अमेरिका में महंगाई को लेकर राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को जुलाई के आंकड़ों ने एक बार फिर चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत बढ़ा है। यह जून के बराबर है, जबकि अर्थशास्त्रियों ने इसके 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह लगातार 65वां महीना है जब अमेरिका में महंगाई अमेरिकी केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। मासिक आधार पर भी कीमतों में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। जुलाई में यह सूचकांक 0.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून में इसमें 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अर्थशास्त्रियों ने जुलाई में केवल 0.1 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था।
खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर देखी जाने वाली मुख्य महंगाई दर भी सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत रही। जून में भी यह दर इतनी ही थी। हालांकि, मासिक आधार पर मुख्य महंगाई जून के 0.1 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 0.2 प्रतिशत हो गई है। यही आंकड़ा अमेरिकी केंद्रीय बैंक के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इससे कीमतों में बनी मूल प्रवृत्ति का अंदाजा लगाया जाता है।
आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ गई है। बाजार के अनुमान के अनुसार, 15 और 16 सितंबर की बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की संभावना रिपोर्ट आने से पहले करीब 36 प्रतिशत थी, जो बढ़कर लगभग 42 प्रतिशत हो गई। महंगाई पर नजर रखने वाली संस्था के प्रमुख ओमैर शरीफ ने कहा कि ताजा आंकड़े ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में जाते हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका में महंगाई मई में तीन साल के उच्च स्तर 4.1 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। उस समय ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष तथा अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा था। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को तेजी दी थी। बाद में तेल की कीमतें नीचे आईं, लेकिन महंगाई में अपेक्षित तेजी से सुधार नहीं हुआ है।
इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए आयात शुल्क भी कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। कनाडा के साथ व्यापार वार्ता टूटने के बाद करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर नए शुल्क लगाने की तैयारी ने भी भविष्य की महंगाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
बता दें कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की प्रमुख ब्याज दर दिसंबर से 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पहले की गई तेज दर वृद्धि के बावजूद यह अभी दो प्रतिशत के लक्ष्य तक नहीं पहुंची है।
इस बीच आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो ने दूसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 1.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। हालांकि, अप्रैल से जून के बीच उपभोक्ता खर्च को 3.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.4 प्रतिशत किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग अब भी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। ऐसे में फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक गतिविधियों को कमजोर होने से बचाने के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होने वाला है।

