गयाजी में अवैध वसूली के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक(IG) विकास वैभव के निर्देश पर वरीय पुलिस अधीक्षक(SSP) सुशील कुमार ने गुरारू थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार को पद से हटा दिया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से पुलिस केंद्र में पदस्थापित किया गया है। यह कार्रवाई शराब माफिया, बालू माफिया और मिट्टी लदे वाहनों से अवैध वसूली के आरोपों के बाद हुई है। IG विकास वैभव को आवेदक रविशंकर अवस्थी ने एक शिकायत दी थी। जिसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार और चौकीदार दुर्गी पासवान के पुत्र ललन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप लगाया था कि थाना क्षेत्र में अवैध वसूली नियमित रूप से की जा रही है। इस शिकायत के बाद मामले की जांच पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दिव्यांजलि जायसवाल से कराई गई। जांच के दौरान गोपनीय सूचनाओं के माध्यम से तथ्यों की जानकारी जुटाई गई।
चौकीदार के बेटे के माध्यम से अवैध वसूली का आरोप रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को गंभीर माना गया। बताया गया कि थानाध्यक्ष गुरारू द्वारा चौकीदार दुर्गी पासवान के पुत्र ललन कुमार को थाना पर रखकर अवैध वसूली का काम कराया जा रहा है। इन तथ्यों के आधार पर थानाध्यक्ष और चौकीदार के पुत्र ललन कुमार का आचरण संदिग्ध पाया गया। विभागीय स्तर पर सामने आई रिपोर्ट के बाद वरीय पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस विभाग ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में थानाध्यक्ष के पद पर अखिलेश कुमार का बने रहना प्रशासनिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। इसके बाद तत्काल प्रभाव से उन्हें गुरारू थानाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। जिला पुलिस केंद्र भेजा गया इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि पुलिस विभाग अपने ही अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सामने आने वाली शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है। खासकर अवैध वसूली जैसे आरोपों पर जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जारी आदेश में अखिलेश कुमार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का उल्लेख नहीं है, बल्कि उन्हें थानाध्यक्ष पद से हटाकर पुलिस केंद्र में पदस्थापित करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि गुरारू थाना क्षेत्र में शराब, बालू और मिट्टी से जुड़े अवैध कारोबार को लेकर समय-समय पर पुलिस की कार्रवाई होती रही है। ऐसे में थाना स्तर से ही अवैध वसूली के आरोप सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में आगे विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और गुरारू थाना की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाती है। गयाजी में अवैध वसूली के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक(IG) विकास वैभव के निर्देश पर वरीय पुलिस अधीक्षक(SSP) सुशील कुमार ने गुरारू थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार को पद से हटा दिया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से पुलिस केंद्र में पदस्थापित किया गया है। यह कार्रवाई शराब माफिया, बालू माफिया और मिट्टी लदे वाहनों से अवैध वसूली के आरोपों के बाद हुई है। IG विकास वैभव को आवेदक रविशंकर अवस्थी ने एक शिकायत दी थी। जिसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार और चौकीदार दुर्गी पासवान के पुत्र ललन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप लगाया था कि थाना क्षेत्र में अवैध वसूली नियमित रूप से की जा रही है। इस शिकायत के बाद मामले की जांच पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दिव्यांजलि जायसवाल से कराई गई। जांच के दौरान गोपनीय सूचनाओं के माध्यम से तथ्यों की जानकारी जुटाई गई।
चौकीदार के बेटे के माध्यम से अवैध वसूली का आरोप रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को गंभीर माना गया। बताया गया कि थानाध्यक्ष गुरारू द्वारा चौकीदार दुर्गी पासवान के पुत्र ललन कुमार को थाना पर रखकर अवैध वसूली का काम कराया जा रहा है। इन तथ्यों के आधार पर थानाध्यक्ष और चौकीदार के पुत्र ललन कुमार का आचरण संदिग्ध पाया गया। विभागीय स्तर पर सामने आई रिपोर्ट के बाद वरीय पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस विभाग ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में थानाध्यक्ष के पद पर अखिलेश कुमार का बने रहना प्रशासनिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। इसके बाद तत्काल प्रभाव से उन्हें गुरारू थानाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। जिला पुलिस केंद्र भेजा गया इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि पुलिस विभाग अपने ही अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सामने आने वाली शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है। खासकर अवैध वसूली जैसे आरोपों पर जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जारी आदेश में अखिलेश कुमार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का उल्लेख नहीं है, बल्कि उन्हें थानाध्यक्ष पद से हटाकर पुलिस केंद्र में पदस्थापित करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि गुरारू थाना क्षेत्र में शराब, बालू और मिट्टी से जुड़े अवैध कारोबार को लेकर समय-समय पर पुलिस की कार्रवाई होती रही है। ऐसे में थाना स्तर से ही अवैध वसूली के आरोप सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में आगे विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और गुरारू थाना की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाती है।

