इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अंबेडकरनगर के प्रेस क्लब के नवीनीकरण और विस्तार के लिए दिए गए 1.17 करोड़ रुपये के ठेके को रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने निविदा प्रक्रिया में गंभीर खामी पाई, विशेषकर ठेकेदार को पहले अयोग्य ठहराने और बाद में योग्य मानने की जानकारी शिकायतकर्ता को न देने पर आपत्ति जताई। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि यह ठेका छह माह में पूरा होना है और दो माह से अधिक समय से निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में, अब ठेका रद्द करने या काम रोकने से सार्वजनिक परियोजना प्रभावित होगी, जो जनहित में नहीं है। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने 21 अगस्त को रंजना पांडेय की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता रंजना पांडेय ने आरोप लगाया था कि सह-निविदाकार एमएस जय प्रकाश वर्मा ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में चल रहे 3.72 लाख रुपये के कार्य की जानकारी छिपाई। इससे उनकी बोली क्षमता अधिक दिखाई गई। स्थानीय निविदा मूल्यांकन समिति ने 22 अप्रैल को इस शिकायत को सही मानते हुए वर्मा की बोली को गैर-उत्तरदायी घोषित कर दिया था। बाद में, मुख्यालय निविदा निस्तारण समिति ने इस मामले को पुनर्विचार के लिए स्थानीय समिति के पास भेजा। पुनर्विचार के बाद, संबंधित ठेकेदार को तकनीकी रूप से योग्य माना गया और 30 मई को परिणाम पोर्टल पर अपलोड किया गया। इसके बाद 8 जून को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी हुआ और 10 जून को ठेका दे दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि पुनर्विचार में ठेकेदार को योग्य ठहराए जाने की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्हें इसकी जानकारी वित्तीय बोली खुलने के बाद मिली। न्यायालय ने स्वीकार किया कि इस बदलाव के कारणों की जानकारी याचिकाकर्ता को दी जानी चाहिए थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निविदा मामलों में तय सिद्धांतों और व्यापक जनहित को देखते हुए, न्यायालय ने ठेका रद्द करने, वित्तीय बोली खोलने की कार्रवाई निरस्त करने अथवा निर्माण कार्य रोकने से इनकार कर दिया।

