Youngest IITian Satyam Kumar: बिहार के बक्सर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वैज्ञानिक बनने तक का सफर किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। यह कहानी है सत्यम कुमार की। जब आम बच्चे स्कूल की शुरुआती पढ़ाई में उलझे होते हैं, तब सत्यम ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार IIT एंट्रेंस एग्जाम पास कर ली थी। आज वही सत्यम अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। जानिए सत्यम की सफलता की फिल्मी कहानी।
किसान परिवार में हुआ जन्म
सत्यम का जन्म 20 जुलाई, 1999 को बिहार के बक्सर स्थित बखोरापुर गांव में हुआ था। उनके पिता एक साधारण किसान हैं। बचपन से ही सत्यम पढ़ाई में बहुत तेज थे। उनकी इस असाधारण प्रतिभा को देखते हुए परिवार के एक परिचित ने उनके पिता को सलाह दी कि बच्चे को तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा भेजा जाए। यही एक फैसला सत्यम की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
12 साल की उम्र में रचा इतिहास
सत्यम ने पहली बार साल 2011 में IIT प्रवेश परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस असफलता से उन्होंने हार नहीं मानी और अगले ही साल महज़ 12 वर्ष की उम्र में यह कठिन परीक्षा पास कर ली। सत्यम इतने पर ही नहीं रुके। अपनी रैंक सुधारने के लिए उन्होंने 13 साल की उम्र में 2012 में दोबारा परीक्षा दी और पूरे भारत में 670वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही वह देश के सबसे कम उम्र के IIT छात्रों में शुमार हो गए।
IIT कानपुर में लिया एडमिशन
सत्यम ने IIT कानपुर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech और M.Tech ड्यूल डिग्री प्रोग्राम में दाखिला लिया। यहां उनका ध्यान सिर्फ किताबी पढ़ाई या परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं था। वे रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग जैसे आधुनिक विषयों में गहरी रुचि लेने लगे। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसा रोबोट बनाया जो जमीन और पानी दोनों पर चल सकता था। उनकी इसी लगन के कारण 2016 में उन्हें फ्रांस में रिसर्च इंटर्नशिप के लिए प्रतिष्ठित चारपाक स्कॉलरशिप भी मिली।
24 साल की उम्र में पूरी की PhD
साल 2018 में आईआईटी कानपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद सत्यम आगे की रिसर्च के लिए अमेरिका चले गए। 2019 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में अपनी पीएचडी शुरू की। उनका रिसर्च मशीन लर्निंग और ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस पर केंद्रित था। यह एक ऐसी उन्नत तकनीक है जो इंसानी दिमाग के संकेतों को समझ सकती है। अपनी शानदार मेहनत के दम पर सितंबर 2024 में, केवल 24 साल की उम्र में सत्यम ने अपनी पीएचडी पूरी कर ली।
Apple और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स जैसी कंपनियों में किया काम
अपनी पीएचडी के दौरान ही सत्यम ने दुनिया की दिग्गज कंपनी Apple में मशीन लर्निंग इंटर्न के तौर पर काम किया। साल 2024 में Apple के साथ स्विट्जरलैंड में अपनी सेवाएं देने के बाद, आज वह अमेरिका में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स में मशीन लर्निंग सिस्टम्स रिसर्च इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। अब वह उसी तकनीक को असल जिंदगी में उतारने का काम कर रहे हैं, जिसकी उन्होंने सालों तक पढ़ाई की है।
सत्यम कुमार ने 12 साल की उम्र में मिली कामयाबी को अपना अंतिम लक्ष्य नहीं माना, बल्कि उसे एक सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। बिहार के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अमेरिका की अत्याधुनिक लैब्स तक सत्यम ने साबित कर दिया है कि अगर सच्ची लगन से मेहनत की जाए तो, कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

