नेपाल में बुधवार को आए प्राकृतिक प्रकोप ने भारी तबाही मचाई है। तिब्बत में आए भूकंप के बाद ग्लेशियर फटने से नदियों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई जिलों को जलमग्न कर दिया। पुलिस ने बताया कि बुधवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 160 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है और 157 शव बरामद किए गए हैं। हालांकि, मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है क्योंकि 750 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
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लापता लोगों में 391 विदेशी हैं, जिनमें से 133 भारतीय नागरिक हैं। नेपाल में अभी बचाव अभियान चल रहा है और प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह ने कहा है कि सरकार ज़रूरतमंदों को हर ज़रूरी मदद देगी। शाह ने एक बयान में कहा, “आपने जो दर्द और नुकसान सहा है, वह कम नहीं है।” “लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि इस मुश्किल समय में आप अकेले नहीं हैं — सरकार अपने सभी साधनों और संसाधनों के साथ आपके साथ खड़ी है।”
खबरों के मुताबिक, तिब्बत की तरफ से सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ा। नेपाल सेना ने एक बयान में कहा कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा ज़िले के तिमुरे और आस-पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी तबाही हुई; कई गाड़ियाँ, सामान और दूसरी संपत्तियाँ बह गईं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इस भयानक बाढ़ को देखते हुए बचाव और राहत कार्यों में तेज़ी लाने के लिए रसुवा और आस-पास के इलाकों में नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।
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नेपाल बाढ़ त्रासदी: 10 मुख्य बातें-
आपदा की वजह: बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार 8:37 बजे तिब्बत में आए भूकंप के बाद ग्लेशियर फट गया, जिससे भोटे कोशी नदी में अचानक भीषण बाढ़ आ गई।
प्रभावित क्षेत्र: बाढ़ की शुरुआत रसुवा और धाडिंग से हुई, जिसके बाद पानी का बहाव नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुँ और नवलपरासी ईस्ट तक फैल गया।
बुनियादी ढांचे को नुकसान: बाढ़ से कई कस्बे और गाँव तबाह हो गए, महत्वपूर्ण पुल बह गए और रसुवागढ़ी (111 MW), संजेन खोला (78 MW) तथा अपर त्रिशूली 3A (60 MW) जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गईं।
सेना का बचाव अभियान: स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। नेपाली सेना प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव कार्य के लिए 12 हेलीकॉप्टरों की मदद से अभियान चला रही है।
भारत की त्वरित सहायता: भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए 10 टन मानवीय सहायता (HADR सामग्री) और जरूरी दवाइयाँ काठमांडू भेजी हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने और सहायता भेजने की पुष्टि की है।
प्रधानमंत्री मोदी का आश्वासन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया और कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ एकजुट खड़ा है।
भारतीय दूतावास के इमरजेंसी नंबर: काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आपातकालीन नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 जारी किए हैं।
राहत कार्य में समन्वय: भारतीय दूतावास प्रभावित भारतीयों के जल्द से जल्द बचाव और राहत के लिए नेपाल सरकार के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर रहा है।
चीन का बचाव कदम: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सीमावर्ती इलाकों में तलाशी और बचाव अभियान के लिए आदेश दिए हैं। पीपल्स आर्म्ड पुलिस के 145 जवानों को प्रभावित बॉर्डर पोर्ट पर तैनात किया गया है।
द्वितीयक आपदाओं से सतर्कता: शी जिनपिंग ने घायलों को त्वरित इलाज देने, वैज्ञानिक बचाव कार्य करने, संचार बहाल करने और भविष्य के खतरों के लिए निगरानी प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

