजागर कर रही हैं। हथकड़ी ढीली बांधना, कैदियों को सुरक्षित वाहन के बजाय टोटो से ले जाना और निगरानी में ढिलाई बरतना सीधे तौर पर पुलिस और मद्यनिषेध विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। हर बार स्थानीय लोगों या किसी सजग जवान की तत्परता से कैदी पकड़ तो लिए जाते हैं, लेकिन बार-बार दोहराई जा रही इन चूकों से विभाग कोई ठोस सबक लेता नहीं दिख रहा है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं।

